उदयपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि भारतीय संस्कृति और सनातन सभ्यता में हर बार गिरकर वापस खड़े होने की अद्भुत सामर्थ्य है।

इसी अदम्य अपराजित आत्मा और स्वाभिमान के बल पर भारत ने बीते दो हजार वर्षों के दौरान अनगिनत विदेशी आक्रमणों को सहने के बाद भी अपनी पहचान को अक्षुण्ण रखा है।वे शनिवार को यहां वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अंतर्गत संचालित प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ में चल रहे 10 दिवसीय ‘दिवेर विजय महोत्सव’ के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

प्रताप गौरव केन्द्र के कुंभा सभागार में आयोजित समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दिवेर केवल एक युद्ध या सैन्य घटना मात्र नहीं था, बल्कि यह सनातन की पुनर्प्रतिष्ठा का अमर उद्घोष और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के पराक्रमी पुनरुत्थान का ऐतिहासिक प्रतीक था।केंद्रीय मंत्री ने पूर्ववर्ती राजनीतिक कालखंड पर कहा कि आजादी के बाद के 60 वर्षों में भारत के स्वर्णिम इतिहास को साजिशन बेहद विकृत तरीके से पेश किया गया।

हल्दीघाटी से लेकर दिवेर की महाविजय तक, इतिहासकारों ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर महापुरुषों के पराक्रम को दरकिनार किया। जब किसी राष्ट्र की स्मृति को दूषित और स्वाभिमान को आहत किया जाता है, तो आने वाली पीढ़ियों का आत्मविश्वास डगमगा जाता है।

सत्य का स्मरण करना ही समाज और देश के आत्मविश्वास का पोषण करता है।शेखावत ने रेखांकित किया कि दिवेर युद्ध में मुगलों को परास्त करने के बाद वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने मेवाड़ में लंबे समय तक सुशासन स्थापित किया।

उन्होंने न केवल मातृभूमि को मुक्त कराया, बल्कि स्थापत्य, कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में अप्रतिम कार्य कर रामराज्य जैसी व्यवस्था दी।

उन्होंने आह्वान किया कि आज देश को अपने इतिहास को सिर्फ नए सिरे से लिखने की ही नहीं, बल्कि उसके सत्य को पुनः स्मरण करने की आवश्यकता है। दिवेर विजय जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली जड़ों और सनातनी परंपरा से जोड़ने का सार्थक प्रयास हैं।

यदि आत्मा अपराजित है, मन स्वतंत्र है और स्वाभिमान जीवित है, तो कोई भी राष्ट्र फिर से उठ खड़ा होता है।साजिशन दबाया गया हल्दीघाटी-दिवेर का गौरवशाली इतिहास — उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा—अति विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि महाराणा प्रताप अखंड भारत और स्वाभिमान के अमर प्रतीक हैं।

अफसोस की बात है कि आजादी के बाद हल्दीघाटी और मेवाड़ के इस महान इतिहास को या तो बंद कर दिया गया या फिर साजिशन गायब कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद ही देश को अपने वास्तविक इतिहास, सांस्कृतिक जड़ों और महापुरुषों का गौरव वापस हासिल हुआ है।

प्रधानमंत्री मोदी का अटूट विश्वास है कि जो राष्ट्र अपने इतिहास और अपनी जड़ों को भूल जाता है, वह कभी एक मजबूत और महान राष्ट्र नहीं बन सकता।उन्होंने कहा कि जब देश पर मुगलों का आक्रमण हो रहा था और कई राजा-महाराजा आत्मसमर्पण कर रहे थे, उस कठिन दौर में भी वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने अपनी मातृभूमि के स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया।

हल्दीघाटी का युद्ध और उनका त्याग हर राष्ट्रभक्त के लिए सदा आदर्श रहेगा।

उन्होंने कहा कि आज केंद्र और राज्य सरकार मिलकर हमारे महान योद्धाओं की गाथाओं को फिर से उजागर कर नई पीढ़ी तक पहुंचा रही हैं, ताकि देश का हर नागरिक अपनी ऐतिहासिक जड़ों से जुड़कर गौरवान्वित महसूस कर सके।दिवेर हिरण्यकश्यप और रावण वध जैसी युगांतरकारी विजय — प्रो. शर्मा—समारोह में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि मेवाड़ की दिवेर विजय केवल एक सामान्य सैन्य जीत नहीं, बल्कि हिरण्यकश्यप और रावण वध जैसी ही एक युगांतरकारी विजय थी।

उन्होंने रेखांकित किया कि बप्पा रावल से लेकर 1326 में राणा हमीर की चित्तौड़ विजय तक मेवाड़ का इतिहास निरंतर पराक्रम और विजय गाथाओं से भरा रहा है।

