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विश्व आदिवासी दिवस पर वागड़–मेवाड़ की बेटियों के लिए शिक्षा की ओर सार्थक पहल

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09 Aug 26
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उदयपुर। विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में उदयपुर ग्रामीण में डॉ. दिव्यानी कटारा के नेतृत्व में एक सामाजिक पहल आयोजित की गई। इस अवसर पर वागड़, मेवाड़ एवं आसपास के आदिवासी क्षेत्रों से आई बालिकाओं को ट्राइबल स्टेशनरी किट वितरित की गई। इस पहल का उद्देश्य आदिवासी समाज की बेटियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें पढ़ाई के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना रहा।

विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समाज की अस्मिता, पहचान, संस्कृति, सम्मान तथा हक और अधिकारों के प्रति जागरूकता का प्रतीक है। इसी भावना के साथ इस कार्यक्रम को किसी राजनीतिक दल या संगठन विशेष को आगे रखकर नहीं, बल्कि एक सामाजिक सरोकार और सकारात्मक जनजागरूकता की पहल के रूप में मनाया गया।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज की बेटियों को शिक्षा की ओर अग्रसर करना, पढ़ाई के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आदिवासी समाज के सशक्त और उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव शिक्षा है।

इस अवसर पर बालिकाओं से संवाद करते हुए उन्हें नियमित अध्ययन, उच्च शिक्षा और अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया गया।

डॉ. दिव्यानी कटारा ने कहा, “विश्व आदिवासी दिवस हमारी अस्मिता, हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारे हक-अधिकारों को सम्मान के साथ याद करने का दिन है। हमारी असली ताकत तब बनेगी, जब हमारे समाज की हर बेटी शिक्षित होगी। शिक्षा ही वह शक्ति है, जो हमारी बेटियों को अपने अधिकार समझने, आत्मनिर्भर बनने और समाज का नेतृत्व करने का अवसर देती है।”

उन्होंने कहा कि वागड़ और मेवाड़ की बेटियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है उन्हें अवसर, संसाधन और प्रोत्साहन देने की। इसी उद्देश्य से यह पहल की गई, ताकि विश्व आदिवासी दिवस केवल एक आयोजन तक सीमित न रहे, बल्कि शिक्षा, जागरूकता और बालिका सशक्तिकरण का सामाजिक संदेश समाज तक पहुंचे।

कार्यक्रम में उदयपुर ग्रामीण क्षेत्र के ग्रामीण जन, युवा साथी एवं सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे और उन्होंने बालिकाओं को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करते हुए इस सामाजिक पहल में सहभागिता की।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संकल्प व्यक्त किया गया कि आदिवासी समाज की आने वाली पीढ़ी को शिक्षा, जागरूकता, आत्मनिर्भरता और समान अवसरों से जोड़ने के लिए सामाजिक स्तर पर निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।

अस्मिता से सम्मान तक, अधिकार से शिक्षा तक—वागड़ और मेवाड़ की बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की ओर एक सार्थक कदम।

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