उदयपुर। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर उदयपुर रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (यूआरडीए) द्वारा समारोह का आयोजन रविन्द्र नाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज के एनएलटी सभागार में किया गया। समारोह की थीम हीलिंग लीव्स, इंस्पायरिंग होप, सर्विंग ह्यूमैनिटी रही। कार्यक्रम में चिकित्सा सेवा, समर्पण, संघर्ष एवं मानवता के प्रति चिकित्सकों के अमूल्य योगदान का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आईपीएस, पुलिस अधीक्षक, डॉ. अमृता दुहान, विशिष्ट अतिथि कुलगुरु, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, प्रो. (डॉ.) कैलाश डागा, तथा कुलगुरु, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, डॉ. प्रताप सिंह धाकड़ उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. राहुल जैन द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर अतिरिक्त प्राचार्य डॉ. विजय गुप्ता एवं अतिरिक्त प्राचार्य डॉ. कीर्ति मेम उपस्थित रही।
कार्यक्रम में चिकित्सकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए स्मृति-चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया तथा राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर एक प्रेरणादायी वीडियो द्वारा प्रस्तुति भी प्रदर्शित की गई, जिसमें चिकित्सकों के सेवा, समर्पण एवं संघर्षपूर्ण जीवन को भावपूर्ण रूप से प्रस्तुत किया गया।
मुख्य अतिथि आईपीएस डॉ. अमृता दुहान ने कहा कि वे स्वयं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी रही हैं और डॉक्टर होने के नाते चिकित्सकों के संघर्ष, जिम्मेदारियों एवं सेवा भाव को भली-भांति समझती हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का जीवन केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने महिला चिकित्सकों एवं छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी चिकित्सकों से अनुशासन, संवेदनशीलता एवं धैर्य के साथ कार्य करने का आह्वान किया तथा कहा कि संघर्ष जीवन का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन कठिन परिस्थितियों में कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने कहा कि साहस, सेवा और आत्मविश्वास ही एक सफल चिकित्सक की वास्तविक पहचान हैं।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) कैलाश डागा ने अपने उद्बोधन में चिकित्सक एवं मरीज के बीच विश्वासपूर्ण संबंधों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि “जब डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास मजबूत होता है, संवाद बेहतर होता है और चिकित्सकों का मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है, तब अधिकारों के हनन की नौबत स्वयं कम हो जाती है। अच्छे कर्तव्य ही अधिकारों की सबसे मजबूत नींव होते हैं।” उन्होंने कहा कि चिकित्सा केवल विज्ञान नहीं, बल्कि संवेदनशील संवाद और मानवीय मूल्यों का सर्वोत्तम उदाहरण है। यदि चिकित्सकों का मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा तो वे समाज को और अधिक उत्कृष्ट सेवाएँ दे सकेंगे।
विशिष्ट अतिथि महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलगुरू डॉ. प्रताप सिंह धाकड़ ने अपने उद्बोधन में चिकित्सा की विभिन्न पद्धतियों के समन्वय पर प्रकाश डाला। उन्होंने एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी तथा कृषि एवं पोषण विज्ञान के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण में सभी चिकित्सा पद्धतियों एवं वैज्ञानिक अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने चिकित्सा, कृषि एवं पोषण विज्ञान के समन्वित प्रयासों से समाज को स्वस्थ एवं समृद्ध बनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. राहुल जैन ने कहा कि “एक चिकित्सक की सबसे बड़ी पहचान केवल उसका ज्ञान नहीं, बल्कि उसका व्यवहार भी होता है। यदि हम मरीज और उनके परिजनों से संवेदनशीलता, धैर्य और सम्मान के साथ संवाद करें, तो कई समस्याएँ और विवाद शुरुआत में ही समाप्त हो सकते हैं। कई बार हमारी दवा से पहले हमारे शब्द और हमारा व्यवहार ही मरीज को राहत देते हैं।” उन्होंने चिकित्सकों से संयम, सहानुभूति एवं सेवा भाव के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने रेजिडेंट डॉक्टरों के हितों एवं उनकी सुरक्षा के लिए किए गए संस्थागत प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न विभागों एवं छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति सहित अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि रेजिडेंट डॉक्टरों के कल्याण, सुरक्षा एवं बेहतर कार्य वातावरण के लिए प्रशासन भविष्य में भी पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।
कार्यक्रम में यूआरडीए अध्यक्ष डॉ. विकास बामनिया ने सभी अतिथियों, वरिष्ठ चिकित्सकों, संकाय सदस्यों एवं रेजिडेंट डॉक्टरों का स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि समाज के प्रति चिकित्सकों की जिम्मेदारियों, सेवा, समर्पण एवं संघर्ष को स्मरण करने का दिवस है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों का कर्तव्य केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में विश्वास, करुणा एवं मानवता की भावना को सशक्त करना भी है। उन्होंने सभी चिकित्सकों से चिकित्सा सेवा के साथ संवेदनशील व्यवहार, नैतिक मूल्यों एवं आपसी सहयोग की भावना को निरंतर बनाए रखने का आह्वान किया तथा सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के समापन उपरांत मुख्य अतिथि डॉ. अमृता दुहान, आईपीएस के करकमलों द्वारा पौधारोपण किया गया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि जिस प्रकार चिकित्सक मानव जीवन की रक्षा करते हैं, उसी प्रकार प्रकृति एवं पर्यावरण का संरक्षण भी हम सभी का सामूहिक दायित्व है। सभी अतिथियों ने हरित एवं स्वस्थ भविष्य के निर्माण का संकल्प लिया।