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जल, जंगल, जमीन, जानवर एवं जन के समग्र वन हेल्थ मिशन से होगा पर्यावरण संरक्षण : डॉ. दत्तात्रेय चौधरी

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05 Jun 26
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जल, जंगल, जमीन, जानवर एवं जन के समग्र वन हेल्थ मिशन से होगा पर्यावरण संरक्षण : डॉ. दत्तात्रेय चौधरी

उदयपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शिल्पग्राम नर्सरी में आयोजित वंदे गंगाजल अभियान के समापन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए ब्लॉक पशुपालन अधिकारी डॉ. दत्तात्रेय चौधरी ने कहा कि जल, जंगल, जमीन, जानवर एवं जन के समग्र वन हेल्थ मिशन से ही पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास संभव है।
उन्होंने बताया कि गंगा दशमी से विश्व पर्यावरण दिवस तक चलाए गए वंदे गंगाजल संरक्षण जन अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा तथा प्रकृति के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना रहा है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि तहसीलदार बड़गांव हितेंद्र त्रिवेदी, नायब तहसीलदार राजपुरोहित, सहायक विकास अधिकारी हितेश जोशी, शिल्पग्राम नर्सरी प्रभारी राणावत सहित अनेक अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान वृक्षारोपण, नर्सरी अवलोकन, वंदे गंगाजल शपथ तथा पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। तहसीलदार हितेंद्र त्रिवेदी ने कहा कि 10 दिवसीय सरकारी अभियान भले ही पूर्ण हो गया हो, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति को अपने कार्यालय अथवा घर पर कम से कम पांच पौधे लगाकर उन्हें पांच वर्षों तक जीवित रखने का संकल्प लेना चाहिए। इससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने तथा पृथ्वी के बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी।
डॉ. चौधरी ने वन हेल्थ मिशन की जानकारी देते हुए कहा कि जल, जंगल, जमीन और जानवरों का मानव जीवन में विशेष महत्व है तथा प्रकृति के साथ संतुलित तालमेल बनाकर ही स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जलवायु संकट भविष्य की नहीं बल्कि वर्तमान की चुनौती है। ग्रीनहाउस गैसों में कमी, स्वच्छ ऊर्जा में निवेश तथा टिकाऊ जीवनशैली अपनाकर ही इस चुनौती का समाधान संभव है।
उन्होंने वर्षा जल संचयन को जन-जन की आदत बनाने, तालाबों एवं प्राकृतिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, स्थानीय प्रजातियों के वृक्ष लगाने, प्लास्टिक उपयोग कम करने तथा ऊर्जा एवं पानी की बचत को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वन विभाग द्वारा भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विशेष पहल करते हुए सज्जनगढ़ एवं अन्य विभागीय कार्यक्रमों में प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रखा गया। अतिथियों को कांच की बोतलों में पेयजल उपलब्ध कराया गया तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए तुलसी के पौधे भेंट किए गए।
कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण एवं जल संवर्धन के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
 


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