GMCH STORIES

एमपीयूएटी में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई महाराणा प्रताप जयंती

( Read 567 Times)

17 Jun 26
Share |
Print This Page
एमपीयूएटी में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई महाराणा प्रताप जयंती

उदयपुर, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण निदेशालय द्वारा वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के उपलक्ष्य में दिनांक 17 जून 2026 को राजस्थान कृषि महाविद्यालय के प्रांगण में स्थित महाराणा प्रताप की भव्य अश्वारूढ़ प्रतिमा के समक्ष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह, विशिष्ट अतिथि डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह, कुलगुरु, कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर तथा श्री गजेन्द्र सिंह, सह-संगठन मंत्री, भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों, छात्र कल्याण अधिकारियों, महाविद्यालयों के अधिष्ठाताओं, अनेक प्राध्यापकों, अशैक्षणिक कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष, कार्यकारिणी सदस्यों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की। डॉ. मनोज महला, छात्र कल्याण अधिकारी ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि महाराणा प्रताप हमारे प्रेरणा स्रोत हैं तथा हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।

विशिष्ट अतिथि श्री गजेन्द्र सिंह, सह-संगठन मंत्री, भारतीय किसान संघ ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति के प्रेरणास्रोत महापुरुषों में महाराणा प्रताप स्वतंत्रता की अलख जगाने वाले महानायक हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति का विश्वपटल पर आज भी आधिपत्य कायम है, जो भारत के महापुरुषों के दृढ़ संकल्प का परिणाम है। उन्होंने संकल्प की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के युग में भी दृढ़ संकल्पित कार्यशैली से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। विशिष्ट अतिथि डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह, कुलगुरु, कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर ने अपने उद्बोधन में महाराणा प्रताप को एक शक्ति-पुंज बताया। उन्होंने प्रताप के कार्यों एवं जनसामान्य से उनके जुड़ाव को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिक बताते हुए विद्यार्थियों को उनके आदर्शों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया।

मुख्य अतिथि एवं विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक युग का मानव अनेक प्रकार की समस्याओं से जूझ रहा है। महाराणा प्रताप का जीवन आज भी उतना ही प्रासंगिक है, क्योंकि उन्होंने संघर्षपूर्ण एवं आदर्श जीवन जीकर वर्तमान जीवन की अनेक उलझनों और समस्याओं को सुलझाने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने महाराणा प्रताप को एक कुशल शासक एवं कुशल योद्धा बताया।

डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप का कृषि विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके काल में चक्रपाणि द्वारा रचित ‘विश्ववल्लभ’ ग्रंथ का उल्लेख करते हुए उन्होंने मेवाड़ की भौगोलिक, प्राकृतिक एवं जल प्रबंधन संरचनाओं की उपयोगिता पर प्रकाश डाला तथा कहा कि इस ग्रंथ के आधार पर आगे भी शोध की आवश्यकता है। कार्यक्रम के समापन पर राजस्थान कृषि महाविद्यालय (RCA) परिसर, उदयपुर में मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में एनसीसी एवं स्काउट के स्वयंसेवकों ने अतिथियों को महाराणा प्रताप की अश्वारूढ़ प्रतिमा तक स्कॉर्ट किया। छात्र कल्याण अधिकारी ने उपरणा ओढ़ाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्माननीय अतिथियों का स्वागत किया।

इस अवसर पर निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. आर.एल. सोनी, डॉ. लोकेश गुप्ता, डॉ. आर.एच. मीणा, डॉ. वीरेन्द्र सिंह, डॉ. विनोद यादव सहित विभिन्न विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय के अधिकारीगण, अनेक प्राध्यापक, अशैक्षणिक कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में डॉ. एस.एस. लाखावत ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया तथा कार्यक्रम का संचालन सुश्री श्रेया भट्ट ने किया।


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like