उदयपुर। कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु पूज्यपाद श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज की निश्रा में चल रहे श्री महालक्ष्मी कोटि कुंकुमार्चन यज्ञ, पूजा, साधना महामहोत्सव का सोमवार को विधिपूर्वक महपूर्णाहूति के साथ समापन हुआ।
महालक्ष्मी महायज्ञ में 1008 समृद्धि कलश सिद्ध किये गए। हजारों किलो मेवे, प्राकृतिक ओषधियों, चंदन, गाय के शुद्ध देशी की हजारों आहुतियां प्रतिदिन हुई। जगद्गुरू देव की निश्रा में काशी के 135 विद्वानों द्वारा विधि विधान के साथ समूची यज्ञ पूजा सम्पन्न कराई गई। जनसामान्य के सुख समृद्धि की कामना की गई।
समिति के अध्यक्ष नानालाल बया, महामंत्री देवेन्द्र मेहता ने बताया कि महोत्सव की आठवीं रात्रि में कथा श्रवण कराते जगद्गुरू श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज ने बताया कोई ईंट मिट्टी का घर बनाकर प्रसन्न होते हैं लेकिन भागयशाली वे होते हैं जो भगवान का घर बनाना चाहते हैं।
जगद्गुरु ने कथा में बताया दक्षिण पुसलार नयनार नाम के ब्राह्मण हुए। जो शिव के अनन्य भक्त थे। उनकी भावना शिव जी का मंदिर बनाने की थी लेकिन अर्थाभाव के कारण वे ऐसा कर न सके। तब उन्होंने शिव की असीम भक्ति करते हुए अपने हृदय में भगवान शिव के मंदिर की कल्पना की। मंदिर का हर भाग उन्होंने हृदय में बसाया। 12 वर्ष में उनके हृदय में मंदिर ने पूर्णाकार लिया। शिव ऐसी भक्ति देख प्रसन्न हो गए। इस बीच राजा पल्लव ने भी विशाल शिव मंदिर बनाया और प्रभु शिव से मंदिर आने की प्रार्थना की। शिवजी ने राजा को स्वप्न में दर्शन दिए और कहा कि पहले वे उस भक्त नायनार के मंदिर में जाएंगे जिसने अपने हृदय में स्थान दिया है। यह सुन राजा विस्मित रह गए। राजा पल्लव ने पता लगाकर पुसलार नयनार से भेंट की। राजा भी नयनार के भक्ति भाव देख भाव विभोर हो गए। आज भी पुसलार नयनार के मन का मंदिर दक्षिण में चेन्नई से 40 किमी दूर पृकृति की गोद में स्थित है। दक्षिण में शिव के 63 अनन्य भक्तों में वे एक थे।
गुरुदेव ने कहा भगवान उन्ही पर कृपा बरसाते हैं जो उन्हें हृदय में बसाता है। हृदय के देवता ही सच्चे देवता हैं। जगद्गुरु श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी ने कहा कि विचार और मुख से निकले शब्दों के अनुसार आपके आसपास तरंगें चलती हैं। इसलिए आप सोचेंगे जीवन मे आनन्द है और आनंद आएगा तो आप आनन्दित हो उठेंगे। यदि आपने परेशानी के बारे में सोचा और बोला तो वह बढ़ेगी। हमेशा स्वच्छ रहें, स्वच्छ वस्त्र पहनें। आपके जीवन में सकारात्मकता बनी रहेगी।
भक्ति रंग में खूब रंगे श्रद्धालु :
जगद्गुरु पूज्यपाद श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज ने सुमधुर भक्ति संगीत की ऐसी तान छेड़ी की श्रद्धालु खुद को थिरकने से रोक न सके। कथा में देर रात तक भक्ति संगीत का सिलसिला चलता रहा। इस बीच गुरूदेव ने कई लंबी बीमारी से पीड़ित विशेषकर युवाओं को अपनी सिद्ध शक्ति से रोग से मुक्ति दिलाई। जबकि कई भक्तों ने चमत्कारों का अनुभव भी गुरुदेव ने कराया।
महाराणा प्रताप की विशाल प्रतिकृति देखने उमड़ा सैलाब :
महा महोत्सव के प्रांगण में बनाई गई वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की विशाल प्रतिकृति आकर्षण का केंद्र बन गई है। प्रतिमा इतनी नयनाभिराम है कि महोत्सव में शामिल श्रद्धालुओं के अलावा आम जन की भारी भीड़ इस विशाल प्रतिमा को निहारने आ रही है।