प्रोस्टेट कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए समय पर जांच की ज़रूरत है। विशेषज्ञों ने 50 साल से ज़्यादा उम्र के पुरुषों को नियमित PSA टेस्ट करवाने की सलाह दी हैं।
उदयपुर : पारस हेल्थ उदयपुर, विशेष सर्जिकल प्रक्रियाओं और कैंसर की व्यापक देखभाल सेवाओं के ज़रिए इस क्षेत्र में प्रोस्टेट कैंसर के एडवांस्ड इलाज की उपलब्धता को बेहतर बना रहा है। हॉस्पिटल के विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर देते हैं कि बीमारी का जल्द पता चलना ही सर्वाइवल रेट और इलाज के परिणामों को बेहतर बनाने की कुंजी है।
प्रोस्टेट कैंसर दुनिया भर में पुरुषों को होने वाले सबसे ज्यादा कैंसर में से एक है। भारत में भी यह तेज़ी से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। प्रोस्टेट कैंसर पर जारी 'द लैंसेट कमीशन' के अनुसार दुनिया भर में प्रोस्टेट कैंसर के नए मामलों की सालाना संख्या 2020 में लगभग 14 लाख से बढ़कर 2040 तक लगभग 29 लाख होने का अनुमान है। इसकी मुख्य वजह आबादी का बूढ़ा होना और जनसांख्यिकीय बदलाव हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अनुमानित बढ़ोतरी इस बात पर ज़ोर देती है कि बीमारी के नतीजों को बेहतर बनाने और गंभीर स्टेज वाली बीमारी के बोझ को कम करने के लिए जागरूकता, नियमित जांच और समय पर इलाज कितना ज़रूरी है।
प्रोस्टेट कैंसर की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह है कि यह अक्सर चुपचाप पनपता है और शुरुआती स्टेज में कई मरीज़ों में कोई लक्षण नहीं दिखते। इस वजह से बीमारी के बढ़ने तक अक्सर इसका पता चलने में देरी हो जाती है।
पारस हेल्थ उदयपुर के यूरोलॉजिस्ट कंसलटेंट डॉ मुकेश सेवाग ने कहा, “प्रोस्टेट कैंसर जब होता है तो शुरुआती स्टेज़ में कोई विशेष लक्षण नज़र नहीं आता है। जब लक्षण नज़र आना शुरू होता है तो बीमारी काफ़ी गंभीर हो चुकी होती है और इस वजह से इलाज़ जटिल हो जाता है। जिन पुरुषों की उम्र 50 साल से ज्यादा है और जिनके परिवार में किसी को प्रोस्टेट कैंसर हो चुका है, उन्हें स्वस्थ महसूस करने के बावजूद भी नियमित PSA टेस्टिंग करवाते रहना चाहिए। सर्जरी की तकनीकों और कैंसर के इलाज में हुई तरक्की की वजह से अगर बीमारी का पता जल्दी चल जाए तो नतीजे बहुत अच्छे हो सकते हैं।”
मेडिकल एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि फैमिली हिस्ट्री एक बड़ा रिस्क फैक्टर है। इसी वजह से हाई-रिस्क वाले लोगों के लिए नियमित स्क्रीनिंग और प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप खास तौर पर ज़रूरी हो जाते हैं।
बढ़ती उम्र और बढ़ती उम्रदराज़ आबादी के साथ विशेषज्ञों का मानना है कि ज़्यादा जागरूकता, नियमित PSA स्क्रीनिंग और समय पर मेडिकल सलाह भारत में एडवांस्ड-स्टेज प्रोस्टेट कैंसर के बोझ को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है। पारस हेल्थ उदयपुर 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के पुरुषों को सलाह देता है कि वे अपनी नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान डॉक्टर से जरूरी स्क्रीनिंग टेस्ट के बारे में बात करें, ताकि बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सके और बेहतर रोकथाम संभव हो।