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मुमुक्षु शीतल जैन का भव्य बहुमान

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22 Jan 26
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मुमुक्षु शीतल जैन का भव्य बहुमान

उदयपुर | सांसारिक सुखों का परित्याग कर आत्म-कल्याण की राह चुनने वाली मुमुक्षु शीतल जैन का आज श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय परिवार द्वारा भावभीना अभिनंदन किया गया। श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय परिवार द्वारा आयोजित एक विशेष समारोह में मुमुक्षु शीतल का गौरवशाली बहुमान कर उनके वैराग्य भाव की अनुमोदना की गई।

इस आध्यात्मिक उत्सव का आयोजन श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय परिसर में स्थित उपाध्याय पुष्कर मुनि जी महाराज के पावन स्मृति स्थल 'पुष्कर गुरु पावन धाम स्मारक' पर किया गया। इस अवसर पर वातावरण उस समय पूर्णतः धर्ममय हो गया जब उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने मुमुक्षु के साथ सामूहिक रूप से नवकार मंत्र का जाप किया। जाप के पश्चात ग्रंथालय परिवार के सदस्यों ने मुमुक्षु शीतल जैन को श्रीफल भेंट किया, माला पहनाई और शाल ओढ़ाकर उनका भावभीना स्वागत किया।
श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय के महामंत्री रमेश खोखावत, कोषाध्यक्ष विजय सिंह जी छाजेड़ ,मंत्री निर्मल पोखरणा, जयप्रकाश भंडारी, राजेंद्र लोढा , लहरसिंह छाजेड, महासती श्री  सोहन कुंवर महिला  मंडल अध्यक्षा सुमित्रा सिंघवी,  मंत्री नीता छाजेड, जैन कॉन्फ्रेंस महिला शाखा राजस्थान प्रान्त की अध्यक्ष डॉ पुष्पा जैन,  श्री तारक गुरु जैन मित्र मंडल के अध्यक्ष जितेंद्र बाबेल, नरेंद्र जी सिंघवी, अनिल सिंयाल, दर्शन सिंघवी, दिनेश हरकावत, भुरी बाई सिंघवी, अरुण सिंयाल सहित गणमान्य महानुभावों की उपस्थिति रही।


उच्च शिक्षा और वैराग्य का अद्भुत संगम

मूलतः उदयपुर जिले के कमोल गांव में जन्मी 36 वर्षीय शीतल जैन आज के शिक्षित युवाओं के लिए एक मिसाल पेश कर रही हैं। उन्होंने जैनोलॉजी (जैन दर्शन) में एम.ए. (M.A.) की उपाधि प्राप्त की है। अपनी शैक्षणिक योग्यता के माध्यम से जैन सिद्धांतों को गहराई से समझने के बाद उन्होंने संयम पथ पर चलने का दृढ़ निश्चय किया। समाज जनों का कहना है कि शीतल जैन ने यह सिद्ध कर दिया है कि वास्तविक ज्ञान वही है जो व्यक्ति को मुक्ति के मार्ग की ओर ले जाए।

साध्वी संयमलता जी के सानिध्य में ग्रहण करेंगी दीक्षा

मुमुक्षु शीतल जैन का भागवती दीक्षा महोत्सव आगामी 22 फरवरी, 2026 को उनके जन्मस्थान कमोल गांव में आयोजित किया जाएगा। वे साध्वी श्री संयमलता जी महाराज साहब के सानिध्य में विधिवत दीक्षा ग्रहण कर सांसारिक संबंधों का त्याग करेंगी और श्रमणी संघ की मर्यादाओं में बंधकर प्रभु महावीर के मार्ग पर आगे बढ़ेंगी।

श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय परिवार ने मुमुक्षु के उज्ज्वल संयमी जीवन की मंगल कामना प्रेषित की।


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