राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की घोषणा के अनुसार पिछले दिसम्बर में जयपुर में प्रथम प्रवासी राजस्थानी दिवस का भव्य आयोजन किया गया। इसी कड़ी में अब नए वर्ष 2026 के आगमन के साथ ही राजस्थान आने वाले दिनों में एक नहीं कई अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेहमानी करने जा रहा है। इसमें राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट—2026, (4- 6 जनवरी),इंडिया स्टोन मार्ट 2026 (5–8 फरवरी 2026),ग्लोबल स्पाइस फेस्टिवल(13–14 फरवरी 2026) और ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट- 2026(सम्भवतः मार्च 2026 में) आदि प्रमुख है।
इन ग्लोबल कार्यक्रमों की शुरुआत हो गई है। रविवार को जयपुर में तीन दिवसीय राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट—2026 का शुभारंभ हुआ। राजस्थान के सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने इसका उद्घाटन किया। इस आयोजन में आगामी तीन दिनों में 100 से अधिक स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेशकों के समक्ष पिच करने का अवसर मिलेगा। साथ ही 35 विश्वविद्यालयों द्वारा एआई एवं तकनीकी क्षेत्र में नए विचारों पर मंथन किया जाएगा। उद्घाटन समारोह में सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग तथा 7 प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच एमओयू का हस्तांतरण भी किया गया है। इस मौके पर राजस्थान इनोवेशन हब के जोधपुर पोर्टल को लॉन्च किया गया। इस दौरान प्रदेश में आईस्टार्ट की प्रगति तथा एआई एवं प्रौद्योगिकी के विकास संबंधित लघु फिल्में भी प्रदर्शित की गई। इस अवसर पर टाई के सह-संस्थापक और निदेशक महावीर प्रताप शर्मा,टाई ग्लोबल के अध्यक्ष डॉ. मुरली बुक्कापटन,राजस्थान के उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त सुरेश ओला और सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग विभाग के आयुक्त हिमांशु गुप्ता के साथ ही विश्व भर से आए तकनीकी उद्यमी एवं विशेषज्ञ, अकादमिक हस्तियां, वक्ता, स्टार्टअप संस्थापक, निवेशक, विद्यार्थी एवं आमजन उपस्थित रहे।
डिजिटल भारत के सपने को साकार करने की दिशा में राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित यह राजस्थान डिजि-फेस्टिवल राज्य के लिए एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर बनकर उभरा है। यह महोत्सव केवल तकनीक के प्रदर्शन का मंच नहीं, बल्कि शासन, शिक्षा, उद्योग, स्टार्ट-अप और आम नागरिक के जीवन में डिजिटल बदलाव को गति देने वाला एक व्यापक अभियान है।डिजि -फेस्टिवल के माध्यम से राजस्थान ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह परंपरा के साथ-साथ प्रौद्योगिकी को अपनाकर विकास के नए आयाम स्थापित करना चाहता है।डिजि-फेस्टिवल का मूल उद्देश्य राज्य में डिजिटल साक्षरता, ई-गवर्नेंस और डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है। इसमें विभिन्न सरकारी विभागों, निजी कंपनियों, स्टार्ट-अप्स, शिक्षण संस्थानों और नवाचार कर्ताओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली है। महोत्सव के दौरान डिजिटल सेवाओं, ऐप्स, पोर्टल्स और अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया गया, जिससे आम नागरिकों को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि तकनीक उनके दैनिक जीवन को कैसे सरल और पारदर्शी बना सकती है। इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण ई-गवर्नेंस से जुड़ी पहलें है। इसमें राजस्थान सरकार द्वारा विकसित जन- कल्याणकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, जैसे ऑनलाइन सेवाएँ, डिजिटल प्रमाण-पत्र, ई-मित्र सेवाएँ और डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। इससे यह संदेश जा रहा है कि शासन अब कागज़ी प्रक्रियाओं से आगे बढ़कर डिजिटल, तेज़ और जवाबदेह बन रहा है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के नागरिकों को यह भरोसा मिला कि तकनीक उनके अधिकारों और सुविधाओं तक पहुँच को आसान बना रही है। डिजि-फेस्टिवल में स्टार्ट-अप्स और नवाचार को विशेष मंच दिया गया है। युवा उद्यमियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक, हेल्थटेक, एग्रीटेक और स्मार्ट सिटी समाधान जैसे क्षेत्रों में अपने नवाचार प्रस्तुत कर रहे है। इससे न केवल युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, बल्कि निवेशकों और उद्योग जगत का ध्यान भी राजस्थान की ओर आकर्षित हो रहा है। यह आयोजन प्रदेश को एक उभरते हुए डिजिटल इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में सार्थक कदम सिद्ध हो रहा है।
शिक्षा और कौशल विकास डिजि-फेस्टिवल के केंद्र बनाए गए है। डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म्स, ऑनलाइन कोर्सेस और स्किल-अपग्रेडेशन कार्यक्रमों की जानकारी युवाओं और छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। विशेषज्ञों के सत्रों और कार्यशालाओं में साइबर सुरक्षा, डेटा एनालिटिक्स और नई तकनीकों पर होने वाली चर्चा से प्रतिभागियों को डिजिटल दुनिया की चुनौतियों और अवसरों की समझ मिलेगी। महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास भी इस महोत्सव के महत्त्वपूर्ण आयाम है। इसमें महिलाओं को डिजिटल उद्यमिता, ऑनलाइन व्यापार और वित्तीय समावेशन से जोड़ने वाली पहलों को प्रदर्शित किया गया। इससे यह सन्देश जा रहा है कि डिजिटलीकरण केवल तकनीकी प्रगति नहीं है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी एक सशक्त माध्यम है। कुल मिलाकर, राजस्थान डिजि- फेस्टिवल से यह सिद्ध करने का प्रयास किया जा राज है कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से शासन, अर्थव्यवस्था और समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है। यह आयोजन प्रदेश के लिए एक प्रेरक मंच और परंपरा और आधुनिकता का संगम बन रहा है। डिजि-फेस्टिवल से राजस्थान को डिजिटल युग में अग्रणी बनाने की दिशा में नई ऊर्जा और दृष्टि मिलने वाली है। आने वाले समय में इस तरह के आयोजनों से प्रदेश न केवल तकनीकी रूप से सशक्त होगा,बल्कि आत्मनिर्भर और समावेशी विकास की ओर भी तेज़ी से अग्रसर होगा ऐसा विश्वास होगा।