प्रो. डॉ. अशोक कुमार रुस्तगी जी का जन्म 15 जुलाई, 1963 को मुंडिया धुरेकी, जिला बदायूँ (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उन्होंने अपने दीर्घ शैक्षणिक जीवन में शिक्षण, शोध, प्रशासन, पत्रकारिता तथा समाजसेवा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

तीन दशकों से अधिक समय तक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने अनेक विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों को भी निरंतर आगे बढ़ाया।

शैक्षणिक एवं व्यावसायिक जीवन प्रो. रुस्तगी ने एम.ए. (राजनीति विज्ञान) तथा पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने एस.एम. कॉलेज, चंदौसी से अपने शिक्षण जीवन की शुरुआत की। इसके पश्चात वे जे.एस. हिंदू पी.जी. कॉलेज, अमरोहा में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर के रूप में लगभग 33 वर्षों तक सेवाएँ देते रहे।

राजनीति विज्ञान के अध्यापक के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों में विषय के प्रति रुचि विकसित करने के साथ-साथ शोध की प्रवृत्ति को भी प्रोत्साहित किया। उनके निर्देशन में लगभग 40 शोधार्थियों ने पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की, जो उनके शोध-निर्देशन एवं अकादमिक योगदान का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

1 नवंबर 2021 को उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग से चयनित होकर उन्होंने के.ए. (पी.जी.) कॉलेज, कासगंज के प्राचार्य का दायित्व संभाला। प्राचार्य के रूप में उनका अनुभव शिक्षण के साथ-साथ उच्च शिक्षा संस्थान के प्रशासनिक संचालन का भी महत्वपूर्ण अध्याय रहा है।

शोध, लेखन एवं संपादन प्रो. डॉ. रुस्तगी जी का साहित्यिक एवं अकादमिक लेखन के क्षेत्र में भी सक्रिय योगदान रहा है। उन्होंने सामाजिक, शैक्षिक, राजनीतिक एवं समसामयिक विषयों पर सैकड़ों आलेख एवं अग्रलेख लिखे हैं।

इसके अतिरिक्त उनके लगभग 50 शोध-पत्र विभिन्न शोध मंचों एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। वे ‘आर्यावर्त केसरी’ दैनिक, साप्ताहिक एवं पाक्षिक संस्करणों के प्रकाशन एवं संपादन से भी जुड़े रहे हैं।

पत्रकारिता के माध्यम से उन्होंने सामाजिक एवं जनसरोकारों से जुड़े विषयों को प्रमुखता प्रदान की।

शोध एवं अकादमिक विमर्श को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से वे ‘समाज विज्ञान शोध पत्रिका’ तथा ‘प्रज्ञा शिक्षण शोध रचना’ जैसी अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं के संपादन एवं प्रकाशन से जुड़े हैं। इस प्रकार उनका योगदान केवल कक्षा-कक्ष तक सीमित न रहकर शोध एवं ज्ञान-विमर्श के व्यापक क्षेत्र तक विस्तृत हुआ है।

संगोष्ठियों एवं अकादमिक गतिविधियों में सहभागिता प्रो. रुस्तगी ने सैकड़ों राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं तथा शैक्षणिक-सामाजिक सभाओं में सहभागिता की है। इन मंचों के माध्यम से उन्होंने शिक्षा, समाज, राजनीति, इतिहास एवं सामाजिक चेतना से जुड़े विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए और अकादमिक संवाद को समृद्ध करने में योगदान दिया।

समाजसेवा एवं संगठनात्मक दायित्व शैक्षणिक जीवन के साथ-साथ प्रो. डॉ. रुस्तगी सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं। वे आर्यावर्त जन उत्थान न्यास, पंजीकृत, अमरोहा के संस्थापक हैं। इस संस्था के माध्यम से सामाजिक जागरूकता एवं जनकल्याण से संबंधित गतिविधियों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने हेमानंद आर्य गौशाला की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह कार्य उनके सामाजिक दायित्वबोध एवं जीव-जंतु संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।

इतिहास एवं भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनकी रुचि के कारण वे भारतीय इतिहास संकलन समिति, मेरठ प्रान्त के अध्यक्ष के रूप में भी दायित्व निभा रहे हैं। वे आर्य प्रतिनिधि सभा, उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित सदस्य भी हैं।

शिक्षक हितों एवं उच्च शिक्षा से जुड़े संगठनात्मक कार्यों में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वे रोहिलखंड विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (रूटा) के लगभग 10 वर्षों तक अध्यक्ष रहे।

पत्रकारिता एवं प्रकाशन से जुड़ी गतिविधियाँ शैक्षणिक एवं सामाजिक गतिविधियों के साथ प्रो. रुस्तगी का जुड़ाव प्रकाशन क्षेत्र से ही रहा है। आर्यावर्त प्रिंटर्स, अमरोहा के माध्यम से प्रकाशन एवं मुद्रण संबंधी गतिविधियों में उनकी सहभागिता रही है। पत्रकारिता, शोध-पत्रिका संपादन और लेखन के माध्यम से उन्होंने वैचारिक एवं अकादमिक सामग्री को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाने का प्रयास किया है।

