GMCH STORIES

भारत का लोकतंत्र संपूर्ण विश्व के लिए एक मार्गदर्शक है: लोकसभाध्यक्ष  ओम बिरला

( Read 1196 Times)

29 May 26
Share |
Print This Page
भारत का लोकतंत्र संपूर्ण विश्व के लिए एक मार्गदर्शक है: लोकसभाध्यक्ष  ओम बिरला

​नई दिल्ली,  लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत का लोकतंत्र संपूर्ण विश्व के लिए एक मार्गदर्शक का कार्य करता है। यह अपने संवाद, सहभागिता और संवैधानिक मूल्यों की समृद्ध परंपराओं के माध्यम से वैश्विक स्तर पर राष्ट्रों को प्रेरित कर रहा है।

 नई दिल्ली में  गुरुवार को दिल्ली विधान सभा के ऐतिहासिक कक्ष में केंद्रीय विधान सभा (1924-1930) की कार्यवाही के 89 खंडों के विमोचन और त्रैमासिक पत्रिका 'विधान-चेतना' के प्रथम अंक के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित गरिमामयी सभा को संबोधित करते हुए बिरला ने इस बात पर विशेष बल दिया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की वास्तविक शक्ति जागरूक संवाद, तथ्य-परक चर्चा और सक्रिय जनभागीदारी में निहित है। उन्होंने आगे कहा कि भावी पीढ़ियों में लोकतांत्रिक चेतना को सुदृढ़ करने के लिए भारत की संसदीय विरासत का संरक्षण और गहन अध्ययन अत्यंत आवश्यक है।

​लोक सभा अध्यक्ष ने आगे कहा कि दिल्ली विधान सभा का यह ऐतिहासिक भवन भारत की लोकतांत्रिक चेतना, संसदीय परंपराओं और हमारे स्वतंत्रता संग्राम का एक जीवंत प्रतीक तथा गौरवशाली विरासत है। इस परिसर के ऐतिहासिक महत्व को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि इस भवन ने भारत के संसदीय लोकतंत्र के प्रारंभिक कालखंड को देखा है। यह एक ऐसा ऐतिहासिक मंच रहा है, जहां देश के स्वतंत्रता सेनानियों और महान राष्ट्रीय नेताओं ने प्रतिनिधित्व, नागरिक अधिकारों और स्वशासन के लिए अपनी मुखर संवैधानिक मांगें उठाई थीं।

​केंद्रीय विधान सभा के प्रथम भारतीय अध्यक्ष  विट्ठलभाई पटेल के अतुलनीय योगदान का स्मरण करते हुए श्री बिरला ने कहा कि उन्होंने संसदीय शिष्टाचार, निष्पक्षता और अध्यक्ष पद (आसंदी) की गरिमा की एक सुदृढ़ नींव रखी थी। औपनिवेशिक शासन के अत्यंत कठिन समय और भारी दबाव के बावजूद,  पटेल ने इस विधायी संस्था की स्वायत्तता और प्रतिष्ठा को अक्षुण्ण रखा। उनका यह योगदान देश भर के पीठासीन अधिकारियों और विधि निर्माताओं को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

​लोक सभा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि केवल तर्क, गंभीरता और तथ्यों पर आधारित चर्चा ही लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को सुरक्षित रख सकती है और सार्वजनिक विश्वास को सुदृढ़ कर सकती है। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक संस्कृति का मूल आधार सदैव चर्चा, आम सहमति और गहन विचार-विमर्श रहा है। अतः संसद और राज्यों की विधान सभाओं को सदैव देश की जनता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने वाला सर्वोच्च मंच बने रहना चाहिए।

​शासन-प्रशासन और विधायी कामकाज में आधुनिक तकनीक की भूमिका को रेखांकित करते हुए श्री बिरला ने कहा कि डिजिटलीकरण (Digitization), ई-विधानसभा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी उभरती हुई तकनीकें नीति-निर्माण और विधायी शोध को अधिक पारदर्शी, कुशल और सर्व-सुलभ बना रही हैं।

​इस ऐतिहासिक अवसर पर लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने औपचारिक रूप से 'विधान-चेतना' पत्रिका के प्रथम अंक के साथ केंद्रीय विधान सभा की कार्यवाही के 89 खंडों का विमोचन किया। केंद्रीय विधान सभा की कार्यवाही के प्रकाशन को एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए श्री बिरला ने आशा व्यक्त की कि यह संकलन आने वाली पीढ़ियों के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय मर्यादाओं के एक मार्गदर्शक प्रकाश-स्तंभ के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने सराहना करते हुए कहा कि दिल्ली विधान सभा ने इन दुर्लभ बहसों और ऐतिहासिक कार्यवाहियों का व्यवस्थित प्रकाशन करके भारत के विधायी इतिहास को सहेजने की दिशा में एक बहुत महत्वपूर्ण शून्यता को भरा है।

 

 त्रैमासिक प्रकाशन *विधान-चेतना* की सराहना करते हुए  बिरला ने इसे एक अत्यंत महत्वपूर्ण बौद्धिक प्रयास बताया, जो संसदीय अध्ययनों, विधायी शोध और लोकतांत्रिक जागरूकता को और अधिक सशक्त करेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से न केवल जनप्रतिनिधियों की बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि यह लोकतांत्रिक विमर्श और नागरिक चेतना को भी एक नई दिशा प्रदान करेगा।​उन्होंने आशा व्यक्त की कि शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सुविधा के लिए इस ऐतिहासिक कार्यवाही तथा 'विधान-चेतना' पत्रिका, दोनों को डिजिटल प्रारूप (Digital Format) में भी व्यापक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने भारत की समृद्ध संसदीय विरासत को संरक्षित करने और लोकतांत्रिक चेतना में नई ऊर्जा का संचार करने की इस ऐतिहासिक पहल के लिए दिल्ली विधान सभा की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

 

​इस गरिमामयी कार्यक्रम में केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रीजीजू, दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता,  दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री श्री परवेश साहिब सिंह और दिल्ली विधान सभा के उपाध्यक्ष श्री मोहन सिंह बिष्ट भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

 


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like