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सूरतगढ़ के व्यापारियों, सुपर थर्मल पावर स्टेशन और वायुसेना स्टेशन कर्मियों का आवागमन हुआ और सुगम

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30 May 26
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सूरतगढ़ के व्यापारियों, सुपर थर्मल पावर स्टेशन और वायुसेना स्टेशन कर्मियों का आवागमन हुआ और सुगम

जयपुर। सूरतगढ़ राजस्थान का एक प्रमुख कृषि केंद्र है, जिसे राज्य का ‘‘कपास शहर’’ और ‘‘अनाज का कटोरा’’ के नाम से जाना जाता है। यहां भारी मात्रा में कपास और गेहूं का उत्पादन होता है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक बड़ा आधार है। यहां सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर स्टेशन स्थित है, जो राजस्थान का पहला सुपर थर्मल पावर प्लांट है। इसके अलावा, शहर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सूरतगढ़ वायुसेना स्टेशन भी है। ऐतिहासिक सूरतगढ़ किला इस क्षेत्र की विरासत की झलक प्रस्तुत करता है। यह राजस्थान के ग्रामीण जीवन का एक अनूठा और प्रामाणिक अनुभव भी प्रदान करता है।  
 उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन ने बताया कि अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत उत्तर पश्चिम रेलवे के सूरतगढ़ स्टेशन के लगभग 20.25 करोड़ की लागत से होने वाले पुनर्विकास कार्यों का प्रथम चरण पूर्ण कर लिया गया है। अमृत भारत  स्टेशन योजना के तहत इस स्टेशन के पुनर्विकसित होने से थर्मल पावर स्टेशन और वायुसेना स्टेशन कर्मियों और सामान्य यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, आवागमन सुगम होगा एवं व्यापारी वर्ग भी लाभान्वित होगा।
 स्टेशन भवन के समरूप में बड़े स्तर पर  सुधार कार्य, स्टेशन की ओर आने-जाने वाले मार्ग में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग प्रावधान का कार्य, बाउंड्री वॉल, सर्कुलेटिंग एरिया में सौंदर्य करण, दोपहियाए चौपहिया वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग सुविधा, बुकिंग ऑफिस रिटायरिंग रूम आदि में सुधार, नए टॉयलेट ब्लॉक्स का कार्य पूर्ण हो चुका है।
 उपरोक्त कार्याे के अलावा सौंदर्य वर्धन के लिए एलइडी लाइटिंग, तथा दीवारों पर आर्टवर्क भी किया गया है। स्टेशन का मुख्य प्रवेश द्वार अत्यन्त आकर्षक है, जिसकी छत पर स्थानीय कला एवं संस्कृति का समन्वय करते हुए कलाकारों द्वारा आकर्षक पेंटिंग की गई है। सूरतगढ़ स्टेशन पर परंपरा के साथ आधुनिक सुविधाओं के समन्वय का आभास होता है। इन सभी सुविधाओं का दिव्यांगजनों तक पहुंच बनाने के लिए उपयुक्त साइनेज भी लगाया गया है। इसके अलावा यात्री सूचना प्रणाली में सुधार हेतु कोच गाइडेंस डिस्प्ले बोर्ड, मल्टीलाइन डिस्पले बोर्ड्स, सिंगल लाइन डिस्प्ले बोर्ड, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, बड़े एलइडी स्क्रीन्स तथा जीपीएस आधारित डिजिटल क्लॉक भी लगाया गया है। स्टेशन पर 12 मीटर चौड़ा पैदल पुल भी बनाया जाएगा जिसकी अनुमानित लागत लगभग 9.96 करोड़ रुपए है। स्टेशन की प्रकाश व्यवस्था, सुगम, निर्बाध एवं निरंतर बनाए रखने तथा तकनीकी रेल कार्यों के संचालन हेतु हरित ऊर्जा उत्पादन हेतु लगभग 22 लाख रुपए की लागत से 50 किलोवाट का सोलर ऊर्जा प्लांट भी स्थापित किया गया है।
 स्टेशन के पुनर्विकास से स्थानीय कारीगर एवं मजदूरों को रोजगार मिला है जिससे उनकी आय बढ़ी है। स्टेशन के पुनर्विकसित होने से पर्यटन, स्थानीय हस्तशिल्प कला आदि को बढ़ावा मिलेगा जिससे क्षेत्र की लोकप्रियता बढ़ेगी एवं साथ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इस प्रकार स्टेशन के पुनर्विकास से क्षेत्र का आर्थिक और सामाजिक विकास भी होगा।


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