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पीआईएमएस उदयपुर में शोध पद्धति विषयक सीएमई का सफल आयोजन

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25 Jul 26
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पीआईएमएस उदयपुर में शोध पद्धति विषयक सीएमई का सफल आयोजन

पीजी रेजिडेंट्स एवं शोधार्थियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला में सैंपल साइज़, डेटा वर्गीकरण व शोध नैतिकता पर हुआ मंथन

उदयपुर।
 पैसिफिक इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस), उदयपुर के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग द्वारा शनिवार को “बेसिक्स इन रिसर्च मेथोडोलॉजी” विषय पर एक दिवसीय कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला पीजी रेजिडेंट्स एवं शोधार्थियों के लिए आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य युवा चिकित्सकों में वैज्ञानिक शोध पद्धति की समझ विकसित करना था।
कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष डॉ. सुरेश चंद्र गोयल (प्राचार्य एवं नियंत्रक, पीआईएमएस) रहे, जबकि आयोजन सचिव की भूमिका डॉ. दिलीप कुमार पारीक (विभागाध्यक्ष, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग) ने निभाई। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. वैभव चित्तोड़ा (सांख्यिकीविद् एवं सहायक आचार्य) रहे। डॉ. योगेश सिंघल और डॉ. अवंतिका गुप्ता ने व्याख्यान देकर सीएमई में मूल्यवान योगदान दिया है। साई तिरुपति विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रशांत नाहर की भी कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति रही। डॉ. सरिता कांत, चिकित्सा अधीक्षक, ने अपनी उपस्थिति से अवसर को गौरव प्रदान किया। सीएमई के प्रभावी एवं सफल आयोजन में सामुदायिक चिकित्सा विभाग के संकाय, कर्मचारी एवं एम.एस.डब्ल्यू. का पूर्ण सहयोग रहा, विशेष रूप से डॉ. नितेश मंगल, डॉ. मेहुल पटेल, डॉ. राजलक्ष्मी, डॉ. मानसी शर्मा, डॉ. अभिषेक मुखर्जी और डॉ. शिवांगी यादव का योगदान, अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. के.ए. वर्गीज़ (एमिरिटस प्रोफेसर, सांख्यिकी, चार दशकों से अधिक के अनुभव के साथ) एवं डॉ. आशीष जैन (एसोसिएट प्रोफेसर, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग, आर.एन.टी. मेडिकल कॉलेज, उदयपुर) ने प्रतिभागियों के साथ अपना व्यापक अनुभव साझा किया।
सीएमई के दौरान शोध समस्या का निर्धारण, अध्ययन अभिकल्प (स्टडी डिज़ाइन), साहित्य समीक्षा, डेटा वर्गीकरण एवं संरचना, सैंपल साइज़ कैलकुलेशन, उपयुक्त सांख्यिकीय परीक्षण का चयन, शोध नैतिकता तथा वैज्ञानिक लेखन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। कार्यक्रम में पीजी प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के रेजिडेंट्स तथा संस्थान के शोधार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। आयोजकों ने बताया कि यह कार्यशाला युवा शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी तथा उन्हें गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य करने में सहायता प्रदान करेगी। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।


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