उदयपुर। पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाबचंद कटारिया ने शनिवार को उदयपुर शहर की दीर्घकालीन पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु निर्माणाधीन देवास चरण- तृतीय एवं चरण-चतुर्थ पेयजल परियोजना का दौरा कर निर्माणाधीन टनल एवं बांध कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया। इस अवसर पर जल संसाधन विभाग द्वारा श्री कटारिया का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
राज्यपाल श्री कटारिया सर्वप्रथम उंडीथल स्थित निर्माणाधीन टनल- तृतीय स्थल पहुंचे, जहां उन्होंने सुरंग निर्माण कार्य की प्रगति, निर्माण तकनीक, सुरक्षा व्यवस्थाओं एवं गुणवत्ता का अवलोकन किया। विभागीय अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों ने उन्हें परियोजना की वर्तमान प्रगति, तकनीकी विशेषताओं तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। इसके उपरांत उन्होंने नाल स्थित निर्माणाधीन देवास चरण-तृतीय बांध का निरीक्षण कर विभिन्न निर्माण गतिविधियों एवं परियोजना के तकनीकी पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।
इस दौरान उन्होंने टनल निर्माण स्थल पर वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं हरित विकास का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं तथा विकास कार्यों के साथ प्रकृति का संरक्षण भी समान रूप से आवश्यक है।
निरीक्षण के दौरान परियोजना की प्रमुख तकनीकी विशेषताओं से भी माननीय राज्यपाल को अवगत कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि देवास चरण- तृतीय बांध की जल भंडारण क्षमता 703 एमसीएफटी तथा देवास चरण- चतुर्थ बांध की क्षमता 390 एमसीएफटी है। दोनों परियोजनाओं से प्रतिवर्ष 1000 एमसीएफटी पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत कुल 14.65 किलोमीटर लंबी सुरंग (देवास- चतुर्थ से देवास- तृतीय - 4.15 कि.मी. एवं देवास- तृतीय से देवास- द्वितीय 10.50 कि.मी.) का निर्माण किया जा रहा है। लगभग 1690.55 करोड़ लागत वाली यह परियोजना उदयपुर शहर की भावी पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
श्री कटारिया ने परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनस्र्थापन योजना की भी विस्तृत जानकारी प्राप्त की। विभागीय अधिकारियों ने उन्हें प्रस्तावित पुनर्वास स्थलों पर विकसित की जा रही आधारभूत सुविधाओं, आवासीय भूखंडों, सड़क, पेयजल, विद्युत एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में अवगत कराया। उन्होंने निर्देश दिए कि परियोजना प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनस्र्थापन का कार्य पूरी संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप समयबद्ध रूप से सुनिश्चित किया जाए। श्री कटारिया ने परियोजना को उदयपुर के भविष्य की जल सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसके पूर्ण होने से उदयपुर शहर को लंबे समय तक स्वच्छ एवं पर्याप्त पेयजल उपलब्ध होगा। साथ ही पिछोला, फतहसागर झीलों के जलस्तर को बनाए रखने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना उदयपुर के पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन संवर्धन एवं समग्र विकास को नई दिशा प्रदान करेगी। उन्होंने विभागीय अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी को गुणवत्ता, सुरक्षा एवं समयबद्धता के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर गोगुंदा विधायक प्रताप गमेती, उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन, समाजसेवी पुष्कर तेली एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे। जल संसाधन विभाग की ओर से अतिरिक्त मुख्य अभियंता वीरेन्द्र सागर, अधीक्षण अभियंता मनोज जैन, अधिशासी अभियंता बीरबल डूडी सहित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारीगण तथा निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि भी निरीक्षण के दौरान उपस्थित रहे। राज्यपाल ने परियोजना के सफल एवं समयबद्ध क्रियान्वयन हेतु विभागीय अधिकारियों, जिला प्रशासन तथा निर्माण एजेंसी के समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना उदयपुर शहर की दीर्घकालीन जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण, झीलों के संवर्धन एवं भावी विकास की आधारशिला सिद्ध होगी।