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महेश्वरी:- भगवान शिव की दिव्य शक्ति

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08 Aug 26
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महेश्वरी:- भगवान शिव की दिव्य शक्ति

महेश्वरी, सप्तमातृकाओं (सात मातृ देवियों) में से एक हैं और भगवान महेश्वर (शिव) की दिव्य शक्ति मानी जाती हैं। हेमावती संग्रहालय में संरक्षित यह मनोहारी प्रतिमा 9वी /10 वी शताब्दी ईस्वी के नोलम्ब काल ( नोलंब काल: लगभग 750–1050 ईस्वी।) की प्रतिमा है।

दक्षिण भारत में नोलंब वंश का शासन काल की उत्कृष्ट शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण है।

देवी ललितासन (राजसी आसन) में कमलासन पर विराजमान हैं। उनके मुखमंडल पर अद्भुत शांति, करुणा और दिव्य तेज झलकता है। उनके सिर पर सुशोभित किरीट-मुकुट, भव्य आभूषण तथा संतुलित भाव उन्हें शक्ति और सौम्यता का अद्वितीय स्वरूप प्रदान करते हैं।

प्रतिमा के पीछे अंकित त्रिशूल भगवान शिव का प्रमुख प्रतीक है, जो देवी की पहचान महेश्वरी के रूप में स्थापित करता है। यद्यपि प्रतिमा की कुछ भुजाएँ खंडित हैं, किंतु मूल रूप से देवी को अनेक भुजाओं सहित शिव के दिव्य आयुध धारण किए हुए दर्शाया गया था।

पुराणों में महेश्वरी की मूर्तिशास्त्रीय विशेषताएँ बताई गई हैं।

वर्ण (रंग) :- श्वेत अथवा गौर वर्ण, जो पवित्रता, ज्ञान और परम चेतना का प्रतीक है।

त्रिनेत्र :- तीन नेत्र सूर्य, चंद्र और अग्नि के साथ-साथ भूत, वर्तमान और भविष्य पर उनकी सर्वज्ञ दृष्टि का प्रतीक हैं।

जटामुकुट :- जटाओं से सुशोभित मुकुट पर अर्धचंद्र विराजमान रहता है, जो उन्हें भगवान शिव की शक्ति के रूप में दर्शाता है।

नागाभूषण :- सर्पों से बने कंगन, हार और कुण्डल धारण करती हैं, जो भय, मृत्यु और ब्रह्मांडीय शक्तियों पर उनके नियंत्रण का प्रतीक हैं।

सामान्यतः चार या छह भुजाओं के साथ निम्नलिखित आयुध धारण करती हैं ..... त्रिशूल :- अज्ञान, अधर्म और दुष्टता का विनाश।

डमरू :- सृष्टि के आदि नाद और ब्रह्मांडीय लय का प्रतीक।

अक्षमाला :- ज्ञान, तप और ध्यान का प्रतीक।

कपाल-पात्र :- जीवन और मृत्यु से परे परम सत्य का प्रतीक।

अभय मुद्रा :- निर्भयता और संरक्षण का वरदान।

वरद मुद्रा :- कृपा, आशीर्वाद और मनोकामनाओं की पूर्ति का संकेत।

वाहन :- नंदी बैल, जो धर्म, शक्ति, अटल भक्ति और स्थिरता का प्रतीक है।

महेश्वरी की आराधना से क्रोध, अहंकार और नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त होती है तथा मन में शांति और संतुलन का विकास होता है।

परिवर्तन की अधिष्ठात्री : वे आत्मबल, ज्ञान, आध्यात्मिक जागरण और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती हैं। भगवान शिव की भाँति वे अज्ञान को ज्ञान में और भय को साहस में परिवर्तित करने वाली दिव्य शक्ति हैं।

हेमावती संग्रहालय, हेमावती ग्राम, अनंतपुर ज़िला, आंध्र प्रदेश। ।। नमो पार्वती पतय भगवान भोलनाथ नीलकंठ महादेव जी की कृपा हम पर सदैव बनी रहे।

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