28 दिसंबर 2005 की शाम को, बैंगलोर स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शांत परिसर—भारत के प्रमुख शोध संस्थान में गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी। ऑपरेशंस रिसर्च पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जुटे विद्वानों के सम्मेलन में अचानक अराजकता और त्रासदी का माहौल बन गया। लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों द्वारा किए गए इस अंधाधुंध हमले में एक व्यक्ति ने न केवल अपनी विद्वता से, बल्कि अपने निस्वार्थ साहस से भी अमिट छाप छोड़ी।
प्रोफेसर पुरी, IIT दिल्ली के प्रतिष्ठित गणितज्ञ और प्रोफेसर इमेरिटस, ऑपरेशंस रिसर्च सोसाइटी ऑफ इंडिया (ORSI) के 38वें वार्षिक सम्मेलन में भाग लेने आए थे, जो एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के साथ संयुक्त रूप से आयोजित था। शाम करीब 7:30 बजे, जब प्रतिनिधि—पुरी और उनके सहकर्मी सहित—ऑडिटोरियम से निकलकर पास के हॉल की ओर वार्षिक साधारण सभा के लिए जा रहे थे, तभी AK सीरीज की राइफलों से गोलीबारी शुरू हो गई और ग्रेनेड फेंके गए। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, ध्वनियों को उत्सव के पटाखों समझा गया। लेकिन प्रोफेसर पुरी ने तुरंत खतरे को भांप लिया और साहसपूर्वक अपने साथियों को चेतावनी दी, उन्हें छिपने और सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए निर्देशित किया।
उस पल के उस निस्वार्थ कार्य में उन्होंने खुद को हमलावरों के सामने उजागर कर दिया, दूसरों को अपनी जान की कीमत पर बचाते हुए। उन्हें कई गोलियां लगीं और अस्पताल पहुंचते-पहुंचते उन्होंने दम तोड़ दिया।
बैंगलोर के पहले आतंकी हमले में वे एकमात्र शहीद बने। चार अन्य घायल हुए, जिनमें IISc के प्रसिद्ध प्रोफेसर विजय चंद्रू जैसे विद्वान शामिल थे, लेकिन वे बच गए।
यह कोई साधारण क्षति नहीं थी।
1939 में जन्मे प्रोफेसर पुरी ने अपना पूरा जीवन शिक्षा को समर्पित कर दिया था। दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.एससी. और एम.एससी. में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले वे 1972 में ऑपरेशंस रिसर्च में पीएच.डी. प्राप्त कर चुके थे। कॉम्बिनेटोरियल ऑप्टिमाइजेशन, फ्रैक्शनल प्रोग्रामिंग और नेटवर्क फ्लो में उनके शोध को व्यापक सम्मान मिला। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में व्यापक प्रकाशन किए और असंख्य छात्रों का मार्गदर्शन किया। ORSI के 35 वर्षों से अधिक समय तक स्तंभ रहे वे हर वार्षिक सम्मेलन में बिना नागा उपस्थित रहते थे और जर्नल OPSEARCH के संपादकीय बोर्ड में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
घटना वाले दिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उनकी शांत उपस्थिति और सहज साहस ने अराजकता में कई जानें बचाईं।
देश ने गहरा शोक मनाया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने गहन सदमा व्यक्त किया। IIT दिल्ली ने उन्हें “कर्तव्यनिष्ठ, परिश्रमी और समर्पित” संकाय सदस्य बताया, जिनकी क्षति अपूरणीय है। उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत ने उनकी “विद्वता के प्रति प्रतिबद्धता, सामाजिक सरोकारों की संवेदनशीलता और मानवीय गुणों” को याद किया।
उनकी स्मृति में ऑपरेशंस रिसर्च सोसाइटी ऑफ इंडिया ने प्रो. एम.सी. पुरी स्मृति पुरस्कार स्थापित किया, जो क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान—मुख्यतः भारत में किए गए कार्य—के लिए प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है। उनकी स्मृति में संगोष्ठियां आयोजित की गईं और बाद के ORSI सम्मेलनों में उनकी अटूट उपस्थिति और नेतृत्व को सम्मानित किया गया।
बीस वर्ष बाद भी प्रोफेसर पुरी की कहानी एक मार्मिक स्मृति है: जब आतंक ज्ञान और प्रगति को डराने की कोशिश करता है, तब एक विद्वान की शांत समर्पण और अंतिम गहन साहस मानवीय भावना की दृढ़ता को प्रकाशित करता है। उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया—यह आज भी विद्वानों की पीढ़ियों को प्रेरित करता है, सिद्ध करते हुए कि साहस, ज्ञान की तरह, सबसे अंधेरे पलों को रोशन कर सकता है।
अब सवाल ये है कि मैं उन्हें कैसे जानती हूँ ? मुझे बताते हुए बेहद गर्व महसूस हो रहा है कि श्री पुरी मेरी बुआ डॉ रक्षा पुरी ( गोल्ड मेडलिस्ट हिंदी लिटरेचर , प्रोफेसर - कमला नेहरू कॉलेज दिल्ली) के पति अर्थात् मेरे सेज फूफाजी थे । मैं उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए थी और आज भी मुझे वो पाल याद हैं। ऐसे महान व्यक्ति की भतीजी कहलाना मेरे लिए बेहद गर्व की बात है।
National News
परम बलिदान: आतंक के सामने ना झुकने वाले प्रोफेसर मुनीश चंद्र पुरी
ऋतू सोढ़ी सहायक निदेशक राजस्थान सूचना केंद्र मुंबई
Related stories
IIM Udaipur hosts BCI Yuva Investor Connect 2026; Geetanjali Group CFO CA Roshan Jain serves on jury
Udaipur: BCI Yuva Investor Connect 2026 was organised at the Indian Institute of Management (IIM) Udaipur to…
‘Diver Victory’ Presentation Brings History Alive at Vidya Bhawan Polytechnic’s Meljol Fair
Udaipur, September 27: The life and reign of Maharana Pratap offer an inspiring example of good governance, f…
GMCH Spreads the Message of a Healthy Heart Among Senior Citizens on World Heart Day
Udaipur: Geetanjali Hospital, Udaipur, in association with Maharana Pratap Senior Citizens Institute, organis…
KOTA MILITARY STATION ORGANISES KOTA GANDIV MARATHON 1.0 AS PART OF GANDIV GOLDEN JUBILEE CELEBRATIONS
Jaipur: As part of the Gandiv Golden Jubilee Celebrations, Kota Military Station organised the Kota Gandiv Ma…