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विज्ञान और अध्यात्म के संगम से होगा ब्रेन ऑप्टिमाइजेशन,

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05 Jul 26
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विज्ञान और अध्यात्म के संगम से होगा ब्रेन ऑप्टिमाइजेशन,

उदयपुर,कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और आधुनिक तकनीक के इस दौर में जहाँ इंसान मानसिक तनाव, डिप्रेशन और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से जूझ रहा है, वहीं भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक न्यूरोसाइंस के अनूठे मिलन ने देश को एक नया विज़न दिया है। माउंट आबू स्थित ब्रह्माकुमारीज के शांति और आध्यात्म के केंद्र, ज्ञान सरोवर परिसर में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान भारत सरकार के माननीय केंद्रीय कानून और संसदीय कार्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के द्वारा इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अतुलाभ वाजपेयी की बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘वाज‘ (द फ्यूचर ऑफ प्रिसिजन हेल्थ एंड ब्रेन ऑप्टिमाइजेशन) का विमोचन किया गया।





पुस्तक का विमोचन मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और कंट्रोलर डॉ. राहुल जैन एवं बीके संगठन के कार्यकारी प्रमुख मृत्युंजय भाई ने किया। पुस्तक विमोचन के दौरान सरकार के वरिष्ठ नीति-निर्माताओं, प्रख्यात न्यूरोसाइंटिस्ट्स, चिकित्सा विशेषज्ञों, संतों और प्रबुद्ध समाजसेवियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। पुस्तक के लेखक डॉ. अतुलाभ वाजपेयी ने प्रयोगशाला से अस्पताल और अस्पताल से मानव मस्तिष्क तक के अपने गहरे शोध को इस पुस्तक के माध्यम से दुनिया के सामने रखा है।
पुस्तक का विमोचन करते हुए मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने डॉ. अतुलाभ वाजपेयी के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है। भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन दर्शन और आधुनिक विज्ञान का यह समागम पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से ही मन के नियंत्रण और आत्मिक शुद्धि का वैश्विक केंद्र रहा है और यह पुस्तक उस प्राचीन धरोहर को वैज्ञानिक प्रामाणिकता के साथ वैश्विक पटल पर रखती है।

इस अवसर पर पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अतुलाभ वाजपेयी ने कहा कि आज हमारे पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसी महाशक्तियाँ हैं, लेकिन दूसरी तरफ तनाव, स्ट्रोक, डिमेंशिया, पार्किंसंस और एंग्जायटी जैसी बीमारियाँ महामारी की तरह बढ़ रही हैं। हमारे पास पावर तो है, लेकिन पीस (शांति) गायब होती जा रही है। हमने अपना आईक्यू तो बढ़ा लिया, लेकिन एसक्यू -(स्पिरिचुअल कोशेंट) को पीछे छोड़ दिया।
उन्होंने भारत की प्रसिद्ध संस्था ब्रह्माकुमारीज़ और उनके सेवा कार्यों सहित मृत्युंजय भाई के जीवन से मिली प्रेरणा का विशेष उल्लेख किया। डॉ.वाजपेयी ने ने बताया कि अस्पताल में न्यूरोप्लास्टिसिटी और अध्यात्म में मेडिटेशन (ध्यान) को देखकर उनके मन में यह विचार आया कि यदि इन दोनों को मिला दिया जाए, तो मानव मस्तिष्क को उसकी सर्वोच्च क्षमता तक पहुँचाया जा सकता है।

क्या है ‘वाज‘ मॉडल?

डॉ.वाजपेयी ने कहा कि हम भारतीय मोबाइल का नया सॉफ्टवेयर अपडेट आते ही तुरंत इंस्टॉल कर लेते हैं, लेकिन दुनिया के सबसे जटिल सुपरकंप्यूटर यानी अपने ब्रेन का अपडेट वर्षों तक पेंडिंग छोड़ देते हैं। श्वाजश् असल में मानव मस्तिष्क के लिए एक दैनिक सॉफ्टवेयर अपडेट की तरह है।
उन्होंने बताया कि हमारे मस्तिष्क में 100 से 500 ट्रिलियन सिनैप्स होते हैं जो हर दिन हमारे विचारों और आदतों से बदलते हैं, जिसे न्यूरोसाइंस में न्यूरोप्लास्टिसिटी कहा जाता है। ‘वाज‘ इसी न्यूरोप्लास्टिसिटी को एक्टिव करने का एक वैज्ञानिक मॉडल है, जो चार मुख्य स्तंभों वायु, आसन, आहार एवं जप पर आधारित है।

यह पुस्तक योग के प्राचीन और शाश्वत ज्ञान को आधुनिक न्यूरोसाइंस (मस्तिष्क विज्ञान) के साथ जोड़कर एक अनूठा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। पुस्तक में इस बात पर गहराई से चर्चा की गई है कि कैसे योग के माध्यम से मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर (ब्रेन ऑप्टिमाइजेशन) किया जा सकता है, जो समग्र स्वास्थय (होलिस्टिक हेल्थ) और एक सुखी जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान भागदौड़ भरी जिंदगी और बढ़ते मानसिक तनाव के बीच यह पुस्तक पाठकों के लिए एक बहुमूल्य मार्गदर्शिका साबित होगी।

 


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