GMCH STORIES

अफ्रीकन घोंघा की समस्या के निवारण हेतु दिल्ली के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सर्वे

( Read 448 Times)

30 May 26
Share |
Print This Page

अफ्रीकन घोंघा की समस्या के निवारण हेतु दिल्ली के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सर्वे

उदयपुर ।  कृषि विभाग राजस्थान सरकार की अनुसंशा एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के महानिदेशक डाॅ. एम. एल. जाट के संज्ञान पर ग्राम बिछीवाड़ा तहसील फलासिया जिला उदयपुर में विगत 3 वर्षों से अफ्रीकन घोंघा की समस्या के सर्वेक्षण व मूल्यांकन हेतु विषय विशेषज्ञों की कमेटी द्वारा सर्वे किया गया। टीम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से दो वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. श्रवण हलधर एवं डॉ. शशांक एवं एमपीयूएटी के क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान डॉ. श्रीधर लखावत एवं डॉ हेमंत स्वामी व कृषि विभाग, राजस्थान सरकार के डॉ. कुलदीप सुथार, कृषि अनुसंधान अधिकारी (कीट) तथा गौरीशंकर, कृषि अधिकारी ने ग्राम बिछीवाड़ा का सर्वे किया। गांव के सभी किसान, महिलाएं एवं स्थानीय जन प्रतिनिधि एकत्रित होकर सर्वे दल को पिछले 3 वर्षों से अफ्रीकन घोंघे की समस्या से अवगत करवाया। सर्वे के दौरान गांव में विभिन्न स्थलों, नदी, खेत, घरों व गांवों की नालीयों में घोंघे की बडी संख्या में देखा गया लेकिन वर्तमान में यह अपनी सुषुप्तावस्था में पाया गया जो कि अमूमन बारिश के मौसम में ज्यादा सक्रीय रहता है इस सर्वे के आधार पर मानसून पर प्रथम वर्षा के साथ ही यह घोंघे सुषुप्त अवस्था अपने सक्रीय अवस्था में आ जाएगें और पूरे गांव व खेतों में फैल जाएगें। जैसा कि किसान भाइयों ने बताया विगत वर्ष गांव में इनकी संख्या इतनी अधिक हो गई थी कि रोड पर चल पाना व घरों में रह पाना भी मुश्किल हो रहा था और खेतों की सारी फैसले चैपट हो गई थी। सर्वे के दौरान देखा गया कि इस वर्ष भी यदि इसे नियंत्रण करने हेतु समय रहते उचित प्रबंधन के प्रयास नहीं किये गये तो यह समस्या गतवर्षों से अधिक विकराल रूप ले सकती है। जिससे किसानों की फसलों में भारी नुकसान होने की संभावना है।

सर्वे दल द्वारा गांव बिछीवाड़ा का सर्वे करने के पश्चात आज ही सर्वे दल द्वारा रिपोर्ट महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय व आईसीएआर को रिपोर्ट दे दी गई है एवं इस समस्या एवं विकराल रूप के बारे में निदेशक अनुसंधान को अवगत करा दिया गया हैं। डाॅ. आर. एल. सोनी, निदेशक अनुसंधान ने बताया कि इस सर्वे रिपोर्ट को जल्द आज ही राज्य सरकार व आईसीएआर, नई दिल्ली को भेज दी जाएगी और वहां से हमें जो भी आर्थिक सहायता व रसायन प्राप्त होंगे, उनके द्वारा इस क्षेत्र में अफ्रीकन घोंघा को खत्म करने का पूरा प्रयास किया जाएगा जिसमें कृषि विभाग, राजस्थान सरकार, केन्द्र सरकार, विश्वविद्यालय और गांव के लोगों का पूरा सहयोग लिया जाएगा।

साथ ही सर्वे में शामिल वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा आगामी दिनों में प्रभावित क्षेत्र के सभी किसानों को एक सामाजिक मिशन मोड में अफ्रीकन घोंघा के नियंत्रण की अनुसंशा की गयी है।
दिल्ली से पधारे वरिष्ठ कीट वैज्ञानिक डॉ. श्रवण हलधर एवं डॉक्टर शशांक ने बताया कि अफ्रीकन घोंघा के नियंत्रण हेतु पेस्टीसाइड रसायन मेटाएलडीहाईड 2.5 प्रतिशत को 5 से 8 किलोग्राम/हेक्टेयर की दर से एवं फेरीक फोस्फोट 2.94 प्रतिशत 7 किलोग्राम/हेक्टेयर की दर से व काॅपर सल्फेट 6 से 10 किलोग्राम/हेक्टयर व कैल्सियम आॅक्साइड (क्वीकलाइम) 5 ग्राम/वर्गमीटर की दर से प्रयोग किया जाना चाहिए। एमपीयूएटी के क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान डॉ. श्रीधर लखावत ने किसानों से अनुरोध किया कि वह बडे स्तर पर घोंघे के नियंत्रण के लिए कार्य करें। डॉ हेमंत स्वामी ने बताया कि मानसून वर्षा से पहले समय रहते घोंघे का नियंत्रण आवश्यक है नही तो भविष्य में यह समस्या अधिक बढ़ सकती है तथा इसके विकराल रूप का सामना करना पड सकता है एवं रासायनिक नियंत्रण के साथ ही नमी वाली जगह को साफ किया जाना आवश्यक है। डॉ. कुलदीप सुथार ने घोंघे के नियंत्रण हेतु किसानों को बताया कि वह खेत की मेडों व नालीयों में उगे खरपतवारों को हटाकर साफ-सफाई करें जिससे सुषुप्तावस्था में पडे घोंघो को नष्ट किया जा सकें तथा इसके प्रभावी नियंत्रण हेतु आसपास के क्षेत्रों को भी निगरानी सर्तक रहने सुझाव दिया गया। 


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like