उदयपुर। राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के नवीन शैक्षणिक सत्र को शोध, रोजगारोन्मुखी शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ नई दिशा देने की तैयारी की गई है। शनिवार को प्रतापनगर स्थित कुलपति सचिवालय सभागार में कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत की अध्यक्षता में आयोजित डीन एवं डायरेक्टर की बैठक में नवीन सत्र की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी संकाय सत्रारंभ के साथ ही शैक्षणिक कैलेंडर तैयार कर शिक्षण, शोध, परीक्षा, प्रायोगिक कार्य एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों का समयबद्ध संचालन सुनिश्चित करेंगे। साथ ही आगामी नैक विजिट की तैयारियों, शैक्षणिक गुणवत्ता, नवीन पाठ्यक्रमों के संचालन तथा शोध गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाने पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
कुलपति प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि नवीन सत्र में विश्वविद्यालय का विशेष जोर रिसर्च एवं रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों पर रहेगा, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 केवल पाठ्यक्रम परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा, नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता पर आधारित समग्र शिक्षा व्यवस्था का आधार है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत वर्ष 2035 तक सकल नामांकन अनुपात (ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो) 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी दिशा में राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय लगातार आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2012 में विश्वविद्यालय में 2,200 नियमित विद्यार्थी अध्ययनरत थे, जबकि वर्तमान में यह संख्या बढ़कर लगभग 11 हजार हो चुकी है। विश्वविद्यालय ने वर्ष 2035 तक 25 हजार विद्यार्थियों का लक्ष्य निर्धारित किया है।
बैठक में शोध गतिविधियों को सुदृढ़ करने, अंतर्विषयी अनुसंधान को बढ़ावा देने, शोध प्रकाशनों की गुणवत्ता में सुधार, पेटेंट, नवाचार तथा समाजोपयोगी शोध को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष बल दिया गया। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम, शोध एवं विभिन्न अकादमिक गतिविधियों से जोड़ते हुए विद्यार्थियों में नैतिक मूल्य, सामाजिक उत्तरदायित्व और वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में प्रभावी पहल करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में रजिस्ट्रार डॉ. तरुण श्रीमाली, परीक्षा नियंत्रक प्रो. पारस जैन, नेक कोर्डिनेटर प्रो. युवराज सिंह राठौड़, प्रो. मंजु मांडोत, प्रो. आईजे माथुर, प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. नीरू राठौड़, प्रो. अवनीश नागर, प्रो. हेमेन्द्र चौधरी, प्रो. सुनीता मुर्डिया, प्रो. सुनील चौधरी, प्रो. कला मुणेत, प्रो. अमिया गोस्वामी, डॉ. एसबी नागर, डॉ. सपना श्रीमाली, डॉ. कुल शेखर व्यास, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव, डॉ. मधु मुर्डिया, डॉ. गुणबाला आमेटा, डॉ. हेमंत साहु, प्रो. पीके उपाध्याय, डॉ. दिपेश वत्स, उदय भान सिंह, मोहसीन छीपा, डॉ. धिरेन्द्र सिसोदिया सहित डीन, डायरेक्टर, विभागाध्यक्षों ने भाग लिया।