श्रीगंगानगर। श्री अरोड़वंश सनातन धर्म मंदिर (ट्रस्ट) के पूर्व प्रधान स्वर्गीय त्रिलोकचंद वधवा की पुत्रवधू प्रीति गौरव वधवा ने चंडीगढ़ में अपनी अलग पहचान बनाकर श्रीगंगानगर शहर का मान फिर से बढ़ाया है।
शिक्षक दिवस के अवसर पर गोस्वामी गणेश दत्त सनातन धर्म कॉलेज चंडीगढ़ में आयोजित स्वास्थ्य एवं वेलनेस टॉक में विशेष आमंत्रित मुख्या वक्ता के रूप में उन्होंने उपस्थित शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों को पानी और भोजन की गुणवत्ता के प्रति जागरूक किया।
उल्लेखनीय है कि स्व. त्रिलोकचंद वधवा अपने जीवनकाल में अरोड़वंश सभा के प्रधान रहे। वधवा गोल्डन ट्रांसपोर्ट के मालिक होने के साथ-साथ वे सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय रहे और उल्लेखनीय योगदान दिया। उनकी पुत्रवधू प्रीति गौरव वधवा आज अपने ससुर के नक्शेकदम पर चलते हुए अपने काम और सोच के दम पर चंडीगढ़ में स्वास्थ्य एवं वेलनेस के क्षेत्र में अपनी स्वतंत्र पहचान बना रही हैं।
श्रीगंगानगर से शुरू हुई उनकी यात्रा अब चंडीगढ़ के प्रतिष्ठित संस्थानों, राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है।
शिक्षक दिवस पर गोस्वामी गणेश दत्त सनातन धर्म कॉलेज ने अपने टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ के लिए एक विशेष स्वास्थ्य एवं वेलनेस सत्र का आयोजन किया था।
इस कार्यक्रम में प्रीति-गौरव वधवा को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।
उन्होंने स्वास्थ्य को केवल बीमारी के इलाज तक सीमित रखने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाई जाने वाली आदतों और निवारक स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया।अपने उद्बोधन में प्रीति वधवा ने लोगों का ध्यान दो ऐसी मूलभूत चीजों की ओर आकर्षित किया, जिनके बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती-पानी और भोजन।
उन्होंने सवाल उठाया कि हम दिनभर में कितना पानी पीते हैं, लेकिन क्या हम कभी यह सोचते हैं कि जो पानी हम पी रहे हैं, उसकी गुणवत्ता कैसी है?
इसी तरह भोजन को लेकर भी उन्होंने पूछा कि आज की व्यस्त जीवनशैली में हम क्या खा रहे हैं और हमारे भोजन की गुणवत्ता वास्तव में कितनी अच्छी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भोजन केवल पेट भरने का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे स्वास्थ्य और जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण आधार है। पानी और भोजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को उन्होंने सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाया, ताकि श्रोता इन्हें अपनी दिनचर्या में आसानी से अपना सकें।
उनका संदेश स्पष्ट था—स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए बीमारी आने से पहले, बीमारी ना हो इसकी जागरूकता होना जरूरी है।
श्रीगंगानगर की पुत्रवधू प्रीति वधवा ने चंडीगढ़ को अपनी कर्मभूमि बनाया है। स्वास्थ्य एवं वेलनेस के क्षेत्र में उन्होंने लगातार अपनी पहचान मजबूत बनाई हैं। कार्यक्रम में उपस्थित स्टाफ सदस्यों ने उनके व्यावहारिक और सरल दृष्टिकोण की सराहना की।