उदयपुर, भीलो का बेदला स्थित पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के कान,नाक एवं गला रोग विभाग की ओर से राइनोमैनोमेट्री विषय पर एक दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं बक्ता विख्यात ईएनटी विशेषज्ञ डॉ.एस.पी. दुबे,डॉ. संजय अग्रवाल, पेसिफिक मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉ. एम.एम. मंगल, पीएमसीएच के प्रिंसिपल डॉ. यू.एस. परिहार, डीन रिसर्च डॉ.आर.के पालीवाल आयोजन चेयरमैन डॉ. रिचा गुप्ता और आयोजन सचिव डॉ.एस.एस.कौशिक ने दीप प्रज्वलन कर किया।
वर्कशॉप की आयोजन चेयरमेन डॉ.रिचा गुप्ता ने बताया कि राजस्थान में राइनोमैनोमेट्री पर आयोजित होने वाली यह अपनी तरह की पहली वर्कशॉप है। इस वर्कशॉप में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागी चिकित्सकों एवं डेलीगेट्स ने भाग लेकर आधुनिक जांच तकनीक की बारीकियों को समझा।
डॉ.रिचा ने बताया कि कार्यशाला में भोपाल से आए देश के विख्यात ईएनटी विशेषज्ञ डॉ.एस.पी. दुबे तथा डॉ. संजय अग्रवाल मुख्य वक्ता एवं विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे।
उन्होंने प्रतिभागियों के साथ राइनोमैनोमेट्री तकनीक की कार्यप्रणाली, इसके वैज्ञानिक आधार और नैदानिक उपयोगिता पर विस्तृत जानकारी साझा की।
डॉ. दुबे ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में नाक के वायु प्रवाह और प्रतिरोध का सटीक वैज्ञानिक माप अत्यंत आवश्यक हो चुका है, जिससे बिना किसी संशय के रोग की गंभीरता का पता लगाया जा सकता है।
पीएमसीएच के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ.एस.एस.कौशिक ने बताया कि क्रॉनिक नसल ऑब्स्ट्रक्शन (नाक बंद होने या सांस लेने में स्थायी रुकावट) से ग्रसित मरीजों के संपूर्ण मूल्यांकन में राइनोमैनोमेट्री जांच बेहद अनिवार्य और क्रांतिकारी साबित होती है।
कई बार सामान्य एंडोस्कोपी या सीटी स्कैन से नाक के वायु प्रवाह के वास्तविक प्रतिरोध का सही अनुमान लगाना कठिन होता है।
राइनोमैनोमेट्री द्वारा प्राप्त ऑब्जेक्टिव डेटा ईएनटी सर्जनों को यह तय करने में मदद करते हैं कि मरीज को वास्तविक रूप से सर्जरी की आवश्यकता है अथवा नहीं।
इससे अनावश्यक सर्जरी से बचाव होता है और सही प्रक्रिया का चयन आसान हो जाता है।
सत्र के दौरान डॉ.ऋचा गुप्ता और डॉ.एस.एस.कौशिक के नेतृत्व में उपस्थित डेलीगेट्स को अत्याधुनिक उपकरणों पर हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग भी दी गई।