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इंटैक द्वारा पक्षी उद्यान बावड़ी में चला विशेष संरक्षण एवं सफाई अभियान

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16 Jun 26
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इंटैक द्वारा पक्षी उद्यान बावड़ी में चला विशेष संरक्षण एवं सफाई अभियान

उदयपुर। उदयपुर की समृद्ध जल, सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विरासत के संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटैक) उदयपुर क्षेत्रीय अध्याय ने राजस्थान वन विभाग के सहयोग से आज प्रातः पक्षी उद्यान (बर्ड पार्क) स्थित ऐतिहासिक बावड़ी में विशेष सफाई एवं संरक्षण अभियान आयोजित किया। इस अभियान में 40 से अधिक स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर धरोहर संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।
अभियान में इंटैक के सदस्य गौरव एस. सिंघवी, रानू सिंघवी, प्रियंका वैष्णव, सतीश शर्मा, महीप भटनागर एवं मुनीष गोयल, राजस्थान वन विभाग के उप वन संरक्षक (डीसीएफ) यदवेन्द्र सिंह चूंडावत सहित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी, वर्व (स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड इंटीरियर डिजाइनिंग) के विद्यार्थी तथा ग्रीन पीपल सोसायटी के सदस्य शामिल रहे।
सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक श्रमदान करते हुए बावड़ी परिसर एवं उसके आसपास उग आई अनावश्यक झाड़ियों, खरपतवार तथा ऐतिहासिक संरचना को नुकसान पहुँचाने वाली वनस्पतियों को सावधानीपूर्वक हटाया। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी वनस्पतियों की जड़ें समय के साथ पत्थर की चिनाई, दीवारों एवं मूल स्थापत्य संरचना के भीतर तक प्रवेश कर उन्हें कमजोर कर देती हैं, जिससे स्मारक के अस्तित्व एवं स्थायित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
बावड़ी में संरक्षण एवं सफाई कार्य पिछले एक सप्ताह से निरंतर जारी है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई स्थानों पर वृक्षों एवं अन्य वनस्पतियों की जड़ें दीवारों और पत्थरों की जोड़ाई के भीतर तक गहराई से पहुँच चुकी हैं। इन्हें हटाने का कार्य अत्यंत सावधानी तथा वैज्ञानिक पद्धति से किया जाना आवश्यक है, जिससे ऐतिहासिक संरचना को किसी प्रकार की क्षति न पहुँचे। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में चरणबद्ध तरीके से इन जड़ों एवं अवांछित वनस्पतियों को हटाया जाएगा तथा आगामी कुछ महीनों तक नियमित सफाई, निगरानी एवं संरक्षण कार्य जारी रखा जाएगा, ताकि पुनः दीवारों एवं संरचना पर हानिकारक वनस्पतियाँ विकसित न हो सकें।
यह अभियान केवल सफाई गतिविधि तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य आमजन, विशेषकर युवाओं एवं विद्यार्थियों में पारंपरिक जल संरचनाओं के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय महत्व के प्रति जागरूकता विकसित करना तथा उनके संरक्षण में सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करना भी था।
इस अवसर पर इंटैक उदयपुर क्षेत्रीय अध्याय के संयोजक गौरव एस. सिंघवी ने कहा कि उदयपुर की बावड़ियाँ केवल जल संचयन के साधन नहीं हैं, बल्कि वे हमारे पूर्वजों की दूरदर्शिता, पारंपरिक जल प्रबंधन ज्ञान एवं उत्कृष्ट स्थापत्य कौशल की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि इन ऐतिहासिक जल संरचनाओं का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है और इनके माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया जा सकता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों, विशेष रूप से विद्यार्थियों एवं युवा स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि समाज की सहभागिता के बिना धरोहर संरक्षण के प्रयास पूर्णतः सफल नहीं हो सकते।
वन विभाग के अधिकारियों ने भी इस संयुक्त पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत एक-दूसरे की पूरक हैं। ऐसे अभियान पर्यावरण संरक्षण और धरोहर संरक्षण के बीच सशक्त समन्वय स्थापित करते हैं तथा नागरिकों में अपनी विरासत के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को बावड़ियों के इतिहास, उनकी निर्माण तकनीकों, पारंपरिक जल संरक्षण प्रणाली में उनकी भूमिका तथा वर्तमान संरक्षण चुनौतियों के संबंध में भी जानकारी प्रदान की गई। उपस्थित विद्यार्थियों एवं स्वयंसेवकों ने भविष्य में भी ऐसे संरक्षण अभियानों में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।
संरक्षण कार्यों को दीर्घकालिक रूप से आगे बढ़ाने के लिए एक समन्वय समिति का गठन भी किया गया है। समिति में इंटैक की ओर से गौरव एस. सिंघवी एवं सतीश शर्मा तथा राजस्थान वन विभाग की ओर से उप वन संरक्षक (डीसीएफ) यदवेन्द्र सिंह चूंडावत के नेतृत्व में संबंधित अधिकारी एवं विशेषज्ञ शामिल हैं। यह समिति संरक्षण कार्यों की नियमित समीक्षा करेगी तथा वैज्ञानिक एवं टिकाऊ संरक्षण उपायों के माध्यम से बावड़ी के पुनर्जीवन एवं संरक्षण अभियान को निरंतर आगे बढ़ाएगी।
यह अभियान उदयपुर की अमूल्य जल धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल सिद्ध हुआ है। इंटैक एवं वन विभाग की यह संयुक्त पहल न केवल एक ऐतिहासिक संरचना के संरक्षण का प्रयास है, बल्कि समाज में अपनी सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत के प्रति जागरूकता, उत्तरदायित्व एवं सहभागिता की भावना को भी सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।


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