उदयपुर। राहड़ा फाउंडेशन द्वारा तारा सेवा संस्थान, उदयपुर में वरिष्ठजनों के सम्मान एवं पर्यावरण संरक्षण को समर्पित एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 100 से अधिक वरिष्ठ नागरिकों का उनके अनुभवों और जीवन मूल्यों को समाज की अमूल्य धरोहर बताते हुए सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वरिष्ठजनों के लिए आयोजित रचनात्मक कार्यशाला रही, जिसमें उन्होंने अपने हाथों से कपड़े की थैलियों पर ब्लॉक प्रिंटिंग एवं क्रिएटिव आर्ट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर सभी वरिष्ठजनों ने एक स्वर में एकल-उपयोग प्लास्टिक का बहिष्कार कर कपड़े की थैली अपनाने का संकल्प लिया तथा समाज से भी इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।
राहड़ा फाउंडेशन की संस्थापक अर्चना सिंह चारण ने कहा कि हमारे बुजुर्ग समाज के वटवृक्ष हैं। उनके अनुभव, संस्कार और स्नेह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। गुरु पूर्णिमा केवल गुरुजनों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का पर्व नहीं, बल्कि उन सभी व्यक्तित्वों के प्रति सम्मान प्रकट करने का अवसर है, जिन्होंने अपने जीवन से हमें सीख और दिशा दी है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना नहीं था, बल्कि नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा संस्कार विकसित करना भी था।
कार्यक्रम का वातावरण आत्मीयता, सम्मान और संवेदनशीलता से परिपूर्ण रहा। वरिष्ठजनों के चेहरों पर झलकती खुशी और उत्साह ने यह सिद्ध कर दिया कि सम्मान, अपनापन और स्नेह उनके लिए सबसे बड़ा उपहार है। राहड़ा फाउंडेशन की टीम ने सेवा भाव और समर्पण के साथ कार्यक्रम का सफल संचालन किया।
इस अवसर पर अर्चना सिंह चारण, पूनम भदादा, उषा लोढा, सोनिका, ऋतु माली, मोनू यादव, कशिश सुहालका, ममता कावडिया, मधुबाला पूर्बिया व नारायण सिंह सहित राहड़ा फाउंडेशन के अनेक कार्यकर्ताओं एवं स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
राहड़ा फाउंडेशन ने विश्वास व्यक्त किया कि वरिष्ठजनों के अनुभवों का सम्मान और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जागरूकता ही एक संवेदनशील, संस्कारित एवं सशक्त समाज के निर्माण का आधार है। संस्था भविष्य में भी सेवा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण एवं जन-जागरूकता से जुड़े ऐसे रचनात्मक कार्यक्रम निरंतर आयोजित करती रहेगी।