कोटा। शनिवार को "नो बैग डे" के अवसर पर शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम ने राजस्थान सरकार के "अंगदान संजीवनी अभियान" के अंतर्गत कोटा से लगभग 180 किलोमीटर दूर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, गुराडिया कलाँ और पगारिया में अंगदान जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यशाला में दोनों विद्यालयों के कक्षा 8 से 12 तक के 800 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। टीम ने बच्चों को नेत्रदान, अंगदान और देहदान के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला की मुख्य वक्ता डॉ कुलवंत गौड़ ने बताया कि, बच्चों को बताया गया कि मृत्यु उपरांत एक व्यक्ति अपने अंगदान से 8 से 9 लोगों को नया जीवन दे सकता है। और इसी तरह से मृत्यु के बाद 6 घंटे के अंदर नेत्रों के दान से कॉर्निया की अंधता को भी दूर किया जा सकता है।
संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले 15 वर्षों में शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा 400 से अधिक राजकीय एवं निजी विद्यालयों में इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन किया जा चुका है।
गुराडिया कलाँ के प्रधानाचार्य जितेंद्र सिंह हाड़ा ने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि,
"अपने शहर से तेज बारिश और तूफान में इतनी दूर आकर बच्चों को अंगदान के बारे में जागरूक करना ही एक जुनून का कार्य है। यदि आज के युवा छात्र अंगदान के विषय को अच्छे से समझ लेते हैं तो भविष्य में वे अंगदान प्रेरक के रूप में अन्य लोगों को भी जागरूक कर सकेंगे।"
*पगारिया उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार ने भी संस्था को धन्यवाद देते हुए कहा कि, "आज के समय में अंगदान समाज की सबसे बड़ी जरूरत है। एक व्यक्ति के चले जाने के बाद भी उसके अंग कई जिंदगियां बचा सकते हैं। शाइन इंडिया फाउंडेशन इस महत्वपूर्ण विषय पर जिस समर्पण और लक्ष्य के साथ काम कर रही है, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। हम उम्मीद करते हैं कि ऐसे आयोजन लगातार होते रहें ताकि हर घर तक अंगदान का संदेश पहुंचे।"_
कार्यक्रम के अंत में सदस्य ने अंगदान से संबंधित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम आयोजित किया और सही जवाब देने वाले प्रतिभागियों को "शाइन मेडल" दिया।
विद्यालय स्टाफ और विद्यार्थियों ने संस्था के इस पुण्य कार्य की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों की मांग की।