उदयपुर। “आगामी समय में समुद्र के जलस्तर में निरंतर वृद्धि के कारण द्वीप आधारित देशों के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न होने की संभावना है। ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के कारण वायुमंडलीय तापमान बढ़ रहा है, जिससे पर्वतीय हिम, ग्लेशियर आदि तेजी से पिघल रहे हैं और समुद्र का स्तर लगातार बढ़ रहा है। इस प्रक्रिया को नियंत्रित करने हेतु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी देशों द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं तथा भारत ने भी “नेट जीरो” कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। उद्योगों में उत्पादन प्रक्रिया के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है।“
ये विचार श्री कोमल कोठारी, कार्यकारी अध्यक्ष, उदयपुर इंडस्ट्रियल वेस्ट मैनेजमेंट एंड रिसर्च सेंटर ने अपने संबोधन में व्यक्त किए।
उदयपुर इंडस्ट्रियल वेस्ट मैनेजमेंट एंड रिसर्च सेंटर द्वारा उदयपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सहयोग से “कार्बन क्रेडिट” विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन बुधवार, 25 मार्च 2026 को यूसीसीआई के पायरोटेक टेम्पसेंस हॉल में किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों से 50 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की रिसोर्स पर्सन हैदराबाद से आईं कार्बन क्रेडिट विशेषज्ञ सुश्री आकांक्षा उपाध्याय थीं। यूसीसीआई के अध्यक्ष श्री मनीष गलुंडिया ने उनका एवं उपस्थित सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि “कार्बन क्रेडिट” विषय भले ही प्रतिभागियों के लिए नया हो, लेकिन यह समय की आवश्यकता है। आने वाले समय में उद्योगों को इससे संबंधित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। उन्होंने उद्योग प्रतिनिधियों से इस परिवर्तन को सकारात्मक रूप में स्वीकार करने का आह्वान किया।
श्री सी.एस.आर. मेहता, सदस्य सचिव, उदयपुर इंडस्ट्रियल वेस्ट मैनेजमेंट एंड रिसर्च सेंटर ने रिसोर्स पर्सन का परिचय प्रस्तुत किया तथा जानकारी दी कि सरकार द्वारा औद्योगिक उत्पादन प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन नियंत्रण से संबंधित नियम शीघ्र लागू किए जाने वाले हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपाध्यक्ष श्री महेंद्र सिंह खीमेसरा एवं मानद कोषाध्यक्ष सुश्री हसीना चक्कीवाला ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
प्रशिक्षण सत्र में सुश्री आकांक्षा उपाध्याय ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से कार्बन क्रेडिट की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उद्योग किस प्रकार कार्बन क्रेडिट नियमों का पालन करते हुए अपने व्यवसाय को व्यवहारिक और लाभकारी बना सकते हैं। उन्होंने “नेट जीरो”, डेटा-आधारित भविष्य, कार्बन फुटप्रिंट की गणना, व्यवसाय में कार्बन का महत्व, जलवायु परिवर्तन एवं मानव उत्पादकता पर इसके प्रभाव तथा निर्माण प्रक्रिया के दौरान कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उद्योग बिना किसी अनुपालन के कार्य कर रहे हैं, लेकिन निकट भविष्य में सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
कार्यक्रम का समन्वय डॉ. साक्षी जैन, कार्यकारी अधिकारी द्वारा किया गया। अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।