हनुमानगढ़ (भादरा) । सफलता की राह कभी आसान नहीं होती, लेकिन मजबूत हौसले, अनुशासन और लगातार मेहनत के सामने मुश्किलें भी छोटी पड़ जाती हैं।
डाबड़ी (तहसील भादरा) निवासी महेंद्र छींपा के पुत्र सुनील छींपा ने संघर्षों को मात देते हुए ऐसी सफलता हासिल की है, जो पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
मां के निधन जैसे कठिन समय में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए लगातार तीन सरकारी नौकरियां हासिल कर परिवार और गांव का नाम रोशन किया है।सुनील छींपा ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की।
वर्ष 2018 में उनका चयन राजस्थान पुलिस कांस्टेबल पद पर हुआ। लेकिन सीखने और आगे बढ़ने की इच्छा ने उन्हें यहीं नहीं रोका।
उन्होंने मेहनत जारी रखी और इसके बाद ग्राम विकास अधिकारी यवीडीओद्ध पद पर भी चयनित हुए।सुनील की सफलता का सबसे भावुक पहलू यह है कि जब वह अपनी पहली सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे, उस समय उनकी माता का निधन हो गया था।
परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन पिता महेंद्र छींपा और बहन सुमन ने उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने सुनील को समझाया कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए मेहनत जारी रखनी होगी।
परिवार के इसी सहयोग और सुनील के आत्मविश्वास ने उन्हें दोबारा मजबूती से खड़ा किया।इसके बाद सुनील छींपा ने अपनी मेहनत और लगन से लगातार सफलता हासिल की।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित पुस्तकालय ग्रेड-3 भर्ती परीक्षा में उनका चयन हुआ। इस परीक्षा में उन्होंने राजस्थान स्तर पर 50वीं रैंक हासिल की, वहीं हनुमानगढ़ जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
चयन के बाद उन्हें शिक्षा विभाग में हनुमानगढ़ जिले में नियुक्ति मिली है।इस तरह सुनील छींपा ने राजस्थान पुलिस कांस्टेबल, ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) और अब पुस्तकालय ग्रेड-3 के रूप में लगातार तीन सरकारी सेवाओं में चयन का गौरव हासिल किया है।
यह उपलब्धि उनकी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास का प्रमाण है।शादी के बाद भी सुनील छींपा के सफलता के सफर में उनकी धर्मपत्नी भावना छींपा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
भावना छींपा स्वयं अध्यापिका हैं और उन्होंने हमेशा सुनील का हौसला बढ़ाया। उन्होंने सुनील को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और कहा कि उनके अंदर बहुत प्रतिभा है, इसलिए लक्ष्य बड़ा रखें और निरंतर तैयारी करते रहें।
पत्नी के इस सकारात्मक सहयोग और प्रोत्साहन से सुनील का आत्मविश्वास और मजबूत हुआ तथा उन्होंने आगे बढ़ने के अपने संकल्प को और दृढ़ किया।सुनील का कहना है कि सफलता के लिए धैर्य, अनुशासन और निरंतर प्रयास सबसे जरूरी हैं।
अब उनका लक्ष्य आगे बढ़ते हुए कॉलेज लेक्चरर बनने की तैयारी करना है।
वे चाहते हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाएं।आज के प्रतिस्पर्धी दौर में जहां एक सरकारी नौकरी हासिल करना भी बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, वहीं सुनील छींपा का लगातार तीन सरकारी सेवाओं में चयन होना युवाओं के लिए प्रेरणा है।
उनकी कहानी यह संदेश देती है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो सफलता जरूर मिलती है।सुनील छींपा की इस उपलब्धि पर परिवार, रिश्तेदारों, मित्रों और डाबड़ी गांव सहित पूरे क्षेत्र के लोगों ने खुशी जताते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।