सीआरबी एवं सीईओ, रेलवे बोर्ड ने डीएफसीसीआईएल कॉरपोरेट ऑफिस का दौरा किया; वॉर रूम एवं इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग ट्रेनिंग सेटअप का उद्घाटन किया नई दिल्ली।
श्री सतीश कुमार, चेयरमैन एवं सीईओ, रेलवे बोर्ड ने शनिवार को सेक्टर-145, नई दिल्ली स्थित डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के कॉरपोरेट ऑफिस का दौरा किया।
दौरे के दौरान उन्हें सेंट्रल कंट्रोल सिस्टम, रेलवे ट्रैक्स एवं ऑपरेशनल व्यवस्थाओं सहित विभिन्न तकनीकी एवं सुरक्षा पहलुओं से अवगत कराया गया। उन्होंन डीएफसीसीआइएल ट्रैक्स पर संचालित प्रत्येक फ्रेट ट्रेन के कम्प्यूटरीकृत मॉनिटरिंग सिस्टम की भी समीक्षा की।
रेलवे दुर्घटनाओं को कम करने पर जोर देते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी कमी की पहचान प्रारंभिक स्तर पर ही की जाए और संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उसका तत्काल निवारण किया जाए।
इस अवसर पर श्री प्रवीण कुमार, मैनेजिंग डायरेक्टर, क्थ्ब्ब्प्स्; श्री शोभित भटनागर, डायरेक्टर (ओपी एंड बीडी); श्री अनुराग शर्मा, डायरेक्टर (इन्फ्रा); श्री पवन कुमार राय, डायरेक्टर (पीपी); तथा श्री प्रमोद कुमार, सीवीओ उपस्थित रहे।
रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों,जिनमें श्री एस.एम. शर्मा, ईडी/सीसी; श्री दिनेश कुमार वशिष्ठ, ईडी/ई एंड आर; तथा श्री कृष्ण कांत रोरा, डायरेक्टर/सीसी शामिल थे एवं डीएफसीसीआइएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कार्यक्रम में भाग लिया।
वॉर रूम का उद्घाटन दौरे के दौरान चेयरमैन ने वॉर रूम का उद्घाटन किया। उन्होंने अधिकारियों को ट्रैक डिफिशिएंसी की पहचान के लिए एक डेडिकेटेड डैशबोर्ड विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे फ्रेट ट्रेनों की 24 घंटे मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा सके। चिन्हित की गई किसी भी तकनीकी या ऑपरेशनल डिफिशिएंसी का तत्काल निवारण सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।
उन्होंने फ्रेट ट्रेन क्रू की सतर्कता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपयोग किए जा रहे विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस की प्रभावशीलता की समीक्षा करने तथा आवश्यक तकनीकी सुधार किए जाने के निर्देश दिए। स्टेशनों पर कैमरों सहित आधुनिक टेक्नोलॉजी के उपयोग और सिग्नल एक्सचेंज सिस्टम की निरंतर मॉनिटरिंग पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इन सभी गतिविधियों को एक फोकस्ड कैंपेन के रूप में संचालित किया जाना चाहिए।
ट्रेन ऑपरेशंस के दौरान उत्पन्न होने वाली तकनीकी डिफिशिएंसी को दूर करने के लिए भी निर्देश दिए गए। उन्होंने नई टेक्नोलॉजीज तथा मशीन विजन इंस्पेक्शन सिस्टम के अधिक प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया।
हॉट एक्सल बॉक्स डिटेक्टर पर भी चर्चा की गई। इस संबंध में समस्याओं के समाधान के लिए थ्री-लेवल अप्रोच पर जोर दिया गया।
पहले रूट कॉज एवं मौजूदा स्थिति की पहचान करना, इसके बाद विस्तृत विश्लेषण करना और अंत में स्थायी आधार पर एक इम्प्रूव्ड सिस्टम लागू करना।
रेलवे दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए ट्रेन डिरेलमेंट की घटनाओं की विस्तृत जांच तथा ट्रेनों में आग लगने की घटनाओं के कारणों एवं निष्कर्षों की नियमित समीक्षा पर भी जोर दिया गया।
कैटल रन ओवर से संबंधित घटनाओं में कमी को एक सकारात्मक विकास के रूप में रेखांकित किया गया। मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब्स के माध्यम से नए फ्रेट ट्रैफिक को बढ़ावा देने तथा जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट में कंटेनरों की आवाजाही को संतुलित करने पर भी चर्चा की गई।
रिसर्च एवं इनोवेशन पर जोर अधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान श्री सतीश कुमार ने कहा कि वॉर रूम प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग एवं ऑपरेशनल गतिविधियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि डीएफसीसीआइएल टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट एवं टेस्टिंग के लिए रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन के साथ समानांतर रूप से कार्य करे तथा नई टेक्नोलॉजीज विकसित करने की संभावनाओं का पता लगाए।
