बांसवाड़ा। कमला एकादशी के पावन अवसर पर बुधवार को श्री पीताम्बरा आश्रम में संत मावजी महाराज के भजनों की गूंज रही। इस अवसर पर मावजी महाराज परम्परा की 80 वर्षीया वयोवृद्ध भक्तिमती देवी गिरिजा माताजी ने आश्रम का अवलोकन किया और भजन-सत्संग के पश्चात आंवले का पौधा रोपा।
80 वर्षीया माताजी ने किया पौधारोपण
नटवरानन्दी वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से चलाए जा रहे ‘एक परिवार - एक पेड़’ अभियान के तहत यह एक प्रेरक अवसर था, जब आठ दशक की आयु पार कर चुकीं माव भक्त ने स्वेच्छा से आगे आकर ग्यारस के दिन अपने हाथों से आंवले का पौधा लगाया। उन्होंने उपस्थित लोगों को पौधों के सुरक्षित और संरक्षित पल्लवन (देखभाल) के गुर भी बताए।
सत्संग में साझा किए दिव्य अनुभव सत्संग के दौरान माताजी ने संत मावजी महाराज की परंपरा, पूर्ववर्ती पीठाधीश्वरों—देवानंदजी महाराज व कमलानंद जी महाराज—तथा बेणेश्वर महातीर्थ से जुड़े अपने दिव्य अनुभवों और संस्मरणों को साझा किया।
उनके द्वारा गाए गए मावजी महाराज के भजनों और वाणियों ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने आश्रम में संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी ली और व्यापक स्तर पर हो रहे पौधारोपण कार्य की सराहना करते हुए आश्रम की निरंतर प्रगति की कामना की।
आश्रम की ओर से हुआ अभिनंदन इस मौके पर श्री पीताम्बरा आश्रम की ओर से माताजी को उपरणा, शॉल, उपहार और प्रसाद भेंट कर उनका आत्मीय अभिनंदन किया गया।
उल्लेखनीय है कि देवी गिरिजा माताजी ने अपना संपूर्ण जीवन धर्म, अध्यात्म और भक्तिभाव को समर्पित कर रखा है। वे एक साध्वी की भांति एकांत जीवन व्यतीत करते हुए प्रभु भक्ति में लीन रहती हैं। वे प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में साधना करती हैं और दिन में केवल एक बार स्वयं के हाथों से पका हुआ सात्विक भोजन ही ग्रहण करती हैं।