हार्ट फेल्योर (हार्ट अटैक नहीं) से भारत में करीब 13 लाख से 2.27 करोड़ लोग प्रभावित हैं[1], और इनमें से करीब आधे लोग हार्ट फेल्योर विद प्रिजर्व्ड इजेक्शन फ्रैक्शन (एचएफपीईएफ) से प्रभावित हैं, इसके बावजूद इलाज के विकल्प सीमित हैं और जांच अक्सर देरी से हो पाती है[2] [3] [4]

फिनेरिनोन पहली और इकलौती नॉन-स्टेरॉयडल, सेलेक्टिव एमआरए है, जो फेज 3 अध्ययन में प्रमाणित रूप से कार्डियोवस्कुलर डेथ और हार्ट फेल्योर को 16 प्रतिशत तक कम करने में प्रभावी पाई गई है, साथ ही किडनी को भी सुरक्षित रखती है

नई दिल्ली, 6 नवंबर, 2025: बायर ने आज घोषणा की है कि उसकी इनोवेटिव थेरेपी केरेंडिया™ (फिनेरिनोन) को भारत में आंशिक रूप से कम इजेक्शन फ्रैक्शन वाले हार्ट फेल्योर (HFpEF/HFmrEF) के वयस्क मरीजों के इलाज के लिए मंजूरी मिल गई है। इससे पहले फिनेरिनोन को भारत में 2022 में टाइप 2 डायबिटीज (टी2डी) से संबंधित क्रोनिक किडनी डिसीज (सीकेडी) के इलाज में प्रयोग के लिए मंजूरी दी गई थी। यह दवा किडनी की बीमारी के प्रसार को रोकने और कार्डियोवस्कुलर खतरों को कम करने में प्रभावी सिद्ध हुई है।

बायर की फार्मास्युटिकल डिवीजन में साउथ एशिया की कंट्री डिवीजन हेड और भारत की मैनेजिंग डायरेक्टर श्वेता राय ने कहा, ‘हमारा फोकस भारतीय मरीजों को तेजी से ब्रेकथ्रू थेरेपी उपलब्ध कराना है, विशेषरूप से ऐसे मामलों में जहां इलाज की उपलब्धता सीमित है। फिनेरिनोन के उपयोग का दायरा बढ़ाए जाने के साथ, अब हम हृदय विफलता के उन प्रकारों को संबोधित कर रहे हैं जो सभी मामलों के लगभग आधे हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन जिनके लिए अब तक सीमित प्रमाणित उपचार विकल्प उपलब्ध थे। टाइप 2 डायबिटीज से संबंधित क्रोनिक किडनी डिसीज पर इसके प्रभाव को देखते हुए कह सकते हैं कि फिनेरिनोन भारत में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सबसे ज्यादा दबाव डालने वाली कार्डियोवस्कुलर डिसीज और क्रोनिक किडनी डिसीज के मामले में बायर के इनोवेशन का प्रमाण है। इससे देश में कार्डिवस्कुलर केयर और मरीजों को बेहतर नतीजे देने की हमारी प्रतिबद्धता को मजबूती मिली है।’

हार्ट अटैक की तुलना में हार्ट फेल्योर (एचएफ) ज्यादा अचानक होने वाली घटना है। यह एक क्रोनिक कंडीशन है, जिसमें दिल शरीर की जरूरत के लिए पर्याप्त खून को पंप नहीं कर पाता है, जिससे शरीर में थकान, सांस उखड़ने और फ्लूड बिल्डअप की स्थिति बनती है।[5] यह भारत में एक बढ़ती हुई चिंता है, क्योंकि इससे प्रभावित लोगों की संख्या 13 लाख से 2.27 करोड़ के बीच होने का अनुमान है। हर साल इसके 5 लाख से 18 लाख तक नए मामले सामने आते हैं।[6] नेशनल रजिस्ट्री के आंकड़े बताते हैं कि उच्च आय वाले देशों की तुलना में भारतीय मरीजों में दिल की बीमारियां करीब 10 साल पहले से शुरू हो जाती हैं और यहां अस्पताल में भर्ती होने व जान गंवाने वालों की संख्या भी ज्यादा होती है।[7] इनमें से करीब आधे मरीज प्रिजर्व्ड या माइल्डली रिड्यूस्ड इजेक्शन फ्रैक्शन (एचएफपीईएफ/एचएफएमआरईएफ) से प्रभावित होते हैं। यह हार्ट फेल्योर की ऐसी स्थिति है, जिसमें दिल की पंपिंग नॉर्मल लगती है, लेकिन मांसपेशिया सख्त होती हैं और फिलिंग इम्पेयर्ड होती है।[8] हार्ट फेल्योर के इस मामले में अस्पताल में भर्ती होने और जान जाने का खतरा ज्यादा होता है।[9] [10] [11] [12] पांच में से एक मरीज को डिस्चार्ज के 30 दिन के भीतर फिर अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है।[13] [14] हर हॉस्पिटलाइजेशन के साथ जान जाने का खतरा दोगुना हो जाता है।[15]

