उदयपुर। बीएन संस्थान में चल रहे विवाद और ऑडिट को लेकर उठे सवालों के बीच संस्थान के सचिव डॉ. महेंद्र सिंह आगरिया ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद निर्वाचित कार्यकारिणी पूरी तरह विधिवत कार्य कर रही है तथा संस्था को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. आगरिया ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्णय के बाद एडहॉक कमेटी अब संस्थान में नहीं बैठ रही है और आगे की प्रक्रिया न्यायालय के माध्यम से ही चलेगी। उन्होंने बताया कि संस्था का संचालन पहले भी नियमित रूप से किया जा रहा था, लेकिन विवादों से बचने के लिए वे कैंपस में कम आ रहे थे।
ऑडिट विवाद पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि संस्था का इनकम टैक्स ऑडिट और अकाउंटेंट जनरल (एजी) ऑडिट नियमित रूप से होता रहा है। उनके अनुसार यदि वित्तीय गड़बड़ी होती तो इतने वर्षों तक ऑडिट में मामला सामने आ जाता। उन्होंने कहा कि “फाइनेंस में कोई गड़बड़ी नहीं मिली, केवल कुछ प्रक्रियात्मक कमियों की बात कही गई थी, जिन्हें सुधारा जा सकता है।”
सदस्यता विवाद पर डॉ. आगरिया ने बताया कि संस्था में सदस्य बनाने की प्रक्रिया संविधान के अनुसार होती है। कार्यकारिणी द्वारा नाम प्रस्तावित किए जाते हैं और जनरल हाउस की स्वीकृति के बाद सदस्य बनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि 54 नए सदस्यों को सर्वसम्मति से सदस्य बनाया गया और किसी ने विरोध नहीं किया।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी समाज, सरनेम या परिवार के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। योग्य और संस्थान के विकास में योगदान देने वाले लोगों को ही सदस्य बनाया जाता है।
संस्थान में विद्यार्थियों की घटती संख्या पर उन्होंने कहा कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल कम थे, इसलिए छात्र उदयपुर आते थे, लेकिन अब हर गांव में स्कूल खुल जाने से संख्या प्रभावित हुई है। इसके बावजूद संस्थान लगातार नए प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि भविष्य में दो स्कूलों को सैनिक स्कूल में परिवर्तित करने की दिशा में कार्य चल रहा है, जिसका निरीक्षण भी हो चुका है।
डॉ. आगरिया ने कहा कि बीएन संस्थान 100 वर्ष पुरानी प्रतिष्ठित संस्था है और इसे विवादों से नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने सभी पक्षों से संस्था के हित में काम करने और शिक्षा के वातावरण को बेहतर बनाए रखने की अपील की।