पारिवारिक जीवन प्रो. डॉ. अशोक कुमार रुस्तगी की धर्मपत्नी प्रो. बीना रुस्तगी हैं, जो जे.एस. हिंदू पी.जी. कॉलेज, अमरोहा के हिंदी विभाग में प्रोफेसर हैं। दोनों ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी-अपनी सेवाओं के माध्यम से उल्लेखनीय योगदान दिया है।

उनकी दोनों सुपुत्रियाँ एम.बी.बी.एस. उपाधि प्राप्त चिकित्सक हैं। इस प्रकार परिवार में भी शिक्षा एवं सेवा के संस्कारों की परंपरा दिखाई देती है।

आदरणीय डा. अशोक कुमार रुस्तगी जी के हम हृदय से आभारी हैं। हम जो भी लेख लिखते हैं वह उन्हें इमेल से भेजते रहे हैं।

उनका पाक्षिक पत्र आर्यावर्त केसरी आर्यजगत का ऐसा पत्र है जिसमें हमारे अभी तक सबसे अधिक लेख प्रकाशित हुए हैं। हम पहली बार उनसे ऋषि दयानन्द जन्म भूमि, टंकारा-गुजरात में मिले थे।

वहां वह अमरोहा से अपने मित्रों एवं उनके परिवार के सदस्यों को एक बस में लेकर जाते हैं। वहां ऋषि दयानन्द जन्म भूमि स्मारक न्यास की ओर से आदरणीय रुस्तगी जी सम्मान भी किया गया था।

टंकारा में ही हमने उनके द्वारा प्रकाशित सत्यार्थ प्रकाश स्थूलाक्षर का एक भव्य एवं आकर्षक ग्रन्थ भी प्राप्त किया था। देहरादून में ऋषि दयानन्द के अप्रतिम भक्त 87 वर्षीय श्री वीरेन्द्र कुमार राजपूत जी निवास करते हैं।

श्री राजपूत जी ने ऋषि दयानन्द एवं आर्यसमाज के समर्पित कुछ प्रमुख विद्वानों पर अपनी काव्य रचनायें की हैं। श्री राजपूत जी ने चारों वेदों के प्रत्येक मन्त्र का काव्यानुवाद भी अनेक खण्डों में प्रस्तुत किया है।

श्री राजपूत जी के अधिकांश ग्रन्थों का प्रकाशन डा. अशोक रुस्तगी जी ने ही अपने आर्यावर्त केसरी प्रकाशन की ओर से किया है। हम श्री अशोक रुस्तगी जी की ओर को आर्यसमाज की एक विभूति मानते हैं।

उनकी ऋषि दयानन्द के प्रति श्रद्धा व भक्ति तथा आर्य साहित्य के प्रकाशन के क्षेत्र में योगदान प्रशंसनीय है। डा. अशोक कुमार रुस्तगी जी को अगस्त, 2026 में एक अभिनन्दन ग्रन्थ प्रस्तुत किया जा रहा है, उसके लिये हम उन्हें अपनी हार्दिक शुभकामनायें देते हैं।

ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वह स्वस्थ रहें और ऋषि दयानन्द सरस्वती जी के मिशन को सफल करने में अपनी सेवायें देते रहें। हम उनके सभी परिवारजनों को भी अपनी शुभकामनायें देते हैं।

निष्कर्ष प्रो. डॉ. अशोक कुमार रुस्तगी जी का व्यक्तित्व बहुआयामी है। शिक्षक, शोध-निर्देशक, शिक्षाविद्, प्रशासक, संपादक, लेखक, पत्रकार एवं समाजसेवी के रूप में उन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में दीर्घकालीन योगदान दिया है।

लगभग 33 वर्षों के अध्यापन अनुभव, शोधार्थियों के मार्गदर्शन, शोध-पत्रों एवं आलेखों के प्रकाशन, शोध पत्रिकाओं के संपादन, महाविद्यालय के प्राचार्य के रूप में प्रशासनिक दायित्व तथा सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़ाव ने उनके व्यक्तित्व को व्यापक आयाम प्रदान किए हैं।

उनकी कार्ययात्रा शिक्षा और समाज के बीच सक्रिय संवाद स्थापित करने का उदाहरण प्रस्तुत करती है। वर्तमान में वे अमरोहा स्थित आर्यावर्त कॉलोनी में निवास करते हुए अपने शैक्षणिक, सामाजिक एवं रचनात्मक कार्यों से जुड़े हुए हैं। उनका जीवन निरंतर अध्ययन, शोध, संगठन, समाजसेवा और जनजागरण के प्रति समर्पित रहा है। हम श्री अशोक कुमार रस्तोगी जी का हार्दिक अभिनन्दन करते हैं और उन्हें अपनी शुभकामनायें देते हैं।

-मनमोहन कुमार आर्य