श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय में आईसीपीआर के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय सेमिनार सम्पन्न, वैदिक ज्ञान परंपरा और योग के वैश्विक महत्व पर हुआ गहन मंथन*
निम्बाहेड़ा। श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय, जावदा, निम्बाहेड़ा (राजस्थान) एवं भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (आई सी पी आर), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के योग विभाग द्वारा "वर्तमान वैश्विक युद्ध परिस्थितियों में योग की प्रासंगिकता : दार्शनिक विमर्श, मानसिक स्वास्थ्य एवं वैश्विक शांति की संभावना" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आयोजन शुक्रवार, 31 जुलाई को विश्वविद्यालय सभागार में किया गया। देशभर के विद्वानों, शोधार्थियों एवं शिक्षाविदों की सहभागिता से आयोजित इस सेमिनार में योग, भारतीय दर्शन और विश्व शांति जैसे समसामयिक विषयों पर गंभीर एवं सार्थक चिंतन हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी श्री सुदर्शनाचार्य महाराज तथा अध्यक्षता विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन श्री कैलाशचंद्र मून्दड़ा ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्री कल्लाजी महाराज एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
कार्यक्रम के प्रारंभ में विश्वविद्यालय की संकायाध्यक्ष डॉ. स्मिता शर्मा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। विषय प्रवर्तन सेमिनार संयोजक डॉ. सौरभ जोशी ने किया और वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में योग की उपयोगिता एवं भारतीय दर्शन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय की छात्राओं लक्ष्मी एवं सरला ने मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत कर वातावरण को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा से ओतप्रोत कर दिया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन श्री कैलाशचंद्र मून्दड़ा द्वारा मुख्य अतिथि स्वामी सुदर्शनाचार्यजी महाराज का भगवान श्रीराम की दिव्य प्रतिमा एवं चित्तौड़ फाइल्स पुस्तक भेंट कर सम्मान किया गया।
विश्वविद्यालय के पीएच.डी. शोधार्थी मंगलाराम ने अपने शोधपत्र का प्रभावशाली वाचन किया। वहीं सारस्वत वक्ता के रूप में प्रो. ओमनारायण तिवारी (संकायाध्यक्ष, श्री गुरूरामराय विश्वविद्यालय, देहरादून) ऑनलाइन माध्यम से जुड़े और अपने व्याख्यान में कहा कि भारतीय दर्शन और योग केवल आध्यात्मिक साधना के विषय नहीं हैं, बल्कि वर्तमान विश्व की जटिल समस्याओं के समाधान का प्रभावी आधार भी हैं। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक समरसता एवं वैश्विक शांति की स्थापना में योग की निर्णायक भूमिका पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में स्वामी श्री सुदर्शनाचार्यजी महाराज ने कहा कि आज जब सम्पूर्ण विश्व हिंसा, तनाव, युद्ध और मानसिक असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, तब भारतीय योग दर्शन सम्पूर्ण मानवता के लिए आशा का प्रकाश बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की पद्धति नहीं, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा के समन्वय का दिव्य विज्ञान है, जो विश्व में शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना का मार्ग प्रशस्त करता है।
स्वामी ने विशेष रूप से श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय की वैदिक शिक्षा, भारतीय संस्कृति एवं सनातन ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन श्री कैलाशचंद्र मून्दड़ा की प्रशंसा करते हुए कहा कि मेवाड़-मालवा अंचल में वैदिक ज्ञान, भारतीय दर्शन और सनातन संस्कृति की अलख जगाने का जो महनीय कार्य वे कर रहे हैं, वह समाज और राष्ट्र के लिए अत्यंत प्रेरणास्पद है। ऐसे प्रयास भारतीय संस्कृति की जड़ों को और अधिक सुदृढ़ करेंगे तथा युवा पीढ़ी को अपनी गौरवशाली विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अध्यक्षीय उद्बोधन में चेयरपर्सन श्री कैलाशचंद्र मून्दड़ा ने कहा कि श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक संस्कृति, योग, आयुर्वेद और मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था का सशक्त निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व को यदि स्थायी शांति और संतुलित विकास की आवश्यकता है तो उसका मार्ग भारतीय दर्शन और योग से होकर ही गुजरता है। विश्वविद्यालय इसी उद्देश्य को लेकर निरंतर शोध, शिक्षण और जनजागरण के माध्यम से समाज को दिशा देने का कार्य कर रहा है। उन्होंने शोधार्थियों का आह्वान किया कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा पर गंभीर अनुसंधान कर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ।
सेमिनार के दौरान विभिन्न विद्वानों एवं शोधार्थियों द्वारा प्रस्तुत शोधपत्रों का वाचन किया गया, जिनमें योग, भारतीय दर्शन, मानसिक स्वास्थ्य, वैश्विक शांति एवं समकालीन चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। प्रस्तुत शोधपत्रों की विद्वानों ने सराहना करते हुए उन्हें शोध जगत के लिए उपयोगी बताया।
कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमामय संचालन डॉ. स्मिता शर्मा ने किया, जबकि अंत में डॉ. सौरभ जोशी ने सभी अतिथियों, शोधार्थियों एवं उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभावना से ओतप्रोत वन्दे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ।
इस अवसर पर सहायक आचार्य डॉ. सुनील कुमार शर्मा, डॉ. राहुल प्रसाद सती, डॉ. रचना शर्मा (सहायक परीक्षा नियंत्रक), डॉ.अभिषेक भण्डारी, डॉ.नटवर भाम्बी, आकाश टांक, मेघा मंत्री, कुसुम गुर्जर, नितिन गिल, हेमंत मेघवाल, देवेन्द्र जैन, अर्पित चौधरी सहित विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।