कोटा। नेत्रदान, अंगदान एवं देहदान के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से निरंतर कार्यरत शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा संचालित अंगदान जागरूकता अभियान के अंतर्गत मंगलवार को 7 राज बटालियन एनसीसी (एयर विंग) के इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित सात दिवसीय वार्षिक प्रशिक्षण शिविर में 300 से अधिक एनसीसी कैडेट्स को, शुक्रवार को अंगदान के महत्व एवं प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में शाइन इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़ ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि अंगदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसी दूसरे व्यक्ति को नया जीवन देने का सबसे बड़ा मानवीय उपहार है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने परिवार, मित्रों और समाज में अंगदान को चर्चा का विषय बनाकर सही एवं वैज्ञानिक जानकारी लोगों तक पहुँचाएं, ताकि भ्रांतियाँ दूर हों और अधिक से अधिक लोग इस महादान के लिए प्रेरित हो सकें।
डॉ. गौड़ ने बताया कि किसी ब्रेन-डेड व्यक्ति के परिजन यदि सही समय पर अंगदान के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त करें, तो उनके द्वारा अंगदान की सहमति देने की संभावना काफी बढ़ जाती है। ऐसे एक निर्णय से कई गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सकता है।
उन्होंने बताया कि राजस्थान सरकार के राज्य ऊतक एवं अंग प्रत्यारोपण संस्थान (SOTTO Rajasthan) के सहयोग से प्रदेशभर में सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अब तक प्रदेश में 87 ब्रेन-डेड अंगदाताओं के माध्यम से 200 से अधिक गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल चुका है, जो अंगों के अभाव में जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे थे।
कार्यक्रम के दौरान कैडेट्स ने नेत्रदान एवं अंगदान से जुड़ी अनेक जिज्ञासाएँ और भ्रांतियाँ सामने रखीं जिनका संस्था की संस्थापिका डॉ संगीता गौड़ ने वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर विस्तार से समाधान किया। जागरूकता सत्र के बाद आयोजित प्रश्नोत्तरी में कैडेट्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अंगदान से संबंधित अधिकांश प्रश्नों के सही उत्तर देकर विषय की गहरी समझ का परिचय दिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी कैडेट्स ने अपने-अपने परिवार एवं समाज में अंगदान जागरूकता का संदेश पहुँचाने तथा अधिक से अधिक लोगों को इस जीवनदायी अभियान से जोड़ने का संकल्प लिया।