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उदयपुर की पर्वतारोही बेटी मनस्वी अग्रवाल ने रचा इतिहास, माउंट एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा

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25 May 26
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उदयपुर की पर्वतारोही बेटी मनस्वी अग्रवाल ने रचा इतिहास, माउंट एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा

उदयपुर। अत्यंत कठिन और विषम परिस्थितियों के बावजूद उदयपुर की होनहार पर्वतारोही बेटी सुश्री मनस्वी अग्रवाल ने विश्व के सर्वाेच्च पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) पर भारतीय तिरंगा फहराकर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ मनस्वी राजस्थान की प्रथम सामान्य नागरिक श्रेणी की महिला बन गई हैं, जिन्होंने विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर सफल आरोहण किया है। इससे पूर्व राजस्थान की केवल भारतीय सेना, अर्द्धसैनिक बल एवं राजकीय संस्थाओं से जुड़ी तीन महिलाएं ही इस शिखर तक पहुंच सकी थीं।
मनस्वी अग्रवाल ने इससे पहले भी अनेक अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियानों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। वे अंटार्कटिका महाद्वीप के सर्वाेच्च शिखर “माउंट विन्सन मैसिफ” पर भारतीय ध्वज फहराने वाली राजस्थान की प्रथम महिला हैं। उल्लेखनीय है कि इस शिखर पर अब तक राजस्थान का कोई पुरुष पर्वतारोही भी सफल आरोहण नहीं कर पाया है।
इसके अतिरिक्त मनस्वी यूरोप महाद्वीप की सर्वाेच्च चोटी “माउंट एलब्रस”, अफ्रीका की सर्वाेच्च चोटी “किलीमंजारो” तथा दक्षिणी अमेरिका की सर्वाेच्च चोटी “माउंट अकोंकागुआ” पर भी तिरंगा फहरा चुकी हैं। इस प्रकार वे विश्व के सात महाद्वीपों में से पांच महाद्वीपों की सर्वाेच्च चोटियों पर भारतीय ध्वज फहराने वाली राजस्थान की प्रथम महिला बन गई हैं।
विशेष बात यह है कि मनस्वी अग्रवाल ने मात्र 9 माह की अल्प अवधि में इन पांच महाद्वीपों की सर्वाेच्च चोटियों पर सफल आरोहण कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अब उनका लक्ष्य आगामी एक वर्ष के भीतर शेष दो महाद्वीपों की सर्वाेच्च चोटियों को फतह कर प्रतिष्ठित “सेवन समिट्स” अभियान को पूर्ण करना है।
माउंट एवरेस्ट अभियान के लिए मनस्वी ने लगभग तीन माह तक घर लौटे बिना हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, लेह-लद्दाख एवं नेपाल के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कठोर एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। एवरेस्ट जैसे दुर्गम शिखर पर आरोहण के लिए अत्यधिक तकनीकी दक्षता, शारीरिक क्षमता एवं मानसिक स्थिरता की आवश्यकता होती है। शिखर क्षेत्र में तापमान माइनस 45 से 50 डिग्री तक पहुंच जाता है तथा 70 से 80 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने वाली बर्फीली हवाओं का सामना करना पड़ता है।
मनस्वी अग्रवाल ने यह उपलब्धि विश्व के लगभग 70 देशों के पर्वतारोहियों के साथ अभियान में भाग लेते हुए हासिल की है। पर्वतारोहण के क्षेत्र में उन्होंने माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट दिरांग एवं हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट से बेसिक एवं एडवांस प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। इन संस्थानों में लगभग एक माह तक 6500 मीटर से अधिक ऊंची बर्फीली चोटियों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। दोनों संस्थान भारतीय सेना द्वारा संचालित हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने स्वामी विवेकानंद रॉक क्लाइम्बिंग संस्थान से भी विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रमाणित प्रशिक्षक का दर्जा हासिल किया है।
शिक्षा और खेल के क्षेत्र में भी मनस्वी अग्रवाल निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से पांच वर्षीय विधि अध्ययन पूर्ण कर स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। पर्यावरणीय कानून विषय पर उन्होंने शोध पूर्ण कर लिया हैं तथा हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित सहायक आचार्य पात्रता परीक्षा में 99.2 पर्सेंटाइल के साथ सफलता प्राप्त की है। साथ ही वे स्थानीय प्रतिष्ठित सिंघानिया लॉ कॉलेज में सहायक आचार्य के रूप में अध्यापन कार्य भी कर रही हैं। मनस्वी 10 मीटर रेंज में राष्टीय स्तर की प्रख्यात निशानेबाज है और भारतीय दल में शामिल होने के चार चरण पूर्ण कर चुकी है।
मनस्वी अग्रवाल की यह ऐतिहासिक उपलब्धि न केवल उदयपुर और राजस्थान, बल्कि सम्पूर्ण देश के लिए गर्व का विषय है। उनकी सफलता युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए यह प्रेरणादायक संदेश है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और कठोर परिश्रम के बल पर विश्व की किसी भी ऊंचाई को हासिल किया जा सकता है।
हालांकि यह अभियान अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहा। मनस्वी के दल में कुल आठ सदस्य शामिल थे, जिनमें से विषम परिस्थितियों के कारण दो सदस्यों की मृत्यु हो गई तथा चार सदस्य शिखर तक नहीं पहुंच सके। मनस्वी और एक अन्य पर्वतारोही ने सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया, लेकिन वापसी के दौरान माइनस 50 डिग्री तापमान और तेज बर्फीली हवाओं के कारण वे अस्वस्थ गई। वर्तमान में काठमांडू के एक अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रही है। 


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