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राजाधिराज के रूप मे ठाकुर जी के दर्शन व जगननाथ स्वामी के 56 भोग की झांकी ने भक्तो को किया भाव विभोर

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05 Jul 26
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राजाधिराज के रूप मे ठाकुर जी के दर्शन व जगननाथ स्वामी के 56 भोग की झांकी ने भक्तो को किया भाव विभोर

निंबाहेड़ा | मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री शेषावतार कल्लाजी वेदपीठ के 21वें कल्याण महाकुंभ के पंचन दिवस रविवार को ठाकुर जी को धराए गए कल्याण नगरी के राजाधिराज के मनमोहक स्वरूप के साथ जगन्नाथ स्वामी को लगाए जाने वाले 56 भोग न्योछावर करने के बाद अनुपम झांकी ने भ्क्तो का मन मोह लिया। सतरंगी फूलो से सजी पेदपीठ भीनी भीनी महक से सुवासित हो रही थी वही ठाकुर जी की अनुपम झांकी और श्रृंगार को देखकर कई भक्त कहने लगे की ठाकुर जी के ठाठ तो वेदपीठ पर ही देखने को मिलते है।

नो उट और बेलगाडियो मे लाए छप्पन भोग की पुष्प वर्षा कर की गई अगवानी

भागवान जगन्नाथ को धराए जाने वाले छप्पन भोग की सभी तैयारिया कल्याण लोक स्थित कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय परिसर मे पुरी के पाक शास्त्रीयो द्वारा की गई थी जहां से बैण्ड बाजो की मधुर धुन, ढोल नंगाडो की गुंज और ठाकुर जी के जयकारे के साथ जब भोग नगर मे प्रवेश हुआ तो मार्ग के दोनो ओर नगर वासियो ने पुष्प वर्षा कर जय जगन्नाथ के उदघोष के साथ पहा प्रसाद का आत्मिक स्वागत किया। जब यह वाहन वेदपीठ परिसर मे पहुचे तो बडी संख्या मे या के यजमानो वीर विरांगनाओ और बटुको ने   जयघोष के साथ अगवसानी करते हुए मस्तक पर धारण कर मंदिर मे ठाकुर जी को न्योछावर किया। मिट्‌टी के पारंपरिक पात्रो मे लगाए गए भोग से एसी अनुभूती हुई मानो भक्त जगन्नाथ पुरी धाम के दर्शन कर स्वयं को धन्य कर रह हो।

51 कुंडीय श्री अतिरूद्रमहायज्ञ मे 500 युगलो ने दी आहुतियां

भागवान शिव को समर्पित महाकुंभ के दौरान नेनीशारण्य परिसर स्थित विशाल यज्ञ शाला के 51 कुंडो मे रविवार को लगभग 500 युगल यजमानो ने गो घृत्य व शाकल्य की आहुतिया देकर सर्वत्र खुशहाली व अच्छी वर्षा की कामना की। इस दौरान भानपुरा पीठ के शांकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने यज्ञ की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि यज्ञ के माध्यम से आहुतिया देकर ब्रम्हाण के सभीदेवी देवताओ को प्रसन्न कर अच्छी वर्षा और खुशहाली प्राप्त होती है। उन्होने कहा कि ठाकुर श्री कल्लाजी की कृपा से कल्शण नगरी ध्न्य है जहा प्रतिवर्ष 51 कुंडीय यज्ञ के माध्यम से देवो को प्रसन्न  करने का जतन किया जाता है। उन्होने अपने आशीर्वचन मे सभी के मंगल होने की कामना की। यज्ञ के विश्राम के बाद बडी संख्या मे यजमानो एवं श्रद्धालुओ ने यज्ञ परिसर की परिक्रमा कर स्वयं को धन्य किया।

भवाई नृत्य और मनभावन भजनो की प्रस्तुती ने भक्तो को किया आनंदित

कल्याण महाकुंभ के चतुर्थ दिवस शनिवार को ठाकुर जी की संध्या महाआरती के पश्चात कथा मंडपन के विशाल रंगमंच पर अंतराष्ट्रिय ख्याती प्राप्त भवय कलाकार लक्ष्मीनारायण रावल व उनके साथियों द्वारा अपने ही अंदाज मे गणेश वंदना के माध्यम से मुकेश रावल ने प्र्रथमेष पुज्य भगगवान गणेश का अवाहन करते हुए भाजन संध्या का शुभारंभ किया वही रघुवीर सेन ने अनुठी भव्य कला के माध्यम से भावाई नृत्य की मनभावन प्रस्तुती देकर भक्तो को भाव विभोर कर दिया इस दौरान हनुमान जी की सजीव झांकी के माध्यम से मंदरिया मे बाजे ढोल नंगाडा भजन क प्रस्तुती दी वही 24 गिलासो पर मटकी रख कर म्हारो हेलो सुनो जी भजन के साथ भव्य कलाकार लक्षमीनारायण रावल ने प्रस्तुती देर श्रोताओ की खुब तालिया बटारी इस दौरान कलाकारो ने ठाकुर श्री कल्लाजी की महीमा का मखान करते हुए अंकित रावल ने आपकी सेव से महारो काम होग्यो कल्लाजी की प्रस्तुती देकर वातावरण को कल्लामय बनाया वही रावल एवं साथियों ने वीर रस से ओतप्रोत भजाने की प्रस्तुतियों देकर वातारण को क्षत्रीय रंग मे रंग दिया। इस दौरान महिला कलाकारो ने अपने ही अंदाज मे प्रस्तुती देकर अपनी कलापारंगता का परिचय दिया।

