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7 वर्ष की उम्र में उठा पिता का साया, माँ ने धागा फैक्ट्री में मेहनत कर लाल को बनाया फौजी

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22 Jun 26
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7 वर्ष की उम्र में उठा पिता का साया, माँ ने धागा फैक्ट्री में मेहनत कर लाल को बनाया फौजी

उदयपुर। जिले के खेरोदा कस्बे के वीर सपूत कुलदीप सिंह राठौड़ भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में 6 माह की कठिन ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी कर सोमवार को अपने गृह नगर खेरोदा लौटे। देश सेवा का गौरवपूर्ण संकल्प लेकर लौटे वीर जवान का पूरे गांव ने पलक-पावड़े बिछाकर ऐतिहासिक और भव्य स्वागत किया। कुलदीप के महाराष्ट्र के अहिल्या नगर में स्थित आर्म्ड क्रॉप्स सेंटर एंड स्कूल में 24 सप्ताह की कठोर ट्रेनिंग पूर्ण कर पैतृक गांव खेरोदा पहुंचने को लेकर पूरे क्षेत्र में सुबह से ही अपूर्व उत्साह, उमंग और देशभक्ति का माहौल देखा गया। गांव की सीमा पर पहुंचते ही ग्रामीणों और युवाओं ने भारत माता के जयकारों के साथ कुलदीप की अगवानी की। इसके बाद पूरे कस्बे में डीजे साउंड की धुनों और देशभक्ति गीतों के साथ एक विशाल जुलूस निकाला गया, जहाँ ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर और साफा पहनाकर अपने लाडले का अभिनंदन किया। इस दौरान कुलदीप सिंह ने कस्बे के प्रमुख धार्मिक स्थलों - माताजी मंदिर, चारभुजा नाथ मंदिर और कल्लाजी राठौड़ मंदिर पहुंचकर शीश नवाया और देश सेवा का आशीर्वाद लिया। राजपूत समाज के चारभुजानाथ मंदिर परिसर में परिवारजनों, समाजजनों और ग्रामीणों द्वारा अग्निवीर कुलदीप को केले से तोला गया। इस पावन अवसर पर युवाओं को सेना भर्ती के लिए प्रेरित करने वाली मेवाड़ डिफेंस अकादमी नवानीया द्वारा भी कुलदीप का भव्य स्वागत और बहुमान किया गया, तथा उनकी इस उपलब्धि को क्षेत्र के युवाओं के लिए एक महान प्रेरणा स्रोत बताया।
कुलदीप सिंह राठौड़ का सफलता तक का यह सफर अत्यंत प्रेरणादायक और भावुक कर देने वाला रहा है। वर्ष 2011 में जब कुलदीप मात्र 7 वर्ष के थे, तब उनके पिता स्व. बहादुर सिंह राठौड़ का आकस्मिक देहांत हो गया था। ऐसी विकट एवं कठिन परिस्थितियों में भी उनकी माता लाड़ कुंवर ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने उदयपुर की एक धागा फैक्ट्री में श्रमिक के रूप में अत्यंत कठिन परिश्रम और मजदूरी करते हुए अपने पुत्र को बड़ा किया और उसके देश सेवा के सपने को साकार करने के लिए अग्निवीर की तैयारी करवाई। कुलदीप सिंह ने बताया कि आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई गांव में करने के बाद शारीरिक शिक्षक गोपाल मेहता मेनारिया के मार्गदर्शन व प्रेरणा व सहयोग से 9 वीं से 11वीं तक की पढ़ाई कानोड़ के वर्धमान हॉस्टल में रहकर जवाहर विद्यापीठ से पूरी की, 12 उत्तीर्ण करने के बाद द्रोणाचार्य कॉलेज भिंडर से बी ए प्रथम वर्ष में एनसीसी में ए प्रमाण पत्र हासिल किया जहां से सेना में जाने का निर्णय लिया। शारीरिक शिक्षक गोपाल मेहता ने हर मुश्किल वक्त में साथ व मोटिवेशन दिया, 2022 से निरंतर सेना भर्ती की तैयारी करता रहा। नवानिया स्थित मेवाड़ डिफेंस एकेडमी में सेना भर्ती का 4 माह का कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया। अग्निवीर की परीक्षा में प्रथम प्रयास में असफल रहने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी फिर से कठोर परिश्रम किया। आखिरकार माँ-बेटे की बरसों की तपस्या रंग लाई और कुलदीप सेना में चयनित होकर लौटे। इस भव्य समारोह के दौरान भारी संख्या में प्रबुद्धजन, ग्रामीण, युवा और मातृशक्ति उपस्थित रही।
कल्लाजी राठौड़ मंदिर में पूजा अर्चना के बाद कुलदीप ने मार्च पास्ट करते हुए मां को सेल्यूट किया और अपनी सेना की कैप मां के सिर पर रख गले लग गया। इस दृश्य ने उपस्थित जन समूह को भावुक कर दिया।
सेना ने कुलदीप की मां को गौरव पदक से किया सम्मानित
सेना द्वारा कुलदीप सिंह की मां लाडकुंवर को गौरव पदक भेज कर सम्मानित किया जिसमें मेरी संतान देश को समर्पित अंकित है।
कुलदीप ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान हुये समस्त फिजिकल टेस्ट में उसने एक्सीलेंस रैंक हासिल की और  सेना के टैंक 90 टैंक को चलाने का बेसिक एवं एडवांस प्रशिक्षण प्राप्त किया। कुलदीप ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद उसकी प्रथम नियुक्ति 20 लाऊंसर यूनिट बबीना (उत्तर प्रदेश) में की गई है 4 जुलाई वहां रिपोर्ट करेंगे।
 


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