उन्होंने एम्प्लॉयी स्किल डेवलपमेंट के लिए एआई से संबंधित कोर्स शुरू करने तथा इमेज रिकॉग्निशन जैसी आधुनिक टेक्नोलॉजीज में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को उपलब्ध टेक्नोलॉजी एवं विशेषज्ञता के आधार पर नए बिजनेस ऑपर्च्युनिटीज की पहचान करने के भी निर्देश दिए, ताकि डीएफसीसीआइएल की टेक्नोलॉजिकल कैपेबिलिटीज एवं यूटिलिटी को और बढ़ाया जा सके।
नई पॉलिसी के अंतर्गत उपलब्ध फाइनेंशियल असिस्टेंस एवं फंड्स के प्रभावी उपयोग के साथ-साथ आईआईटी दिल्ली के साथ रिसर्च एवं टेक्निकल कोलैबोरेशन को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि नई टेक्नोलॉजीज के विकास में तेजी लाने के लिए स्पेशलाइज्ड इंस्टीट्यूशंस को रिसर्च प्रोजेक्ट्स से जोड़ा जाना चाहिए।
लागत कम करने, इनोवेशन को प्रोत्साहित करने तथा टेक्नोलॉजिकल सेल्फ-रिलायंस को मजबूत करने के लिए ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर के उपयोग एवं विकास को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए।
दौरे के दौरान उन्होंने परिसर में आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने एक्सपीरियंस सेंटर का भी दौरा किया तथा डीएफसीसीआइएल की विभिन्न गतिविधियों एवं उपलब्धियों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग ट्रेनिंग फैसिलिटी का उद्घाटन इसके पश्चात चेयरमैन एवं सीईओ ने हेवी हॉल इंस्टीट्यूट का दौरा किया, जहां उन्होंने ‘‘इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग ट्रेनिंग सेटअप’’ का उद्घाटन किया। यह फैसिलिटी कर्मचारियों को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम में तकनीकी ज्ञान एवं प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रदान करने में सहायता करेगी, जिससे ऑपरेशनल सेफ्टी एवं एफिशिएंसी में वृद्धि होगी।
दौरे के अंतिम चरण में चेयरमैन एवं सीईओ ने एचएचआइ के कॉन्फ्रेंस रूम में डीएफसीसीआइएल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान संगठन के कामकाज, ऑपरेशनल सेफ्टी, टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट, ट्रेनिंग व्यवस्थाओं एवं भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
इंटरैक्शन के दौरान श्री सतीश कुमार ने वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के कंप्लीशन एवं कमीशनिंग पर डीएफसीसीआइएल को बधाई दी।
उन्होंने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की सराहना की, जिसे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा न्यू सानंद (छ), न्यू मकरपुरा, न्यू उमरगांव एवं न्यू जेएनपीटी से इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन के साथ डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल फ्रेट ट्रेनों को फ्लैग ऑफ किए जाने के साथ चिह्नित किया गया।
उन्होंने देश के फ्रेट ट्रांसपोर्टेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में डीएफसीसीआइएल द्वारा की गई प्रगति पर गर्व व्यक्त किया।
उन्होंने पैरेलल इंडियन रेलवे सेक्शंस एवं संबंधित रेलवे जोन्स में पंक्चुअलिटी में हुए सुधार की भी सराहना की तथा इस प्रदर्शन को बनाए रखने एवं इसमें और सुधार करने के महत्व पर जोर दिया, ताकि डीएफसी नेटवर्क के ऑपरेशनल बेनिफिट्स को पूरी तरह प्राप्त किया जा सके। उन्होंने औसत फ्रेट ट्रेन स्पीड में निरंतर सुधार तथा ओवरऑल ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने पर भी जोर दिया।
डीएफसीसीआइएल का यह दौरा न केवल डीएफसीसीआइएल की चल रही गतिविधियों की समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सेफ ऑपरेशंस, टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन, बेहतर पंक्चुअलिटी तथा संगठन की भविष्य की कार्यदिशा के संबंध में आगे के निर्देश प्रदान करने के लिए भी महत्वपूर्ण रहा।