प्रो. शर्मा ने आह्वान किया कि हमें इस स्वर्णिम इतिहास से प्रेरणा लेकर देश की एकता को खंडित करने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारतीय इतिहास के जिन गौरवमयी अध्यायों को अब तक शामिल नहीं किया गया है, उन्हें पाठ्यक्रम और इतिहास में तुरंत स्थान मिलना चाहिए।गूंजा 'दिवेर का रणघोष'—प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि समारोह की अध्यक्षता सिक्योर मीटर्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं न्यासी ‘धरोहर’ संजय सिंघल ने की।

उन्होंने ऐसे आयोजनों को नई पीढ़ी में मातृभूमि के स्वाभिमान को स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। आरंभ में नुक्कड़ नाटक 'दिवेर का रणघोष' का मंचन भी किया गया।

नुक्कड़ नाटक का निर्देशन अमित श्रीमाली एवं अमित व्यास द्वारा किया गया, जिसमें मीमांसा परसाई, रंजन कुमार साहनी, जलम भारद्वाज, मानवी औदिच्य, नीलू अहारी, अर्चना साहनी, अंजना सुथार, हंसा मीणा, निशा बंजारा और दर्शिका ने बतौर कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दीं।

इनका भी सम्मान किया गया।कला प्रदर्शनी का उद्घाटन—महोत्सव के संयोजक रमन सूद ने बताया कि अपराह्न चार बजे अतिथियों द्वारा पद्मिनी सभागार में कला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।

इस प्रदर्शनी में दिवेर विजय महोत्सव के दौरान आयोजित राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला में जाने—माने हस्ताक्षरों द्वारा बनाए गए चित्रों को सजाया गया है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. देवेंद्र श्रीमाली व डॉ. रेखा महात्मा ने किया।विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता पुरस्कृत—सहसंयोजक डॉ. देवेन्द्र श्रीमाली ने बताया कि समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।

शनिवार को दोपहर में राज्य स्तरीय भाषण प्रतियोगिता भी सम्पन्न हुई।

भाषण प्रतियोगिता में भीलवाड़ा के युवराज सिंह राठौड़ ने प्रथम, जयपुर की रिफा उरुज ने द्वितीय तथा बीकानेर की संजू कंवर रावलोत ने तृतीय स्थान प्राप्त किया, वहीं बाड़मेर की प्रियंका व सिरोही के महिपाल सिंह को सांत्वना पुरस्कार मिला।निबंध प्रतियोगिता के महाविद्यालय स्तर में प्रीतम सेवक प्रथम, अजय नागदा द्वितीय और दीक्षिता कुंवर तृतीय स्थान पर रहे, जबकि नैना वाधवानी व शिव प्रकाश वर्मा को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।

विद्यालय स्तर में चेतना कुंवर ने प्रथम, खुशबू कुंवर ने द्वितीय और शोभा भोई ने तृतीय स्थान हासिल किया, वहीं दिव्या सनाढ्य व खुशी कुमारी सेन को सांत्वना पुरस्कार मिला।

इसी प्रतियोगिता की मुक्त श्रेणी में विशाल पालीवाल प्रथम, चतुर्भुज गायरी द्वितीय, सीमा कुमारी तृतीय, पिंकी गायरी चतुर्थ और मुकेश तेली पंचम स्थान पर श्रेष्ठ प्रतिभागी रहे।सह संयोजक हरीश राजानी ने बताया कि रील मेकिंग प्रतियोगिता में यशिता जैन ने प्रथम, आकांक्षा जैन ने द्वितीय और निर्मल नागदा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया, जबकि राजकुमारी सुथार व अजय नागदा को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।

पोस्टर प्रतियोगिता में हर्षा सोनी प्रथम, अविनाश पाटीदार द्वितीय और कृष गुनपाल तृतीय स्थान पर रहे, वहीं निधि भोई तथा कैलाश पालीवाल को सांत्वना पुरस्कार मिला।इसी तरह, फोटोग्राफी प्रतियोगिता (मोबाइल श्रेणी) में दिव्यांगना राणावत ने प्रथम, योवन्तराज माहेश्वरी ने द्वितीय और रिमझिम शर्मा ने तृतीय स्थान हासिल किया, जबकि लक्षित लोहार, अजय नागदा व विशाल सिंह शक्तावत को सांत्वना पुरस्कार मिला।

इसी प्रतियोगिता की कैमरा श्रेणी में डॉ. सी.पी. जैन द्वितीय स्थान पर रहे।चित्रकला प्रतियोगिता के महाविद्यालय स्तर में हर्षिता प्रजापत, जागृति पटेल, अजय लोहार, तारिका माली और ललित रेगर श्रेष्ठ प्रतिभागी चुने गए, वहीं अंजली शेखावत व पायल मेघवाल को सांत्वना पुरस्कार मिला।

इसी प्रतियोगिता के विद्यालय स्तर में आराध्य सिंह राठौड़, जिया परमार, आकांक्षा रागी, मोनिल औदिच्य और कृष्टि चौहान श्रेष्ठ प्रतिभागी रहे, जबकि वैष्णवी साहू व पवन मीणा को सांत्वना पुरस्कार मिला।