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60 दिन की जंग जीतकर जिंदगी की नई उड़ान को तैयार नन्हें परिंदें

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29 Jul 26
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60 दिन की जंग जीतकर जिंदगी की नई उड़ान को तैयार नन्हें परिंदें

उदयपुर। बाल चिकित्सालय अस्पताल की 50 बेडेड आउटबॉर्न नर्सरी में भर्ती जयसमंद क्षेत्र के श्री रमेश एवं श्रीमती काली के जुड़वा नवजात शिशुओं को 60 दिन तक चले गहन उपचार के बाद बुधवार को सफलतापूर्वक स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज किया गया। अत्यंत कम वजन और मात्र 29 सप्ताह के गर्भकाल में जन्मे इन दोनों बच्चों का सुरक्षित जीवन बचाना चिकित्सकों की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार श्रीमती काली के जुड़वा बच्चों का जन्म 4 जून 2026 को गीतांजली अस्पताल, सलूम्बर में हुआ था। जन्म के समय दोनों शिशुओं का वजन क्रमशः 1.10 किलोग्राम एवं 1.05 किलोग्राम था। जन्म के करीब दो घंटे बाद दोनों नवजातों को बाल चिकित्सालय अस्पताल की नर्सरी में भर्ती कराया गया, जहां यूनिट-डी में डॉ. अनुराधा सनाढ्य के मार्गदर्शन में उनका उपचार शुरू किया गया। फेफड़े पूर्ण विकसित नहीं होने के कारण दोनों शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद सर्फैक्टेंट थेरेपी दी गई। उपचार के दौरान उन्हें 10 दिन तक वेंटिलेटर तथा 22 दिन तक सीपीएपी (ब्च्।च्) सपोर्ट पर रखा गया। चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी और समर्पित देखभाल से दोनों शिशुओं की स्थिति में लगातार सुधार होता गया।
मां योजना में निःशुल्क हुआ उपचार
अस्पताल अधीक्षक एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आर. एल. सुमन ने बताया कि मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत दोनों बच्चों का उपचार पूरी तरह निःशुल्क किया गया। इस दौरान पहले शिशु के उपचार पर लगभग 2.25 लाख तथा दूसरे शिशु पर 2.50 लाख का खर्च आया। विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक अरोड़ा ने बताया कि 29 सप्ताह में जन्मे एवं अत्यंत कम वजन वाले नवजात शिशुओं का जीवित बचना सामान्यतः चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में दोनों जुड़वा बच्चों का स्वस्थ होकर घर लौटना बाल चिकित्सालय की विशेषज्ञ टीम की उत्कृष्ट सेवाओं और आधुनिक नवजात चिकित्सा का परिणाम है। डिस्चार्ज के समय दोनों बच्चों का वजन क्रमशः 1.325 किलोग्राम एवं 1.345 किलोग्राम था। वर्तमान में दोनों शिशु एवं उनकी माता पूरी तरह स्वस्थ हैं। बच्चों के माता-पिता ने चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अस्पताल में मिली उत्कृष्ट देखभाल की सराहना की। इस सफल उपचार में डॉ. अनुराधा सनाढ्य के नेतृत्व में डॉ. निशांत डांगी, डॉ. नेहा असोरा, डॉ. शिंथू, डॉ. नितीश, डॉ. ऋचा जोशी, डॉ. श्रुतकीर्ति, डॉ. लक्ष्य शर्मा तथा नर्सिंग स्टाफ का विशेष योगदान रहा।
 


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