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स्वरिदम म्यूजिक अकादमी के कराओके सिंगिंग समारोह में झूमे दर्शक

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04 Aug 26
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स्वरिदम म्यूजिक अकादमी के कराओके सिंगिंग समारोह में झूमे दर्शक

उदयपुर। शहर की प्रतिष्ठित संगीत संस्था स्वरिदम म्यूजिक अकादमी ने हाल ही में अपने छात्रों के लिए एक विशेष संगीत कार्यक्रम कराओके सिंगिंग समारोह का आयोजन किया, जिसमें अकादमी के 20 प्रतिभाशाली छात्रों ने अपनी मधुर आवाज और शानदार प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। यहां व्यवसायी दिनेश वेलावत ने केक काटकर बधाई दी।

यह कार्यक्रम अकादमी का पहला कराओके सिंगिंग समारोह था, इसे सेलिब्रेट करने के लिए केक काटा गया। इस अवसर पर अकादमी के संगीत शिक्षक और निदेशक धीरज शर्मा और किशन नाथ चौहान ने उपस्थित रहे छात्रों, अभिभावकों और शुभचिंतकों को संबोधित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत में संगीत साधकों ने बॉलीवुड गीतों, भजनों और क्लासिकल धुनों पर अपनी बेहतरीन प्रस्तुति दी। पहली बार मंच पर आ रहे प्रतिभागियों ने भी इतनी आत्मविश्वास के साथ गाया कि उपस्थित सभी लोग दंग रह गए।

अकादमी के निदेशक धीरज शर्मा ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को मंच का अनुभव देना और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाना है।

प्रस्तुति देने वाले प्रतिभागियों में दिनेश जैन,अरविंद सिंह थापा सावन जैन, बसंत यादव ,राजेश अमेरिया,दीपक व्यास, गजेंद्र सोनी ,मुकेश ख़ुबचंदानी, सौरव नामा,डी सी कुमावत, डॉ दीपा जी मिश्रा, नारायणी रावल और बाल कलाकार यशी चौहान नेहल शर्मा आदि प्रमुख रहे।

अकादमी के निदेशक किशन नाथ चौहान ने कहा, उदयपुर को एक बेहतरीन संगीत अकादमी की आवश्यकता है जहाँ छात्रों को सभी प्रकार के वाद्ययंत्र और गायन की व्यापक शिक्षा मिल सके। हमारा लक्ष्य है कि शहर के हर प्रतिभाशाली युवा को संगीत की उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान की जाए।

स्वरिदम म्यूजिक अकादमी में छात्रों को विविध प्रकार के संगीत वाद्ययंत्र सिखाए जाते हैं, जिनमें गिटार, कीबोर्ड, हारमोनियम, ड्रम, कांगो, तबला, ढोलक आदि शामिल हैं। इसके अलावा गायन की शिक्षा भी दी जाती है, जिसमें बॉलीवुड गायन, शास्त्रीय संगीत, कराओके सिंगिंग, भजन कीर्तन और अन्य शैलियाँ शामिल हैं।

अकादमी के निदेशक धीरज शर्मा ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से संगीत शिक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हैं और उनकी शिक्षण पद्धति छात्रों को न केवल तकनीकी ज्ञान देती है, बल्कि उन्हें मंच पर प्रदर्शन करने के लिए भी तैयार करती है। उन्होंने कहा, संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि एक साधना है। हमारे यहाँ छात्रों को इस साधना का पूरा अनुभव कराया जाता है।

भविष्य में ऐसे और भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें छात्रों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अधिक अवसर मिलेंगे।

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