नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 में अवसंरचना-आधारित और गतिशीलता, संचालित विकास पर रणनीतिक फोकस के अनुरूप, भारत सरकार ने डंकुनी (पश्चिम बंगाल) को सूरत (गुजरात) से जोड़ने वाले पूर्व-पश्चिम समर्पित माल ढुलाई गलियारे (डीएफसी) के त्वरित कार्यान्वयन की घोषणा की है। 2,052 किलोमीटर लंबा यह गलियारा देश भर में लॉजिस्टिक दक्षता, क्षेत्रीय एकीकरण और सतत औद्योगिक विस्तार को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भारत के लॉजिस्टिक तंत्र ने अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में बताया गया है कि देश की लॉजिस्टिक लागत एक दशक पहले के 13.14 प्रतिशत की तुलना में घटकर सकल घरेलू उत्पाद का 7.97 प्रतिशत रह गई है। यह महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार निरंतर सार्वजनिक पूंजीगत व्यय, समन्वित नीति सुधारों और लक्षित अवसंरचना विकास को दर्शाता है, जो भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
पूर्व-पश्चिम समर्पित माल ढुलाई गलियारों (डीएफसी) की सफलता पूर्वी और पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारों पर आधारित है, जो वर्तमान में लगभग पूरी क्षमता से कार्यरत हैं और प्रतिदिन लगभग 400 मालगाड़ियों का संचालन करते हैं। इन गलियारों ने माल ढुलाई को यात्री यातायात से अलग करके भारतीय रेलवे नेटवर्क पर भीड़भाड़ को काफी हद तक कम किया है, जिससे आवागमन में सुधार हुआ है, यात्रा समय कम हुआ है और लागत प्रभावी परिवहन संभव हुआ है।
पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे (डब्ल्यूडीएफसी) का एक बड़ा हिस्सा उत्तर पश्चिम रेलवे (एनडब्ल्यूआर) के अधिकार क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिसने कुशल संचालन, मौजूदा रेलवे नेटवर्क के साथ निर्बाध एकीकरण और माल ढुलाई को अनुकूलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उत्तर पश्चिम रेलवे के तहत डब्ल्यूडीएफसी की परिचालन सफलता से प्रमुख माल ढुलाई मार्गों पर आवागमन में वृद्धि, परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आई है। नए पूर्व-पश्चिम डीएफसी का डब्ल्यूडीएफसी के साथ एकीकरण इस नेटवर्क को और मजबूत करेगा, जिससे नवीन लॉजिस्टिक्स संपर्क खुलेंगे और विभिन्न क्षेत्रों में उच्च क्षमता वाली माल ढुलाई कनेक्टिविटी का विस्तार होगा।
नव घोषित कॉरिडोर पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर गुजरेगा, जिससे पूर्वी खनिज-समृद्ध राज्य पश्चिमी औद्योगिक और बंदरगाह केंद्रों से प्रभावी रूप से जुड़ जाएंगे। डब्ल्यूडीएफसी के साथ निर्बाध एकीकरण से प्रमुख पश्चिमी तट बंदरगाहों तक माल की आवाजाही तेज और अधिक कुशल हो सकेगी, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और बहुआयामी लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बल मिलेगा।
पूर्व-पश्चिम समर्पित माल ढुलाई गलियारा (डीएफसी) से उच्च घनत्व वाले रेल मार्गों पर भीड़ कम होने, माल ढुलाई क्षमता बढ़ने और विभिन्न क्षेत्रों में रसद लागत और पारगमन समय में कमी आने की उम्मीद है। इससे औद्योगिक गलियारों को मजबूती मिलेगी, विनिर्माण क्षमता बढ़ेगी, पूर्वी और पश्चिमी राज्यों के बीच संपर्क बेहतर होगा और निर्माण एवं परिचालन दोनों चरणों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
भारत की नेट ज़ीरो 2070 प्रतिबद्धता के अनुरूप, यह परियोजना सरकार के पारंपरिक ‘‘ग्रे’’ बुनियादी ढांचे से हरित, लचीले और भविष्य के लिए तैयार गतिशीलता प्रणालियों की ओर रणनीतिक बदलाव को दर्शाती है। रेल आधारित माल ढुलाई को बढ़ावा देकर जो सबसे अधिक ऊर्जा-कुशल और कम उत्सर्जन वाले परिवहन साधनों में से एक है, यह गलियारा सतत आर्थिक विकास को समर्थन देते हुए रसद क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को काफी कम करेगा।
पूर्व-पश्चिम समर्पित माल ढुलाई गलियारा एक अधिक एकीकृत, प्रतिस्पर्धी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार विकास मॉडल की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जो बदलती वैश्विक आर्थिक गतिशीलता के बीच भारत के उच्च विकास पथ की रीढ़ के रूप में गतिशीलता को मजबूत करता है।
National News
पूर्व-पश्चिम समर्पित माल ढुलाई गलियारा अवसंरचना-आधारित विकास और हरित गतिशीलता को गति देगा
Related stories
KOTA MILITARY STATION ORGANISES KOTA GANDIV MARATHON 1.0 AS PART OF GANDIV GOLDEN JUBILEE CELEBRATIONS
Jaipur: As part of the Gandiv Golden Jubilee Celebrations, Kota Military Station organised the Kota Gandiv Ma…
Diver Victory Presentation’ Brings History Alive at Vidya Bhawan Polytechnic’s Meljol Mela
Udaipur: The life and reign of Maharana Pratap offer an inspiring example of good governance, financial manag…
Maternal and Child Health, Nutrition Top Government Priorities: Kharadi
Udaipur: The three-day Angan Seva Milan programme, organised under the Viksit Bharat–Jan Seva Abhiyan, conclu…
EXERCISE TARANG SHAKTI 2026: POWER IN PARTNERSHIP
Following the inaugural ceremony held yesterday, the Indian Air Force (IAF) is set to commence the operationa…