जम्मू। उत्तर रेलवे ने माल ढुलाई को अधिक किफायती, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से रोल-ऑन/रोल-ऑफ यानी रो-रो ट्रैफिक के लिए नई भाड़ा दर संरचना लागू की है।
रो-रो के विषय में बात करें, तो हिंदी में इसे ‘‘चढ़ाओ और उतारो’’ या आसान शब्दों में ऐसी परिवहन सेवा कहा जाता है, जिसमें माल से लदे हुए ट्रकों या कमर्शियल वाहनों को सीधे विशेष रूप से डिजाइन किए गए खुले समतल रेलवे वैगनों पर उनके पहियों के साथ चढ़ा दिया जाता है और गंतव्य पर पहुंचकर उन्हें सीधे उतार लिया जाता है।
जम्मू मंडल के जनसम्पर्क निरीक्षक श्री राघवेन्द्र सिंह ने बताया कि नई नीति के तहत अब 750 किमी तक की दूरी के लिए रूपये 1.45 प्रति टन-किमी, 750 से 2000 किमी तक रूपये 1.45 से घटाकर रूपये 1.30 प्रति टन-किमी तक रैखिक दर और 2000 किमी से अधिक दूरी के लिए रूपये 1.30 प्रति टन-किमी की दर से शुल्क लिया जाएगा।
न्यूनतम प्रभार्य वजन 45 टन या वास्तविक सकल वाहन वजन जो भी अधिक हो तथा न्यूनतम दूरी 50 किमी निर्धारित की गई है। टर्मिनल शुल्क, जीएसटी और अन्य लागू शुल्क मौजूदा नियमों के अनुसार देय होंगे।
इस संशोधित नीति में ग्राहकों की सुविधा के लिए कई पुराने प्रतिबंध भी हटा दिए गए हैं। अब विजी सीजन सरचार्ज और उवलपमेंट चार्ज पूरी तरह समाप्त कर दिए गए हैं, जिससे ग्राहकों को लगभग 20 प्रतिशत का अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
पहले अनिवार्य था कि ट्रांसपोर्टरों को प्रतिबद्ध ट्रैफिक देना होगा और राउंड ट्रिप की बुकिंग करनी होगी, साथ ही शॉर्टफॉल पर 5 प्रतिशत पेनल्टी भी लगती थी।
नई नीति में इन सभी शर्तों को समाप्त कर दिया गया है। अब एक-तरफा रो-रो संचालन भी किया जा सकेगा।
इस संशोधित नीति से ग्राहकों को प्रत्यक्ष और बड़ी बचत होगी।
उदाहरण के तौर पर बात करें, तो 241 किमी के बड़ी ब्राह्मणा-बिजबिहाडा मार्ग पर भाड़ा रूपये 20,969.34 से घटकर रूपये 14,222.25 रह गया है, जिससे प्रति ट्रक रूपये 6,747.09 यानी 47 प्रतिशत की बचत होगी।नई दर संरचना से उद्योगों और ट्रांसपोर्टरों को कई प्रत्यक्ष लाभ मिलेंगे।
सबसे बड़ा लाभ परिवहन लागत में कमी का है, जिससे सड़क की तुलना में रेल द्वारा माल भेजना अधिक किफायती हो जाएगा।
इससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी वाहनों का दबाव कम होगा, सड़क दुर्घटनाओं और ट्रैफिक जाम में कमी आएगी तथा कार्बन उत्सर्जन घटने से पर्यावरण को भी मदद मिलेगी।
यह इसलिए भी उपयोगी है क्योंकि जम्मू कश्मीर एक पहाड़ी क्षेत्र है, साथ ही बरसात के मौसम में राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लग जाता है। रो-रो सेवा से माल की लोडिंग और अनलोडिंग का समय कम होगा, जिससे टर्नअराउंड तेज होगा और उद्योगों को समय पर डिलीवरी सुनिश्चित होगी।
पहले रेलवे द्वारा लोडिंग के लिए 3 घंटे फ्री समय दिया जाता था, जिसे बढाकर अब 6 घंटे और घाट निकासी के लिए 3 घंटे का मुफ्त समय भी दिया जाएगा।
नई नीति से न केवल मौजूदा उद्योगों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी, बल्कि नए माल लदान स्रोत भी विकसित होंगे, जिससे क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
डीएफसीसी सेकेंडय (समर्पित माल ढुलाई गलियारा निगम भारत लिमिटेड) के न्यूरेवाड़ी-न्यूपालनपुर खंड पर विशेष हॉलेज दर यथावत रहेगी।वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, जम्मू मंडल ने कहा ने बताया कि जम्मू मंडल के लिए यह संशोधित रो-रो नीति एक गेम चेंजर साबित होगी।
बीएसएस और डीसी हटने, पेनल्टी और प्रतिबद्ध ट्रैफिक की शर्त समाप्त होने तथा एक-तरफा संचालन की अनुमति मिलने से रेल भाड़ा अब सड़क से कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी हो गया है।
पहाड़ी क्षेत्र और मानसून में हाईवे जाम की समस्या को देखते हुए यह सेवा उद्योगों के लिए बहुत राहत लेकर आएगी।
हमारा प्रयास है कि बड़ी ब्राह्मणा और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के ट्रांसपोर्टरों को इस सुविधा से जोड़कर क्षेत्रीय व्यापार को नई गति दी जाए।इस नई नीति के तहत जम्मू कश्मीर में कोई भी व्यापारी किसान या रोड़ ट्रांसपोर्ट संगठन इस सुविधा का लाभ लेना चाहते हैं, तो वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक कार्यालय जम्मू में सम्पर्क कर सकते हैं।
रेलवे का मानना है कि यह युक्तिसंगत भाड़ा प्रणाली रो-रो ट्रैफिक को बढ़ावा देगी और देश में टिकाऊ एवं कुशल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।