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निष्कपट भक्ति से जागृत होते हैं चमत्कारी आध्यात्मिक अनुभव-सुप्रकाशमति माताजी

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29 Jun 26
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निष्कपट भक्ति से जागृत होते हैं चमत्कारी आध्यात्मिक अनुभव-सुप्रकाशमति माताजी


उदयपुर,ज्येष्ठ माह की पावन पूर्णिमा पर ध्यानोदय तीर्थ में आयोजित भव्य पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम बन गया। महोत्सव के दौरान 108 परिवारों के पुण्यार्जन से सम्पन्न सर्वऔषधि कलश अभिषेक के पश्चात भगवान के जिनबिम्ब पर दिव्य ‘ॐ ह्रीं स्वस्तिक’ का अंकन प्रकट हुआ। इस अलौकिक दृश्य के दर्शन कर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे तथा पूरे तीर्थ परिसर में भक्ति और जयघोष का वातावरण छा गया।
महोत्सव के अवसर पर अहमदाबाद (गुजरात) में विराजमान तीर्थ निर्मात्री राष्ट्रसंत गणिनी आर्यिका 105 श्री सुप्रकाश मति माताजी ऑनलाइन माध्यम से श्रद्धालुओं से जुड़ीं। अपने प्रेरणादायी संदेश में उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की निष्कपट भक्ति का ही प्रभाव है कि देव भी ऐसे दिव्य जिनबिम्बों की पूजा-अर्चना कर ‘ॐ ह्रीं स्वस्तिक’ का अंकन कर अपना पुण्य जागृत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ध्यानोदय तीर्थ पर विराजमान इच्छापूर्ण माँ ज्वालामालिनी देवी भी देवों के साथ इस दिव्य अतिशय में सहभागी हैं।
गुरु माँ ने श्रद्धालुओं से आह्वान करते हुए कहा कि जिनके जीवन में कष्ट, संकट अथवा रोग हैं, वे कम से कम एक पूर्णिमा पर पूर्ण श्रद्धा एवं निर्मल भाव से अभिषेक अवश्य करें। प्रभु भक्ति जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि धर्म में भाव परीक्षा का नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति का होना चाहिए।
महोत्सव में मूलनायक श्री शांतिनाथ प्रभु के पुण्य अर्जनकर्ता के रूप में जम्बूजी, आशाजी, धवल, पल्लवी एवं लक्ष्य कंठालिया परिवार को धर्मलाभ प्राप्त हुआ। वहीं चंद्रप्रभु भगवान की शांतिधारा का सौभाग्य कमल जैन एवं शशि जैन परिवार तथा पार्श्वनाथ भगवान की पूजा का लाभ इंदुजी एवं ओमप्रकाश गोदावत परिवार को मिला। रोडदा के लोकेश कुमार एवं ख्यालीलाल परिवार द्वारा सुखड़ी प्रसाद का वितरण भी किया गया।
इस अवसर पर अखिल भारतीय सुप्रकाश ज्योति मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीपक जैन (प्रतापगढ़), अरविंद पाड़लिया, विनोद कीकावत, आशा कंठालिया परिवार, अक्षय बाकलीवाल, श्रवण जैन, मनोज पाटनी, गणेश देवड़ा, प्रचार संयोजक विपिन जैन, विमल कंठालिया सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं। श्रद्धालुओं ने दिव्य अतिशय के दर्शन कर स्वयं को सौभाग्यशाली एवं धन्य महसूस किया। पूर्णिमा महोत्सव के दौरान पूरा ध्यानोदय तीर्थ भक्ति, श्रद्धा, जयघोष और आध्यात्मिक ऊर्जा से गूंज उठा तथा यह आयोजन उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बन गया।


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