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अरावली संरक्षण पर उदयपुर में कल 10 बजे होगी सार्वजनिक सुनवाई

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08 Aug 26
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उदयपुर। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग एवं खनन से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति 10 अगस्त 2026 को उदयपुर में सार्वजनिक परामर्श आयोजित करेगी।

यह कार्यक्रम प्रातः 10 बजे जिला परिषद सभागार, जिला कलेक्ट्रेट परिसर, उदयपुर में होगा।

पहले यह बैठक 3 बजे होने वाली थी।उदयपुर खनन अभियन्ता आरिफ अंसारी ने बताया कि समिति का गठन अरावली पर्वतमाला एवं उससे जुड़े पर्यावरणीय, पारिस्थितिक तथा खनन संबंधी विषयों का व्यापक परीक्षण कर आवश्यक अनुशंसाएं प्रस्तुत करने के उद्देश्य से किया गया है।

समिति देश के विभिन्न क्षेत्रों में हितधारकों से संवाद कर उनके विचार, सुझाव एवं व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर रही है।

इसी क्रम में उदयपुर में सार्वजनिक परामर्श का आयोजन किया जा रहा है।दक्षिणी राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण है अरावली-अरावली पर्वतमाला राजस्थान के दक्षिणी हिस्से, विशेष रूप से उदयपुर संभाग के लिए पर्यावरण, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों एवं खनिज संपदा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उदयपुर क्षेत्र में खनिज आधारित उद्योगों के साथ-साथ पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्र, वन क्षेत्र, जलागम क्षेत्र तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषय हैं।सार्वजनिक परामर्श के माध्यम से समिति क्षेत्र की स्थानीय परिस्थितियों, चुनौतियों और संभावित समाधानों को समझने के साथ विभिन्न पक्षों के सुझावों का संकलन करेगी।हर वर्ग को सुझाव रखने का मिलेगा अवसर-परामर्श में नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पंचायती राज संस्थाओं, उद्योग एवं व्यापार संगठनों, खनिज पट्टाधारकों, पर्यावरणविदों, शिक्षाविदों, विषय विशेषज्ञों, स्वयंसेवी संस्थाओं सहित अन्य सभी संबंधित हितधारकों को अपने सुझाव एवं अभिमत प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।समिति द्वारा प्राप्त सुझावों और अभिमतों का विधिवत परीक्षण किया जाएगा तथा उन्हें अपनी अनुशंसाओं में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।समिति ने उदयपुर एवं आसपास के जिलों के इच्छुक नागरिकों तथा सभी संबंधित हितधारकों से अपील की है कि वे सार्वजनिक परामर्श में भाग लेकर तथ्यों, स्थानीय परिस्थितियों एवं अपने व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करें।

इससे अरावली क्षेत्र के संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन तथा सतत एवं उत्तरदायी विकास के लिए प्रभावी और जनहितकारी अनुशंसाएं तैयार करने में मदद मिलेगी।

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