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खरीफ कृषक वैज्ञानिक संवाद एवं कृषक पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन

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16 Jun 26
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खरीफ कृषक वैज्ञानिक संवाद एवं कृषक पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन

श्रीगंगानगर। आत्मा योजनान्तर्गत प्राकृतिक खेती विषय पर कृषि अनुसंधान केन्द्र, श्रीगंगानगर में मंगलवार को एक दिवसीय खरीफ कृषक वैज्ञानिक संवाद एवं कृषक पुरस्कार वितरण समारोह का भव्य आयोजन किया गया।
        संयुक्त निदेशक कृषि डॉ. सतीश कुमार शर्मा व उपस्थित जनप्रतिनिधिगणों के साथ सरस्वती पूजन कर कार्यक्रम को प्रारम्भ किया। डॉ. सतीश कुमार शर्मा ने प्राकृतिक खेती की महत्ता पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। कार्यक्रम के प्रारम्भ में तकनीकी मार्गदर्शन में कृषि अनुसंधान अधिकारी श्री जगजीत सिंह द्वारा प्राकृतिक खेती व जैविक खेती में जीवामृत, बीजामृत, दशपर्णी, नीमास्त्र का महत्व प्राकृतिक खेती के घटकों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। प्रगतिशील कृषक श्री गिरधारी लाल गेदर द्वारा गत 10 वर्षों से अपना रहे प्राकृतिक खेती पर अपने विचार किसानों से सांझा किए। सहायक प्राध्यापक पादप रोग विज्ञान कृषि अनुसंधान केन्द्र श्री प्रदीप कुमार ने खरीफ फसलों में लगने वाले रोग नियंत्रण के प्रबन्धन के बारे में किसानों से चर्चा की। सहायक निदेशक उद्यान श्री प्रदीप शर्मा द्वारा उद्यान विभाग की योजनाओं के बारे में अवगत करवाया गया साथ ही किचन गार्डनिंग के महत्व व उपयोगिता पर विस्तारपूर्वक बताते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि सभी आवश्यक रूप से घरेलु उपयोग हेतु गुणवत्तापूर्ण सब्जियां स्वयं की देख-रेख में उगायें, जिससे कि पूरे परिवार का स्वास्थ्य ठीक रहेगा व अनावश्यक खर्च में भी बचत होगी। कार्यक्रम में मंच संचालन का कार्य
श्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी पूर्व मंत्री राजस्थान सरकार ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व एवं उसकी उपयोगिता के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक खेती केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज और सुरक्षित भविष्य की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम करते हुए प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया। श्री टीटी ने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादित कृषि उपज न केवल स्वास्थ्यवर्धक एवं विषमुक्त होती है, बल्कि इससे भूमि की उर्वरता, जल संरक्षण तथा पर्यावरण संतुलन भी बना रहता है। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि ”यदि हम प्राकृतिक खेती को अपनाते हैं तो हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को जहरमुक्त भोजन, स्वच्छ पर्यावरण और बेहतर स्वास्थ्य प्रदान कर सकेंगे“ उन्होंने राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा किसानों के हित में संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं एवं अनुदान कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए किसानों से इन योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने प्राकृतिक खेती को कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता एवं किसानों की आर्थिक समृद्धि का आधार बताते हुए इसे जन-जन तक पहुंचाने पर बल दिया।
        श्रीमती प्रियंका बेलान, श्री सतपाल कासनिया व श्री आत्मा राम तरड़ ने अपने संबोधनों में किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को देखते हुए प्राकृतिक एवं जैविक खेती समय की आवश्यकता बन गई है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर न केवल खेती की लागत कम की जा सकती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ, सुरक्षित एवं विषमुक्त भोजन उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने किसानों से सरकार द्वारा संचालित कृषि योजनाओं का लाभ लेते हुए प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने का आग्रह किया।
        सहायक निदेशक कृषि श्री सुशील कुमार शर्मा ने कृषि विभाग द्वारा किसानों को देय सुविधाओं के बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा की। आत्मा योजना अंतर्गत वर्ष 2025-26 में चयनित कृषकों को विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रतीकात्मक चैक, मेडल देकर जनप्रतिनिधियों के करकमलों द्वारा सम्मानित किया गया।
        उप परियोजना निदेशक (आत्मा) श्री सुदेश कुमार ने प्राकृतिक खेती व जैविक खेती में जीवामृत, बीजामृत, दशपर्णी, नीमास्त्र का महत्व प्राकृतिक खेती में बताया और आत्मा योजना अन्तर्गत किसान हित के लिए आत्मा द्वारा चलाई गई योजनाएं कृषक प्रशिक्षण, कृषक भ्रमण, कृषक पुरस्कार, किसान मेला इत्यादि में कृषक भाग लेकर नये नवाचार को अपनाकर कृषि उत्पादन में वृद्धि करने व आय बढ़ाने की सलाह दी।
        परियोजना निदेशक (आत्मा) डॉ. विनोद सिंह गौतम द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, किसानों तथा जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों का अभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को नवीन कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती तथा विभागीय योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराना एवं उत्कृष्ट कृषकों को सम्मानित कर अन्य किसानों को प्रेरित करना रहा।
 कार्यक्रम में श्री प्रदीप धेरड़, श्री सुरेन्द्र गोदारा, श्री महेन्द्रपाल, श्री शांति धारिवाल, श्रीमती चेष्टा सरदाना, श्रीमती संतोष बावरी, श्री शिवप्रकाश तेहरपुरिया, श्री रामप्रकाश गोदारा सहित जिले केे प्रगतिशील कृषकों, कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन श्री प्रदीप शर्मा द्वारा किया गया।


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