उदयपुर। भीलों का बेदला स्थित पेसिफिक डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर ने दंत चिकित्सा अनुसंधान में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है।

संस्थान के ऑर्थोडॉन्टिक्स एवं डेंटोफेशियल ऑर्थोपेडिक्स विभाग को एक साथ 5 अंतरराष्ट्रीय पेटेंट स्वीकृत हुए हैं।यह पहला अवसर है जब किसी एक विभाग को एक साथ इतनी बड़ी वैश्विक मान्यता मिली है।

यह पूरी उपलब्धि विभाग के एचओडी डॉ. पियूष बोल्या के मार्गदर्शन और पीजी छात्रा डॉ. प्राची तुषार खत्री के समर्पण का परिणाम है।डॉ. पियूष बोल्या ने बताया कि दांतों के टेढ़े-मेढ़ेपन को ठीक करने के लिए ब्रेसेस (तार) का उपचार काफी जटिल और संवेदनशील प्रक्रिया होती है।

इन पेटेंट के तहत ऐसे आधुनिक और विशिष्ट ऑर्थोडॉन्टिक उपकरण विकसित किए गए हैं, जो उपचार की प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक सरल और सटीक बनाते हैं।डॉ.बोल्या ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन पेटेंट का स्वीकृत होना इस बात का प्रमाण है कि यह तकनीक पूर्णतः मौलिक, तकनीकी दृष्टि से उन्नत और व्यावहारिक रूप से उपयोगी है।पीजी छात्रा डॉ.प्राची तुषार खत्री ने बताया कि इन अत्याधुनिक उपकरणों के उपयोग से क्लिनिकल प्रैक्टिस और मरीजों दोनों को सीधा लाभ मिलेगा।

साथ ही क्लिनिक में मरीज को लंबे समय तक मुंह खोलकर नहीं बैठना पड़ेगा, दांतों का अलाइनमेंट अधिक सटीकता से होगा जिससे उपचार में लगने वाले कुल महीनों की अवधि भी घटेगी।

इस सफलता पर विभाग ने पेसिफिक डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के प्रबंधन का हार्दिक आभार व्यक्त किया और कहा कि कॉलेज प्रबंधन द्वारा अनुसंधान व नवाचार के लिए निरंतर उपलब्ध कराया जा रहा माहौल ही इस उपलब्धि की नींव बना है।इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पेसिफिक मेडिकल विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन राहुल अग्रवाल ने पूरी टीम को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि यह सफलता न केवल संस्थान बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। मेडिकल और डेंटल शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार ही वह माध्यम है जिससे मरीजों को विश्व स्तरीय और किफायती इलाज मिल सकता है।

उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में भी यहाँ के शोधार्थी चिकित्सा विज्ञान को नई दिशा देते रहेंगे।