GMCH STORIES

जैन शासन का सौभाग्य जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि, हमें क्या मिला का भाव त्यागें: निरागरत्न सूरीश्वर महाराज

( Read 243 Times)

13 Jul 26
Share |
Print This Page

उदयपुर। पंचवटी स्थित पूर्व पार्षद अजय पोरवाल एवं परिवार के सान्निध्य में पूज्य मुनि निरागरत्न सूरीश्वर महाराज, मुनि सुमतिचन्द्र सागर महाराज एवं मुनि शीतलचन्द्र सागर महाराज का मंगल प्रवेश एवं पधरामणी श्रद्धा, भक्ति और धर्ममय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में संतों के प्रेरक प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, संयम और संस्कारमय जीवन का संदेश दिया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य मुनि निरागरत्न सूरीश्वर महाराज ने कहा कि जीवन में सबसे बड़ा सौभाग्य जैन कुल और जैन शासन की प्राप्ति है। यदि व्यक्ति हर कार्य में “हमें क्या मिला” जैसी स्वार्थपूर्ण भावना रखता है तो वह आत्मकल्याण के मार्ग से भटक जाता है। उन्होंने कहा कि जब यह भाव समाप्त होकर धर्म, सेवा और कर्तव्य की भावना जागृत होती है, तभी जीवन वास्तव में सफल और सार्थक बनता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने आचार, विचार और व्यवहार में जैन संस्कारों को उतारने का आह्वान किया।
बाड़मेर रत्न मुनि सुमतिचन्द्र सागर महाराज ने कहा कि संसार का प्रत्येक जीव सुख की तलाश में निरंतर दौड़ रहा है, लेकिन वास्तविक सुख बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि आत्मशांति, संयम और धर्म में निहित है। उन्होंने वर्तमान समय में बढ़ते मोबाइल के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों को संस्कारों और धर्म से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अजय पोरवाल एवं परिवार ने गुरुभगवंतों का विधिवत गुरु पूजन कर कामली बोहराई। स्वागत उद्बोधन में अजय पोरवाल ने कहा कि जिन परिवारों को गुरुभगवंतों के मंगल प्रवेश का सौभाग्य प्राप्त होता है, उनका जीवन धन्य हो जाता है।
इस अवसर पर महावीर जैन परिषद के संरक्षक राजकुमार फत्तावत, जेएसजी मेवाड़ रीजन के चेयरमैन अरुण माण्डोत, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़, प्रमोद सामर, तेरापंथ समाज के कोषाध्यक्ष लोकेश कोठारी, हिम्मत बड़ाला, कुलदीप नाहर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
समारोह में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने गुरुभगवंतों की अगवानी में मंगलाचरण प्रस्तुत किया। यूविक पोरवाल एवं धीमहीं पोरवाल ने “एनो नाम साधु” कविता का प्रभावशाली पाठ कर सभी को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में शीतलचन्द्र सागर महाराज ने बच्चों को आंखों पर पट्टी बाध्ंाकर मेडिटेशन कराया। कार्यक्रम का संचालन प्रवीण पोरवाल ने किया। इस अवसर पर कीर्तिरेखाश्रीजी, नयनप्रज्ञाश्रीजी (ठाणा-10), आदिरेखाश्रीजी, सिद्धरेखाश्रीजी सहित अनेक साध्वीवृंद की पावन उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन प्रवीण पोरवाल ने किया।


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like