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गुरु पूर्णिमा पर गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण एवं मूल्यों पर हुआ विशेष आयोजन

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29 Jul 26
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गुरु पूर्णिमा पर गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण एवं मूल्यों पर हुआ विशेष आयोजन

 उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर के कॉलेज ऑफ डेयरी एवं फूड टेक्नोलॉजी में आज श्रद्धा, सम्मान एवं उत्साह के साथ गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

सहायक छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. कमलेश कुमार मीणा ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात डेयरी एवं फूड टेक्नोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. निकिता वाधवान ने स्वागत उद्बोधन एवं कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए भारतीय संस्कृति में गुरु के सर्वोच्च स्थान पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में डॉ. सिद्धार्थ मिश्रा ने मुख्य अतिथि एवं उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया तथा भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के गौरवशाली इतिहास, उसके सांस्कृतिक एवं नैतिक महत्व पर अत्यंत प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया।

मुख्य अतिथि डॉ. प्रताप सिंह ने अपने उद्बोधन में गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान का संचार ही नहीं करते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, संस्कारों के विकास एवं जीवन की सही दिशा प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने महाभारत के आचार्य द्रोणाचार्य के जीवन एवं शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए गुरु के आदर्श स्वरूप तथा शिष्य के कर्तव्यों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों के प्रति सम्मान, अनुशासन एवं समर्पण की भावना बनाए रखने का आह्वान किया।

इस अवसर पर विद्यार्थियों आयुष शर्मा, कृति सुंदर दास, किरण एवं पूजा ने गुरु महिमा पर प्रेरणादायक विचार, कविता एवं भाषण प्रस्तुत कर गुरुजनों के प्रति अपनी श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त की। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित सभी जनों को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम के अंत में सहायक छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. कमलेश कुमार मीणा ने सभी अतिथियों, आयोजकों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस अवसर पर  इंजीनियर कुसुम मेघवाल,  महाविद्यालय के संकाय सदस्य, अशैक्षणिक कर्मचारी तथा लगभग 150 विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन गुरुजनों के प्रति सम्मान एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ।


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