गुरु ही साक्षात शिव का स्वरूप, उनकी आज्ञा का पालन ही ज्ञान और मोक्ष का मार्ग : शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ
21वें कल्याण महाकुंभ के अंतर्गत नेमीशारण्यम परिसर स्थित विश्वरूपम कथा मंडपम में भानपुरा पीठाधीश्वर शंकराचार्य परम पूज्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ महाराज के श्रीमुख से श्री लिंग महापुराण कथा का रसपान कराया जा रहा है। कथा के पंचम दिवस रविवार को शंकराचार्य ने गुरु महिमा, पंचाक्षरी मंत्र की साधना, जप-विनियोग तथा धर्माचरण के विविध पक्षों का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि श्री लिंग महापुराण के अनुसार शिव और गुरु में कोई भेद नहीं है। गुरु ही साक्षात शिव का स्वरूप हैं और शिव संबंधी दिव्य ज्ञान केवल गुरु की कृपा से ही प्राप्त होता है। शिष्य को मन, वचन और कर्म से सदैव गुरु की आज्ञा का पालन करना चाहिए। गुरु की प्रसन्नता से ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र सहित समस्त देवता प्रसन्न होते हैं। जबकि गुरु की अवहेलना से आयु, वैभव, पुण्य और सभी धार्मिक अनुष्ठानों का फल नष्ट हो जाता है। शंकराचार्य ने कहा कि सत्संग मनुष्य के जीवन को पवित्र बनाता है। जिस प्रकार अग्नि सोने को शुद्ध कर देती है उसी प्रकार गुरु की संगति से साधक के दोष और पाप नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि गुरु के गुणों का स्मरण करने से शिष्य के सद्गुणों में हजार गुना वृद्धि होती है। जबकि गुरु के अवगुणों की चर्चा करने से स्वयं के दोष बढ़ते हैं। उन्होने कथा में पंचाक्षरी मंत्र "नमः शिवाय" के जप की विधि, विनियोग और महत्व का भी वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि स्नान और संध्या के पश्चात नियमित रूप से मंत्र जप, अभिषेक और अनुष्ठान करने से आयु, आरोग्य, ज्ञान, वैभव और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होने बताया कि पर्वत, नदी तट, पीपल वृक्ष तथा तीर्थ स्थलों पर किया गया जप अनेक गुना अधिक फलदायी माना गया है। स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ महाराज ने पूजन सामग्री, हवन, ग्रहणकाल, गृहबाधा निवारण, रोग मुक्ति, भोजन संस्कार तथा प्रायश्चित की विधियों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक साधना शास्त्रसम्मत विधि और गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिवलिंग का श्रद्धापूर्वक पूजन, पंचाक्षरी मंत्र का नियमित जप और गुरु के प्रति अटूट निष्ठा ही साधक को आत्मबोध, आध्यात्मिक उन्नति और भगवान सदाशिव की कृपा का अधिकारी बनाता है। शुक्रववार संध्या वेला की कथा मे व्यासपीठ की आरती के दौरान सांसद सीपी जोशी, पुर्व केबिनेट मंत्री एवं विधायक श्री चंद कृपलानी, अशोक नवलखा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने महाआरती करते हुए शंकराचार्य स्वाती ज्ञानानंद तीर्थ से आशीर्वाद लिया इस दौरान सांसद जोशी ने कहा की वेदपीठ सनातन धर्म और गुरू परंपरा को पोषित करने के लिए निरंतर प्रयत्नशील है जिसके फल स्वरूप इस संस्थान के माध्यम से लुप्त होती वैदिक संस्कृति पुनर्जीवित होने और अग्रसर है मंच पर अतिथियों का वैदपीठ की ओर से तुलसी माला और उपरना ओढाकर स्वागत किया गया।

इंदौर के सुप्रसिद्ध भजन गायक रोहित भूषण मिश्रा की भजन संध्या आज
21वें कल्याण महाकुंभ के अंतर्गत आयोजित रात्रिकालीन भजन संध्या की श्रृंखला में सोमवार को एक शाम प्रभु श्री ठाकुर जी के नाम भजन संध्या का आयोजन होगा। इस अवसर पर इंदौर के सुप्रसिद्ध भजन गायक रोहित भूषण मिश्रा व उदयपुर की  त्रिशा सुथार अपनी मधुर एवं भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर करेंगे।
 


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