श्रीगंगानगर | गोविंद गोयलशहर की संकरी गलियों में कारों की अनाधिकृत और स्थायी पार्किंग अब केवल यातायात की नहीं, बल्कि आपसी रिश्तों की समस्या बनती जा रही है। आए दिन होने वाले विवादों ने गली-मोहल्लों के सौहार्दपूर्ण संबंधों को दांव पर लगा दिया है। जहां आसपास पीजी, होटल, ढाबे या फास्ट फूड सेंटर हैं, वहां यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है।
यह परेशानी रोज़ की है, लेकिन समाधान कहीं नजर नहीं आता। प्रशासन के पास गलियों में अवैध रूप से खड़ी गाड़ियों के चालान करने के अधिकार होने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। वहीं, राजनीतिक प्रतिनिधि भी इस विषय पर चुप्पी साधे हुए हैं, क्योंकि वे नहीं चाहते कि किसी भी पक्ष की नाराजगी उन्हें झेलनी पड़े।
जब जिम्मेदार संस्थाएं मौन हैं, तब नागरिकों को स्वयं आगे आना होगा। रिश्तों में खटास आने से पहले गली-मोहल्ले के लोगों को आपसी बैठक (मीटिंग) कर समाधान निकालना चाहिए। बैठक में यह स्पष्ट तय किया जाना चाहिए कि होटल, रेस्टोरेंट और फास्ट फूड सेंटर संचालक अपने ग्राहकों के लिए पार्किंग की उचित व्यवस्था करें। सड़क सार्वजनिक है, लेकिन ग्राहकों की पार्किंग की जिम्मेदारी व्यापारियों की ही है।
साथ ही यह भी तय हो कि यदि किसी घर में मेहमान आता है, तो उसकी गाड़ी को पार्क करने की जगह मिलनी चाहिए—चाहे वह कुछ समय के लिए आए या एक-दो दिन के लिए। पीजी संचालकों से भी मोहल्ले के लोग संवाद करें, ताकि वहां रहने वाले छात्रों की कई गाड़ियां स्थायी निवासियों के लिए परेशानी न बनें।
यह भी एक सच्चाई है कि कई छोटे मकानों में भी एक से अधिक वाहन हैं, जिन्हें सड़कों पर ही खड़ा कर दिया जाता है। ऐसे में समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि सामूहिक सहमति और नियमों से ही निकलेगा।
जीवन में सुख-दुख सभी के हिस्से आते हैं, इसलिए इस समस्या से निपटने के लिए मिल-जुलकर पहल करना जरूरी है। अकेला व्यक्ति लावारिस गाड़ी के मालिक से उलझने का साहस नहीं कर सकता, क्योंकि विवाद बढ़ने का खतरा बना रहता है।
इससे पहले कि हालात और बिगड़ें, गली-मोहल्लों में आपसी संवाद और बैठकों की शुरुआत कर देनी चाहिए। किसी न किसी को तो पहल करनी ही होगी—क्योंकि अब और देर करना समझदारी नहीं है।