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नो बैग डे पर अब संभाग के स्कूलों में नेत्रदान-अंगदान की अलख जगाएगी,शाइन इंडिया फाउंडेशन

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04 Jul 26
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नो बैग डे पर अब संभाग के स्कूलों में नेत्रदान-अंगदान की अलख जगाएगी,शाइन इंडिया फाउंडेशन

कोटा। राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक शनिवार आयोजित किए जाने वाले 'नो बैग डे' के तहत अब कोटा संभाग के सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को नेत्रदान एवं अंगदान जैसे मानव सेवा के महाअभियान से भी जोड़ा जाएगा।

इस संबंध में संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा), कोटा संभाग ने आदेश जारी कर संभाग के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों एवं मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि,वे विद्यालयों में आयोजित होने वाले नो बैग डे एवं विशेष अवसरों के कार्यक्रमों में शाइन इंडिया फाउंडेशन के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर विद्यार्थियों के लिए जागरूकता वार्ताओं का आयोजन करवाएं।

आदेश में उल्लेख किया गया है कि,शाइन इंडिया फाउंडेशन पिछले कई वर्षों से कोटा संभाग में नेत्रदान एवं अंगदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है। संस्था द्वारा विद्यार्थियों को मानव सेवा, अंगदान एवं नेत्रदान के महत्व से परिचित कराने के लिए विद्यालय स्तर पर संवाद, प्रेरक व्याख्यान, शपथ, पोस्टर गतिविधियां एवं जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

संस्था सचिव डॉ संगीता गौड़ ने बताया कि,विद्यालय स्तर पर जागरूकता विकसित होने से बच्चों में सेवा, संवेदनशीलता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना मजबूत होगी। विद्यार्थी अपने परिवार, रिश्तेदारों एवं समाज को इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस पहल की शुरुआत, सहायक निदेशक आदित्य विजय के प्रयासों से हुई थी।

उन्होंने कहा कि आज के जागरूक विद्यार्थी ही भविष्य में अंगदान और नेत्रदान की संस्कृति को आगे बढ़ाएंगे। विद्यालयों में बचपन से ही इस विषय पर सकारात्मक सोच विकसित होने से समाज में अंगदान एवं नेत्रदान के प्रति फैली भ्रांतियां दूर होंगी और अधिक से अधिक लोग मृत्यु के बाद जीवनदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित होंगे।

शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यशालाओं में विद्यार्थियों को नेत्रदान, अंगदान, देहदान, रक्तदान, ब्रेन डेथ, अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया, कानूनी प्रावधान, मानवता के मूल्य तथा जीवन बचाने में दान की भूमिका के बारे में सरल एवं प्रेरणादायक जानकारी दी जाएगी।

संस्था ने संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा), कोटा संभाग का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि,यह पहल आने वाली पीढ़ी में "मृत्यु के बाद भी जीवन देने" की भावना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
 


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