उदयपुर। भारतीय किसान संघ की दो दिवसीय प्रांतीय बैठक बुधवार को राजस्थान कृषि महाविद्यालय स्थित 'सेमिनार हॉल, पशु उत्पादन विभाग' में प्रारंभ हुई। इस दौरान संगठन की संगठनात्मक, आंदोलनात्मक और रचनात्मक गतिविधियों पर विस्तार से मंथन किया गया। बैठक में चित्तौड़ प्रांत के 16 जिलों और 4 संभागों से आए अध्यक्षों, मंत्रियों तथा प्रमुख कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि और आईसीएआर के अनुसंधान निदेशक डॉ. शांति कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में जैविक कृषि की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि मिट्टी की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अब प्राकृतिक व जैविक खेती को अपनाना समय की मांग है।
कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. प्रताप सिंह धाकड़ ने किसानों को बीज उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की सीख दी। उन्होंने कहा कि जब किसान अपने बीजों के लिए स्वयं सक्षम होगा, तभी कृषि क्षेत्र में वास्तविक स्वावलंबन आएगा।
भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्रा ने संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने पर ज़ोर दिया। उन्होंने संगठन की बड़ी उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय किसान संघ के दबाव के कारण ही अमेरिका के साथ ट्रेड डील में भारतीय किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा संभव हो सकी है और आगे भी किसी भी प्रकार से किसानों का अहित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संघ के कड़े विरोध के चलते ही देश में हानिकारक जीएम बीजों के प्रवेश को रोका गया है। उन्होंने फसलों पर अत्यधिक पेस्टिसाइड्स के इस्तेमाल को 'ज़हर' की संज्ञा देते हुए इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया।
प्रांत प्रचार प्रमुख आशीष मेहता ने बताया कि प्रांतीय बैठक के पहले दिन विभिन्न सत्रों में व्यापक विचार-विमर्श हुआ। वहीं बैठक के दूसरे दिन, गुरुवार को प्रांत कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। जिसमें आगामी आंदोलनात्मक व संगठनात्मक योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।
बैठक में प्रांत अध्यक्ष शंकरलाल नागर, प्रांत महामंत्री अंबालाल शर्मा, प्रांत संगठन मंत्री परमानंद, कृषि विश्वविद्यालय के डीन डॉ. लोकेश गुप्ता, प्रांत बीज प्रमुख कपिल आमेटा सहित अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ता व प्रतिनिधि उपस्थित रहे।