नई दिल्ली। वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के दौरान उत्तर रेलवे ने परिचालन दक्षता, राजस्व अर्जन, टिकट जांच तथा यात्री सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। इस अवधि में उत्तर रेलवे ने विभिन्न परिचालन पहलों के माध्यम से यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के साथ.साथ रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को भी पार करते हुए राजस्व में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की।
उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उत्तर रेलवे ने ‘‘ट्रेन्स ऑन डिमांड’’ योजना के अंतर्गत 1,887 विशेष ट्रेनों का सफल संचालन किया। इन विशेष ट्रेनों के माध्यम से भारतीय रेल के सभी प्रमुख दिशाओं में पीक सीजन की अतिरिक्त मांग का प्रभावी प्रबंधन किया गया, जिससे 185.52 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व अर्जित हुआ। यात्रियों को अधिक से अधिक आरक्षित सीटें उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रतीक्षा सूची की नियमित निगरानी करते हुए विभिन्न ट्रेनों में 4,120 अतिरिक्त कोच लगाए गए। इस पहल से न केवल यात्रियों को राहत मिली, बल्कि उत्तर रेलवे को 28.81 करोड़ रूपये का अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त हुआ।
श्री उपाध्याय ने बताया कि तत्काल आरक्षण प्रणाली के बेहतर उपयोग हेतु उत्तर रेलवे ने प्रीमियम तत्काल कोटा एवं तत्काल कोटा अनुकूलन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया। जून 2026 में चयनित 15 सप्ताहांत ट्रेनों की 133 यात्राओं में 18,531 प्रीमियम तत्काल बर्थों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया गया, जिससे 1.02 करोड़ रूपये का अतिरिक्त राजस्व अर्जित हुआ। इसके अतिरिक्त कम उपयोग में आने वाली 6,130 तत्काल बर्थों को सामान्य कोटा में परिवर्तित कर अधिक यात्रियों को लाभान्वित किया गया। यात्री सेवाओं के क्षेत्र में भी उत्तर रेलवे ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की। अप्रैल-जून 2026 के दौरान वंदे भारत ट्रेनों में 1,47,462 यात्रियों ने यात्रा की, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 80,394 थी। इस प्रकार यात्री संख्या में 83 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वंदे भारत ट्रेनों से प्राप्त आय 7.67 करोड़ रूपये से बढ़कर 13.21 करोड़ हो गई, जो 72 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।
समग्र यात्री एवं राजस्व प्रदर्शन में भी उत्तर रेलवे ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया। इस अवधि में प्रारंभिक यात्रियों की संख्या 11.43 करोड़ से बढ़कर 12.07 करोड़ हो गई, जो 5.6 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं प्रारंभिक यात्री आय 3,083,42 करोड़ से बढ़कर 3,567.59 करोड़ हो गईए जो 15.7 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। टिकट जांच अभियान के दौरान भी उत्तर रेलवे ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। अप्रैल-जून 2026 में 12.66 लाख अनियमित यात्रा के मामले दर्ज किए गए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 11.01 लाख थी। इस प्रकार मामलों में 14.99 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। टिकट जांच से प्राप्त राजस्व 72.60 करोड़ रूपये से बढ़कर 89.21 करोड़ रूपये हो गया, जो 22.88 प्रतिशत की वृद्धि है।
रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की तुलना में भी उत्तर रेलवे का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। टिकट जांच मामलों का लक्ष्य 10.84 लाख था, जबकि उपलब्धि 12.66 लाख रही, जो लक्ष्य से 1.82 लाख (16.79 प्रतिशत) अधिक है। इसी प्रकार टिकट जांच राजस्व का लक्ष्य 73.39 करोड़ रूपये था, जबकि वास्तविक उपलब्धि 89.21 करोड़ रूपये रही, जो लक्ष्य से 15.82 करोड़ रूपये (21.56 प्रतिशत) अधिक है। टिकट जांच प्रणाली की बढ़ी हुई दक्षता का प्रमाण यह भी है कि अप्रैल-जून 2025 में केवल 3 दिनों में दैनिक टिकट जांच आय 1 करोड़ रूपये से अधिक रही थी, जबकि अप्रैल-जून 2026 में ऐसे दिनों की संख्या बढ़कर 49 हो गई। अखिल भारतीय स्तर पर टिकट जांच से अर्जित राजस्व के आधार पर जोनल रैंकिंग में उत्तर रेलवे ने अप्रैल एवं मई 2026 में तीसरा स्थान प्राप्त किया, जबकि जून 2026 में पूरे भारतीय रेल में प्रथम स्थान हासिल कर उत्कृष्ट उपलब्धि दर्ज की।
इन उपलब्धियों के पीछे केंद्रित परिचालन रणनीति, संसाधनों का बेहतर उपयोग, सतत निगरानी, प्रभावी टिकट जांच व्यवस्था, क्षेत्रीय स्तर पर सुदृढ़ पर्यवेक्षण तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सामूहिक प्रतिबद्धता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उत्तर रेलवे भविष्य में भी यात्रियों को बेहतर सेवाएँ प्रदान करने, परिचालन उत्कृष्टता बनाए रखने तथा रेलवे के राजस्व में सतत वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए इसी समर्पण के साथ कार्य करता रहेगा।