एचएफपीईएफ की जांच क्लीनिक एसेसमेंट, इकोकार्डियोग्राफी एवं बायोमार्कर्स जैसे एडवांस्ड ब्लड टेस्ट के माध्यम से होती है। जांच में अक्सर इसलिए परेशानी होती है, क्योंकि दिल से जुड़ी सामान्य जांचों में मरीजों में कोई स्पष्ट बदलाव नजर नहीं आते हैं। सांस उखड़ना, थकान, पैरों एवं टखनों के पास सूजन और व्यायाम करने की क्षमता कम होने जैसे लक्षणों को अक्सर अन्य बीमारियों से जोड़कर देख लिया जाता है। साथ ही एडवांस्ड ब्लड टेस्ट हमेशा उपलब्ध नहीं होते हैं। जांच में देरी और सीमित इनोवेशन के कारण एचएफपीईएफ/एचएफएमआरईएफ के मामले में मरीजों का इलाज बस लक्षणों को नियंत्रित करने और साथ ही अन्य बीमारियों (को-मॉर्बिडिटीज) के मैनेजमेंट तक सीमित रह जाता है। इससे कार्डियोवस्कुलर केयर की जरूरत पूरी नहीं हो पाती है।

फिनेरिनोन एक नॉन-स्टेरॉयडल, सेलेक्टिव मिनरलोकॉर्टिकोइड रिसेप्टर एंटगनिस्ट है, जो एमआर ओवररिएक्शन को ब्लॉक करती है। यह ओवररिएक्शन हार्ट एवं किडनी दोनों में ही इन्फ्लेमेशन एवं फिब्रोसिस का प्रमुख कारक है। इस पाथवे को टार्गेट करने से यह दवा एक साथ दो अंगों की हिफाजत करती है और यह इकलौती ऐसी प्रमाणित थेरेपी है, जो टाइप 2 डायबिटीज से संबंधित क्रोनिक किडनी डिसीज के मामले में प्रभावी रही है, साथ ही आंशिक रूप से कम इजेक्शन फ्रैक्शन वाले हार्ट फेल्योर के मामले में भी प्रभावी है।

फाइनआर्ट्स-एचएफ फेज 3 ट्रायल से मिले डाटा के आधार पर भारत में इसे मंजूरी दी गई है। इस ट्रायल में 37 देशों के 6,000 से ज्यादा मरीजों को शामिल किया गया था। ट्रायल के दौरान कार्डियोवस्कुलर डेथ एवं टोटल हार्ट फेल्योर के कंपोजिट रिस्क में 16 प्रतिशत की कमी दिखी, साथ ही पेशेंट-रिपोर्टेड हेल्थ स्टेटस में उल्लेखनीय सुधार दिखा। फाइन-हार्ट पूल्ड एनालिसिस से भी इन नतीजों की पुष्टि हुई। इसमें तीन ग्लोबल फेज 3 प्रोग्राम्स (फिडेलियो-डीकेडी, फिगारो-डीकेडी, फाइनआर्ट्स-एचएफ) से जुड़े 13,000 से ज्यादा मरीजों के डाटा को शामिल किया गया। इससे पुष्टि हुई कि फिनेरिनोन इकलौती थेरेपी है, जिससे हाई-रिस्क मरीजों में किडनी एवं कार्डियोवस्कुलर बेनिफिट दिखे हैं।

फिनेरिनोन को अमेरिका में पहले ही एचएफपीईएफ/एचएफएमआरईएफ के लिए मंजूरी मिल चुकी है और ईयू, जापान एवं चीन में यह रिव्यू के चरण में है। दुनिया के अन्य कई देशों में भी आवेदन दिए गए हैं।

फिनेरिनोन को भारत में पहले ही टी2डी से संबंधित सीकेडी के लिए मंजूरी मिल चुकी है। 2022 में लॉन्चिंग के बादे से मरीजों के बीच इसकी स्वीकार्यता तेजी से बढ़ी है। वैश्विक स्तर पर बेयर के सीकेडी पोर्टफोलियो के विकास में इसकी प्रमुख भूमिका रही है।

क्रोनिक किडनी डिसीज (सीकेडी) ऐसी स्थिति को कहते हैं, जिसमें लंबे समय में किडनी धीरे-धीरे शरीर से अपशिष्ट एवं रक्त से अतिरिक्त फ्लूड को फिल्टर करने की अपनी क्षमता खोने लगती है। इससे शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं।[16] यह स्थिति आगे चलकर किडनी फेल होने का कारण बन सकती है, जिसमें डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट एकमात्र इलाज रह जाता है।[17] फिनेरिनोन से सीकेडी के प्रसार को रोकने में मदद मिलती है, जिससे डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत कम होती है। इससे मरीजों एवं उनके परिवारों पर आर्थिक, शारीरिक एवं भावनात्मक दबाव भी कम होता है।[18]

About Bayer

Bayer is a global enterprise with core competencies in the life science fields of health care and nutrition. In line with its mission, “Health for all, Hunger for none,” the company’s products and services are designed to help people and the planet thrive by supporting efforts to master the major challenges presented by a growing and aging global population. Bayer is committed to driving sustainable development and generating a positive impact with its businesses. At the same time, the Group aims to increase its earning power and create value through innovation and growth. The Bayer brand stands for trust, reliability and quality throughout the world. In fiscal 2024, the Group employed around 93,000 people and had sales of 46.6 billion euros. R&D expenses amounted to 6.2 billion euros. For more information, go to www.bayer.com.

Source: