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स्विस किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने विद्यापीठ के एग्रीकल्चरल महाविद्यालय का किया भ्रमण

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21 Jan 26
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स्विस किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने विद्यापीठ के एग्रीकल्चरल महाविद्यालय का किया  भ्रमण

उदयपुर  / दक्षिणी राजस्थान में कृषि पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में राजस्थान विद्यापीठ ने पहल करते हुए स्विट्जरलैंड से आए 20 किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने विद्यापीठ के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज का शैक्षणिक एवं प्रायोगिक भ्रमण किया। कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने बताया कि यह भ्रमण विश्वविद्यालय की उस व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत विदेशी किसानों और विशेषज्ञों को भारतीय कृषि प्रणाली, अनुसंधान एवं विस्तार सेवाओं से जोड़ते हुए एग्री-टूरिज्म को प्रोत्साहित किया जा रहा है। भ्रमण के दौरान स्विस किसानों ने कृषि महाविद्यालय के विभिन्न विभागों, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, एग्रोनॉमी फार्म, फलोद्यानों तथा एकीकृत पशुधन उत्पादन इकाइयों का गहन अवलोकन किया।
इस शैक्षणिक भ्रमण का मुख्य उद्देश्य भारतीय कृषि, डेयरी फार्मिंग और स्थानीय ग्रामीण संस्कृति को निकट से समझना था। स्विस किसानों ने विशेष रूप से स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज द्वारा विस्तार सेवाओं के माध्यम से किसानों तक उन्नत कृषि तकनीक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की।
प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि जल्द एवं अधिक पैदावार लेेने के कारण रासायनिक खादों का भरपुर उपयोग किया जा रहा है जिसके कारण आमजन में नितनयी बिमारी हो रही है। हमें पुनः परम्परागत खेती की ओर लौटना होगा और आधुनिकता के साथ परम्परागत खेती का समावेश करना होगा। कई किसान परम्परागत खेती की बढती लागत और कम मुनाफे से परेशान होकर आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहे है और अपने खेतों में पॉली हाउस लगाकर सब्जियों की खेती कर रहे है जिससे उन्हे अच्छी आमदनी हो रही है।

प्रारंभ में अधिष्ठाता  प्रो. गजेन्द्र माथुर ने स्विस किसानों का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें विश्वविद्यालय की कृषि शिक्षा व अनुसंधान संबंधी दृष्टि से अवगत कराया। इसके पश्चात प्रो. इन्द्रजीत माथुर ने विश्वविद्यालय,  कृषि महाविद्यालय तथा इसके विभिन्न विभागों की संरचना, शैक्षणिक कार्यक्रमों और अनुसंधान गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

डॉ. सौरभ राठौड़ ने स्विस किसानों को कृषि फार्म का भ्रमण कराया और भारतीय कृषि पद्धतियों, फसल उत्पादन, डेयरी फार्मिंग तथा एकीकृत कृषि मॉडल से जुड़े उनके प्रश्नों का समाधान किया। भ्रमण के दौरान स्विस किसान विशेष रूप से कड़कनाथ (काली मांसाहारी) मुर्गी नस्ल को लेकर अत्यंत उत्सुक नजर आए। उन्होंने देशी पशुधन और कुक्कुट नस्लों के संरक्षण एवं प्रोत्साहन के लिए महाविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की।
 


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